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बिहार में ठंड का कहर और तेज, अगले तीन दिनों तक बढ़ेगी सर्दी

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बिहार में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले तीन दिन राज्यवासियों के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। मौसम विभाग के ताजा weather forecast के अनुसार, राज्य में रात के तापमान में तेज गिरावट दर्ज की जा सकती है। minimum temperature में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने की संभावना है, जिससे कई जिलों में cold wave जैसी स्थिति बन सकती है। इसका सीधा असर आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर पड़ने की आशंका है।

राज्य के अधिकांश हिस्सों में पहले से ही ठिठुरन महसूस की जा रही है। सुबह और देर रात की ठंड अब ज्यादा परेशान करने लगी है। दिन में धूप निकलने के बावजूद ठंडी हवाओं के कारण लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

क्यों बढ़ रही है बिहार में ठंड

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर बिहार तक साफ दिखाई दे रहा है। हिमालयी क्षेत्रों में हो रही लगातार बर्फबारी के कारण ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएं मैदानी इलाकों की ओर बढ़ रही हैं। इन हवाओं की वजह से तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।

दिन के समय सूर्य की मौजूदगी के बावजूद वातावरण में ठंड बनी रहती है। खासकर सुबह और रात के समय ठंड का असर सबसे ज्यादा महसूस किया जा रहा है। खुले इलाकों में ठिठुरन अधिक बढ़ गई है, जिससे लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं।

इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना

उत्तर और मध्य बिहार के जिलों में ठंड का प्रभाव अधिक रहने का अनुमान है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, भागलपुर, सहरसा, समस्तीपुर, बेगूसराय और छपरा जैसे जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे जा सकता है।

कुछ स्थानों पर तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। इसके साथ ही सुबह के समय घना कोहरा छाने की संभावना है, जिससे दृश्यता काफी कम हो सकती है। इससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की भी आशंका बनी हुई है।

cold wave से स्वास्थ्य पर बढ़ सकता है खतरा

मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार तापमान में तेज गिरावट के कारण cold wave जैसी स्थिति बन सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ सकता है। ठंडी हवाओं के कारण सांस से जुड़ी बीमारियां, जोड़ों का दर्द और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में काम करने वाले मजदूरों और किसानों के लिए ठंड बड़ी परेशानी बन सकती है। लंबे समय तक ठंड में रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

सामान्य जनजीवन पर दिखने लगा असर

बढ़ती ठंड का असर अब रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ नजर आने लगा है। सुबह और शाम के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है। लोग अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।

स्कूल जाने वाले बच्चों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों को ठंड के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों में भी सुबह के समय सन्नाटा पसरा रहता है और दुकानों की गतिविधियां देर से शुरू हो रही हैं। कई जगहों पर लोग अलाव का सहारा लेते नजर आ रहे हैं।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सतर्क

ठंड की बढ़ती तीव्रता को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गए हैं। नगर निकाय क्षेत्रों में अलाव जलाने की व्यवस्था की जा रही है। रैन बसेरों को सक्रिय किया जा रहा है ताकि बेघर लोगों को राहत मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि अत्यधिक ठंड में बाहर निकलने से बचें। गर्म कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अस्पतालों को cold related बीमारियों के मरीजों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

कोहरा भी बनेगा परेशानी की वजह

ठंड के साथ-साथ कोहरा भी आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ा सकता है। सुबह के समय घना कोहरा छाने से दृश्यता बेहद कम हो सकती है। इससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

वाहन चालकों को सावधानी बरतने और कम गति से वाहन चलाने की सलाह दी गई है। पैदल चलने वालों को भी सतर्क रहने की जरूरत है।

आगे कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक ठंड का यह दौर जारी रहेगा। इस दौरान न्यूनतम तापमान में कोई खास सुधार की संभावना नहीं है। इसके बाद धीरे-धीरे तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।

हालांकि, राहत मिलने के बाद भी सुबह के समय ठंड और कोहरा बना रह सकता है। ठंडी हवाओं का असर पूरी तरह समाप्त होने में अभी समय लग सकता है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। पर्याप्त गर्म कपड़े पहनना, गर्म भोजन करना और सुबह-शाम बाहर निकलने से बचना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष रूप से ठंड से सुरक्षित रखने की जरूरत है।

कुल मिलाकर, बिहार में ठंड का असर फिलहाल कम होने वाला नहीं है। आने वाले तीन दिन और अधिक सर्द साबित हो सकते हैं। ऐसे में सावधानी और सतर्कता ही इस cold wave से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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