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शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना खत्म: पंजाब पुलिस का एक्शन और इसके पीछे की वजहें

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KKN गुरुग्राम डेस्क | पंजाब पुलिस ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर पिछले एक साल से चल रहे किसानों के धरने को समाप्त कर दिया है। यह धरना, जो एक साल से भी ज्यादा समय से चल रहा था, अचानक पंजाब पुलिस के एक्शन से खत्म हो गया। देर रात को पुलिस ने बुलडोजर का इस्तेमाल करके किसानों के टेंट और अस्थायी शरण स्थलों को हटा दिया। इस कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिरकार क्यों पंजाब सरकार ने यह कड़ी कार्रवाई की। क्या इसके पीछे राजनीतिक कारण हैं? या फिर अन्य कोई दबाव था? इस लेख में हम जानेंगे कि पंजाब पुलिस के इस एक्शन की असल वजह क्या थी।

किसानों का धरना: शंभू और खनौरी बॉर्डर पर एक साल से जारी था आंदोलन

शंभू और खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना दिल्ली सरकार द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ था। इस धरने के कारण पंजाब और हरियाणा के बीच व्यापार और ट्रकों की आवाजाही में काफी रुकावटें आई थीं। किसानों के इस विरोध प्रदर्शन ने राज्य में कई आर्थिक और सामाजिक दबाव पैदा किए थे। हालांकि, किसानों का कहना था कि उनका विरोध केंद्र सरकार के खिलाफ है, लेकिन पंजाब सरकार भी प्रभावित हो रही थी।

पंजाब सरकार द्वारा धरने को समाप्त करने के मुख्य कारण

1. अरविंद केजरीवाल का पंजाब दौरा और उद्योगपतियों का फीडबैक

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने अरविंद केजरीवाल के पंजाब दौरे के दौरान कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए। इस दौरे में लुधियाना के उद्योगपतियों से की गई मुलाकात से कुछ खास जानकारियां मिलीं। सूत्रों के मुताबिक, लुधियाना के उद्योगपतियों ने केजरीवाल से कहा कि अगर शंभू और खनौरी बॉर्डर पर धरना जारी रहा, तो आगामी उपचुनाव में पार्टी को वोट मिलना मुश्किल हो सकता है। इन उद्योगपतियों का कहना था कि इस धरने की वजह से व्यापार और ट्रकों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है।

2. लुधियाना उपचुनाव और राजनीतिक दबाव

लुधियाना उपचुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा था। पार्टी ने देखा कि इस धरने की वजह से स्थानीय उद्योग और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ रहा था, जिससे पार्टी को आगामी उपचुनाव में नुकसान हो सकता था। आम आदमी पार्टी इस उपचुनाव में अपनी जीत के लिए हर संभव प्रयास कर रही थी, ताकि यह चुनाव जीतकर पंजाब में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर सके।

इसके अलावा, कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लुधियाना उपचुनाव जीतकर आम आदमी पार्टी, खासकर अरविंद केजरीवाल, को राज्यसभा भेजने के रास्ते खोलने की कोशिश कर रही थी। यह राजनीतिक कारण भी पंजाब सरकार के इस कदम के पीछे एक वजह हो सकता है।

3. कानून व्यवस्था की समस्या से बचना

पंजाब पुलिस ने किसान नेताओं की बैठक के दौरान मौका देखा और फिर धरने को समाप्त करने का कदम उठाया। जब किसान नेता केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करने के बाद शंभू की ओर लौटे, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। इससे पंजाब सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती थी कि धरना शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो, ताकि किसी भी तरह की कानून व्यवस्था की समस्या न हो।

पुलिस ने यह कदम उठाने से पहले दोनों बॉर्डर पर पर्याप्त बल तैनात कर दिया था, लेकिन पुलिस किसी प्रकार के संघर्ष या झड़प से बचना चाहती थी। किसानों को हटाने के लिए बुलडोजर का इस्तेमाल किया गया, और इसे बिना किसी बड़े विरोध या हिंसा के अंजाम तक पहुंचाया गया।

4. पंजाब के उद्योगों पर हो रहे नुकसान का हवाला

पंजाब सरकार ने उद्योगों को हो रहे नुकसान का हवाला देते हुए यह कदम उठाया। राज्य के वित्त मंत्री हारपाल सिंह चीमा ने कहा कि किसानों का विरोध दिल्ली में केंद्र सरकार से है, पंजाब सरकार से नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसान दिल्ली में धरना देना चाहते हैं, तो वह वहां पर विरोध कर सकते हैं, लेकिन पंजाब में व्यापार और उद्योगों को भारी नुकसान नहीं होने देना चाहिए।

यहाँ यह भी देखा गया कि पंजाब में व्यापारिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही थीं और स्थानीय उद्योगपतियों ने इस बारे में बार-बार सरकार को सूचित किया था। जिससे सरकार को यह फैसला लेना पड़ा कि व्यापारिक गतिविधियों के बिना राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर डालना एक खतरनाक स्थिति बन सकता है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: कांग्रेस और बीजेपी की आलोचना

जैसे ही पंजाब सरकार ने किसानों को शंभू और खनौरी बॉर्डर से हटाया, कांग्रेस और बीजेपी ने इस कदम की आलोचना की। दोनों पार्टियों ने इसे किसानों के साथ धोखा और विश्वासघात बताया। उनका कहना था कि सरकार को किसानों के साथ बातचीत करके कोई हल निकालना चाहिए था, न कि उन्हें इस तरह बलपूर्वक हटाना चाहिए था।

कांग्रेस और बीजेपी का यह भी कहना था कि यह कदम केवल राजनीतिक लाभ के लिए लिया गया, खासकर लुधियाना उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए। उनकी आलोचना यह थी कि पंजाब सरकार ने किसानों के साथ विश्वासघात किया और उन्हें दबाव में लाकर हटाया।

किसानों के अगले कदम: क्या होगा अब?

अब जब शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटा लिया गया है, सवाल यह है कि उनका अगला कदम क्या होगा। क्या वे फिर से अन्य बॉर्डर या स्थानों पर धरना देंगे, या वे अब शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ेंगे? इस पर किसान संगठनों ने अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह संभावना जताई जा रही है कि वे दिल्ली में केंद्र सरकार से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी रख सकते हैं।

पंजाब सरकार का शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों को हटाने का फैसला एक रणनीति के तहत लिया गया है। हालांकि, यह कदम राजनीतिक और आर्थिक दबावों से प्रभावित था, लेकिन इसका उद्देश्य राज्य के व्यापारिक और औद्योगिक हितों की रक्षा करना था। इस कदम ने पंजाब की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है, और इसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में किसानों के आंदोलन को लेकर स्थिति और भी जटिल हो सकती है।

अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी इस फैसले से राजनीतिक लाभ हासिल कर पाती है या नहीं, और किसान नेताओं की अगली रणनीति क्या होगी। पंजाबी राजनीति में यह मामला और गहरे राजनीतिक प्रभावों को जन्म दे सकता है।

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