लोहा तोड़ती है चूड़ी वाली नरम कलाई से

​अहले सुबह हाथ में थाम लेती है हथौड़ा खुद भट्टी मे़ं तपकर बच्चो के पेट की ज्वाला करती है शांत मध्य प्रदेश के घूमंतु जातियो ने गंजबाजार पर डाला डेरा लोहे के कृषि यंत्रो को […]

वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच फंसा राष्ट्रवाद

कौशलेन्द्र झा राजनीति बामपंथ की हो या दक्षिणपंथ की। पर, राजनीति तो राष्ट्र के लिए ही होनी चाहिए। कही, ऐसा तो नही कि बाम और दक्षिण वाले अपने अपने लिए दो अलग राष्ट्र चाहतें हो? […]

कश्मीर समस्या का अनकही सच

कौशलेन्द्र झा यह एक दिलचस्प बात है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 111 सीटें हैं लेकिन चुनाव यहां सिर्फ 87 सीटों पर ही होता है। क्या आप जानतें हैं कि 24 सीटें खाली क्यों रहती […]

टूटी कुर्सी, कहीं विचारधाराओं में बदलाव का संकेत तो नही?

कौशलेन्द्र झा मुजपफ्फरपुर। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का दंभ भरने वाले, हम भारतवंशियों को आखिर ऐसा क्या हो गया है? क्यों हम अपने ही आचरणों से अपना ही जगहसाई होने के बावजूद गौरवान्वित महसूस […]