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बिहार चुनाव : आइए जानते है EVM मशीन कहां बनती है और इसकी सुरक्षा कैसे की जाती है?

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आज के समय में भी देश में किसी चुनाव से पहले EVM की चर्चा तेज हो जाती है | बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का पहला चरण 6 नवंबर (गुरुवार) को है, इस चरण में 121 सीटों पर मतदान होना है| दूसरे चरण का चुनाव 11 नवंबर को होगा| इसके तुरंत बाद 14 नवंबर को हीं परिणाम भी जारी कर दिए जाएंगे|

EVM मशीन कहां बनती है?

1. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड कंपनी द्वारा बेंगलुरू में EVM बनाई जाती है|

2. इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा हैदराबाद में EVM बनाई जाती है|

ये दोनों कंपनियां भारत सरकार के अंतर्गत इलेक्शन कमीशन के निगरानी में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) बनाती हैं| इसके अलावा EVM उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश में भी बनाई जाती है|

EVM मशीन का उपयोग सबसे पहले कब हुआ?

इस मशीन का प्रयोग सबसे पहले 1982 के चुनाव में हुआ था| तब इस मशीन में 8 प्रत्याशियों के नाम की ही सुविधा दी गई थी| बाद में 1989 में इसे 16 प्रत्याशियों के नाम से डिजाइन कर दिया गया|आजकल चुनाव होने से पहले ही राजनीतिक दलों में EVM के छेड़छाड़ को लेकर ज्यादातर विवाद देखने को मिल जाते हैं|

EVM की सुरक्षा वोटिंग के बाद कैसे होती है?

वोटिंग खत्म होने के बाद EVM को जल्द हीं सील कर दिया जाता है | इसे सील करते समय उम्मीदवारों के प्रतिनिधि और चुनाव अधिकारी दोनों मौजूद होते हैं| सभी मशीनों को सील और टैग लगाकर, साइन करके ट्रांसपैरेंट बॉक्स में डालकर स्ट्रॉन्ग रूम में भेज दिया जाता है| ई वी एम को स्ट्रॉंग रूम ले जाने वाले वाहन मे जीपीएस ट्रैकर लगे होते हैं, सफर के दौरान CCTV कैमरे की निगरानी के साथ पुलिस तथा केन्द्रीय बाल भी तैनात रहते हैं| मशीनों को लोड करने से पहले और अनलोडिंग के बाद भी वीडियो रिकॉर्ड किया जाता है| इसलिए इसमे छेड़-छाड़ की गुंजाइस भी न के बराबर ही रहती है|

EVM की सुरक्षा स्ट्रॉन्ग रूम में कैसे होती है?

स्ट्रॉन्ग रूम में EVM की सुरक्षा तीन श्रेणी में होती है : पहले श्रेणी में स्थानीय पुलिस बल द्वारा, दूसरे में केन्द्रीय अर्द्धसैनिक बल द्वारा तथा तीसरे में उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों द्वारा| स्ट्रॉन्ग रूम में केवल अधिकृत अधिकारियों को ही जाने की अनुमति दी जाती है|

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