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गया प्रवास पर बागेश्वर धाम सरकार: पितृपक्ष मेले में कराएंगे पिंडदान और कथा

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बागेश्वर धाम सरकार, पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर जानकारी दी है कि वह 10 सितंबर से 16 सितंबर तक बिहार के पवित्र तीर्थ गया में प्रवास करेंगे। इस दौरान वह धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होंगे और श्रद्धालुओं से भी मुलाकात करेंगे। उनके इस दौरे को गया में आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और भक्तों में भी खास उत्साह है।

पितृपक्ष के मौके पर विशेष अनुष्ठान

पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री अपने शिष्यों के साथ पितृपक्ष मेला के दौरान गया पहुंचेंगे। यहां वे त्रिपिंडी श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण कराएंगे। इसके साथ ही एकादश भागवत कथा का भी आयोजन होगा। उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज भी गया आकर अपने पितरों का पिंडदान और तर्पण करते थे। वहां के वर्षों पुराने बही खाते में उनके पूर्वजों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।

इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बागेश्वर धाम सरकार अपने अनुयायियों के साथ पितृपक्ष में यह धार्मिक कार्य संपन्न कराएंगे।

कथा और प्रवास का संभावित स्थान

हालांकि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि गया में किस स्थान पर एकादश कथा और पिंडदान होगा, लेकिन बताया जा रहा है कि बोधगया के एक निजी रिसॉर्ट में उनका प्रवास रहेगा। यहीं पर वे अपने शिष्यों के साथ श्राद्ध और कथा आयोजन करेंगे। वर्ष 2024 में भी उन्होंने इसी स्थान पर कथा सुनाई थी और धार्मिक अनुष्ठान कराए थे।

श्रद्धालुओं में उत्साह

बागेश्वर धाम सरकार के गया आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। भक्तों का मानना है कि उनके साथ पिंडदान और तर्पण कराने से पितरों की आत्मा को शांति मिलेगी और जीवन में आशीर्वाद प्राप्त होगा।

पितृपक्ष मेला वैसे भी हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, लेकिन इस बार पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की उपस्थिति इसे और खास बना देगी। गया और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक माहौल पहले से ही गहराता जा रहा है।

गया और पितृपक्ष का महत्व

हिंदू धर्म में गया को पितृपक्ष श्राद्ध और पिंडदान के लिए सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। मान्यता है कि यहां पितरों के नाम से किए गए कर्मकांड उनके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां पहुंचते हैं।

बागेश्वर धाम सरकार का यहां आना इस परंपरा को और भी मजबूती देगा और श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन भी मिलेगा।

10 से 16 सितंबर तक का यह प्रवास धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। पितृपक्ष मेला, पिंडदान, तर्पण और भागवत कथा के साथ यह सप्ताह भक्तों के लिए अद्वितीय अनुभव लेकर आएगा।

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