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बिहार में होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन

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बिहार में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 अगस्त 2025 को श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसकेएमसीएच) परिसर में स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल और अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया। यह उद्घाटन बोधगया से वर्चुअल तरीके से हुआ। इस अस्पताल का उद्देश्य राज्य में कैंसर के इलाज को सुलभ और सस्ता बनाना है। यह आधुनिक अस्पताल 570 करोड़ रुपये की लागत से तीन साल में तैयार हुआ है और अब यहां कैंसर के मरीजों के इलाज के लिए सभी सुविधाएं एक छत के नीचे उपलब्ध होंगी।

एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं

इस अस्पताल का प्रमुख आकर्षण यह है कि यहां ओपीडी, जांच, सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोलॉजी की सारी सुविधाएं एक साथ मिलेंगी। मरीजों को इलाज के लिए अब अलग-अलग जगहों पर नहीं जाना पड़ेगा। यह सुविधा समय की बचत करने के साथ-साथ कैंसर के मरीजों को बेहतर इलाज प्रदान करेगी। इसके अलावा, आयुष्मान भारत कार्ड के तहत मरीजों को रियायती दर पर इलाज मिलेगा।

एसकेएमसीएच से नए भवन तक की यात्रा

इस अस्पताल की नींव 27 दिसंबर 2019 को रखी गई थी। शुरुआत में, डॉ. रविकांत सिंह ने एसकेएमसीएच के परिसर में एक छोटे से कमरे से काम शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और वार्ड स्थापित किए गए। बाद में राज्य सरकार ने 45 एकड़ ज़मीन उपलब्ध कराई, जिस पर यह भव्य अस्पताल का निर्माण हुआ। अब यह अस्पताल बिहार के सबसे महत्वपूर्ण कैंसर उपचार केंद्रों में से एक बन चुका है।

अस्पताल की प्रमुख विशेषताएं

होमी भाभा कैंसर अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, जैसे कि रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक मशीनें। इसके अलावा, अस्पताल में कैंसर रिसर्च और ट्रेनिंग की सुविधाएं भी हैं। अब तक इस अस्पताल में 21,000 से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है, जिनमें बिहार, नागालैंड, नेपाल और भूटान से आए लोग भी शामिल हैं। इस संस्थान के संस्थापकों में एसकेएमसीएच के पूर्व प्राचार्य डॉ. विकास कुमार और अधीक्षक डॉ. बीएस झा का अहम योगदान रहा है।

स्थानीय मरीजों के लिए राहत

अब तक बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जैसे बड़े शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता था, लेकिन इस नए अस्पताल की शुरुआत से उन्हें इलाज के लिए अब लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी। यह अस्पताल कैंसर के इलाज में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकता है। मरीजों को अब इन महानगरों में यात्रा करने की बजाय यहां ही इलाज की उच्चतम सुविधाएं मिलेंगी।

रोज़गार के अवसरों का सृजन

इसके साथ ही इस अस्पताल का निर्माण रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। यहां रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी और अन्य चिकित्सा सेवा से संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर होंगे। अस्पताल की स्थापना के बाद डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए रोजगार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आधुनिक तकनीक और रिसर्च की सुविधा

यह अस्पताल कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। इसमें नैकीथेरेपी जैसी उन्नत चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा, अस्पताल में कैंसर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अंतर्गत पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) तक जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान की जा रही है, ताकि कैंसर का जल्द इलाज संभव हो सके।

महत्वपूर्ण योगदान

इस अस्पताल की स्थापना में कई प्रमुख व्यक्तियों का योगदान रहा है, जिनमें डॉ. विकास कुमार और डॉ. बीएस झा प्रमुख हैं। उनके मार्गदर्शन और मेहनत से इस अस्पताल का निर्माण संभव हुआ है, जो अब राज्य भर के कैंसर मरीजों के लिए एक आशा की किरण बन चुका है।

नवीनतम उपचार विधियां और चिकित्सा शिक्षा

होमी भाभा कैंसर अस्पताल में कैंसर उपचार के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यहां प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सों की टीम मरीजों को बेहतरीन इलाज प्रदान करेगी। इसके अलावा, अस्पताल का उद्देश्य कैंसर से संबंधित शोध और चिकित्सा पद्धतियों में नवीनीकरण करना है।

बिहार के लिए एक नया स्वास्थ्य केंद्र

यह अस्पताल न सिर्फ मुजफ्फरपुर, बल्कि पूरे बिहार के लिए कैंसर उपचार का एक प्रमुख केंद्र साबित हो रहा है। अब बिहार के लोग यहां ही कैंसर के इलाज की उच्चतम सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे, जिससे उन्हें अन्य शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।

इस अस्पताल का उद्घाटन बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा कदम है। यह अस्पताल न केवल कैंसर के मरीजों के लिए राहत की बात है, बल्कि इससे बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा। अत्याधुनिक उपचार विधियां, रिसर्च, और रोजगार के अवसरों के साथ यह अस्पताल प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाएगा। इस पहल से न केवल बिहार बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी कैंसर के इलाज की दिशा में बदलाव आएगा।

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