मीनापुर में बूढ़ी गंडक का तटबंध खुला छोड़ने की असली वजह

अंचल प्रशासन ने लाइफ जैकेट के लिए लगाई गुहार

KKN न्यूज ब्यूरो। बारिश का मौसम शुरू होते ही बिहार में बाढ़ का खतरा अब नई नहीं रही। किंतु, मुजफ्फरपुर जिला की समस्या इससे इतर है। दरअसल, जिले के मीनापुर प्रखंड में बूढ़ी गंडक नदी का खुला तटबंध यहां की 28 में से 27 पंचायत के लोगो के लिए तबाही का सबब बन चुकी है। जानकार बतातें है कि एक रणनीति के तहत बूढ़ी गंडक नदी की कहर से जिला मुख्यालय को बचाने के लिए मीनापुर को बाढ़ की आगोश में छोड़ दिया है। दूसरी ओर लोगो के असंतोष को दबाने की गरज से प्रशासन ने बाढ़ की खतरो से निपटने का स्वांग शुरू कर दिया है। कहतें है कि बूढ़ी गंडक नदी की जलस्तर में बृद्धि शुरू होते ही अंचल प्रशासन ने कमर कस ली है। बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में बृद्धि के साथ प्रखंड की 28 में से 27 पंचायत में बाढ़ का पानी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। दूसरी ओर अंचलाधिकारी रामजपी पासबान ने बताया कि लोगो को बचाने के लिए तैयारी मुकम्मल है। रिहायसी इलाका में बाढ़ का पानी प्रवेस किया तो वहां की आबादी को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए 12 सरकारी नाव तैयार है। हालात और बिगड़ने पर निजी नाव को काम पर लगाया जायेगा। इसके लिए 17 निजी नाव मालिको से करार हो चुका है। हालांकि, लाइफ जैकेट नहीं है। लाइफ जैकेट के लिए जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई है। आपदा विभाग ने यहां के 22 गोताखोर को विशेष ट्रेनिंग देकर आपातकाल के लिए तैयार कर दिया है।

75 स्थानो पर सेल्टर बनाने की है योजना

सीओ ने बताया कि विस्थापित हुए एक हजार परिवार के लिए पॉलीथिन स्टॉक है। विस्थापितो के रहने के लिए प्रशासन ने 75 उंचे स्थान को चिन्हित किया है। विस्थापित लोगो के लिए शौचालय व पेयजल के लिए स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। अंचल प्रशासन ने किसी भी आपातकाल से निपटने के लिए किराना दुकानदार और टेंट हाउस वाले से भी एकरारनामा कर लिया है। उंचे  स्थानो पर सामुदायिक किचेन चलाने के लिए कर्मचारी की तैनाती कर दी गई है।

पशुचारा और सर्पदंश से निपटने की हुई व्यवस्था

अंचल प्रशासन के दावो पर एकीन करें तो प्रशासन ने तीन जोन में बांट कर बाढ़ में फंसे पशुओं के लिए चारा और इलाज की व्यवस्था की है। इसके लिए प्रखंड मुख्यालय के अतिरिक्त पशु चिकित्सालय रामपुरहरि और सिवाईपट्टी में पशुओं के चारा व दवा की व्यवस्था की गई है। अधिकारी ने बताया कि पशु चारा के लिए जिला में टेंडर भी हो चुका है। इसी तरह सर्पदंश की दवा के साथ सभी आवश्यक दवाओं के साथ मानव चिकित्सा दल को भी तैयार रहने को कह दिया गया है।

तीन शिफ्ट में 24 घंटा काम करेगा कंट्रोलरूम

मीनापुर में बाढ़ आने पर कंट्रौलरूम काम करने लगेगा। पहली बार यहां तीन शिफ्ट में 24 घंटा काम करने की योजना है। पहला शिफ्ट सुबह 6 बजे से 2 बजे तक, फिर 2 बजे से रात के 10 बजे तक और तीसरा शिफ्ट रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक काम करेगा। इसके लिए कंट्रौल रुम में तीन शिफ्ट में कर्मचारी की प्रतिनियुक्त कर दी गई है। सीओ ने बताया कि सरकार के आपदा संपूष्ठि पोटल पर 86 प्रतिशत लोगो का नाम पहले से दर्ज है। ताकि, बाढ़ से नुकसान हुए फसल आदि का मुआवजा तत्काल उसके खाता में भेज दिया जाये।

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