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राष्ट्रपति मुर्मू से पहले प्रधानमंत्री, फिर गृह मंत्री की मुलाकात: क्या संसद में किसी बड़े फैसले की तैयारी?

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रविवार को राष्ट्रपति भवन में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज़ हो गईं, जब पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फिर कुछ ही घंटों बाद गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। यह दोनों मुलाकातें Monsoon Session 2025 के बीच ऐसे समय पर हुईं हैं जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है।

राष्ट्रपति भवन की ओर से इन बैठकों की जानकारी केवल सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए साझा की गई, जिनमें प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ राष्ट्रपति की अलग-अलग तस्वीरें भी शामिल थीं। हालांकि, दोनों बैठकों में किन विषयों पर चर्चा हुई, इस पर कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।

एक ही दिन में दो बड़ी मुलाकातें, सियासी मायने निकाले जा रहे

हालांकि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकातें संवैधानिक दायरे में सामान्य प्रक्रिया मानी जाती हैं, लेकिन एक ही दिन इन दोनों वरिष्ठ नेताओं की अचानक हुई बैठकें राजनीतिक हलकों में उत्सुकता का कारण बन गई हैं।

इस समय संसद का Monsoon Session जारी है और बिहार से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार को घेर रहा है। ऐसे में इन मुलाकातों को केवल औपचारिक भेंट के तौर पर देखना मुश्किल है।

बिहार में SIR को लेकर विपक्ष हमलावर

फिलहाल सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बिहार में चल रही Special Intensive Revision प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। चुनाव आयोग द्वारा की जा रही इस प्रक्रिया पर महागठबंधन के दलों ने आरोप लगाया है कि जानबूझकर विपक्षी वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन यह विवाद संसद के भीतर और बाहर काफी चर्चा में है। इस पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात को व्यापक राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।

क्या उपराष्ट्रपति चुनाव की तैयारी है वजह?

एक अन्य बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफ़े के रूप में सामने आया है। इसके बाद Vice President Election 2025 के लिए चुनाव आयोग ने तारीख़ों की घोषणा कर दी है।

ऐसे में इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मुलाकात का मकसद उपराष्ट्रपति पद के लिए संभावित नामों पर चर्चा रहा हो। राष्ट्रपति की मंजूरी इस प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा होती है, इसलिए यह बैठक राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।

फिर करीब आई 5 अगस्त की तारीख: मोदी सरकार के फैसलों में खास महत्व

पांच अगस्त की तारीख़ को लेकर राजनीतिक हलकों में हमेशा खास नजर रहती है। 5 अगस्त 2019 को ही जम्मू-कश्मीर से Article 370 हटाया गया था, और 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में Ram Mandir के भूमि पूजन का आयोजन हुआ था।

अब फिर एक बार 5 अगस्त आ रही है और संयोग से संसद सत्र भी चल रहा है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इस बार भी सरकार कोई बड़ा ऐलान करने की तैयारी में है या फिर कोई अहम विधेयक संसद में पेश किया जाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापार विवाद भी हो सकता है चर्चा का विषय

इन बैठकों के पीछे अंतरराष्ट्रीय संबंधों की भूमिका को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर कुछ उत्पादों पर 25% टैरिफ और जुर्माना लगाया है, जिससे दोनों देशों के बीच trade relations में तनाव बढ़ा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत के प्रति रुख काफी आक्रामक रहा है, जबकि उनके पहले कार्यकाल में द्विपक्षीय संबंध बेहतर माने जाते थे। ऐसे में यह संभव है कि इन अंतरराष्ट्रीय मसलों को लेकर भी राष्ट्रपति से उच्चस्तरीय बातचीत की गई हो।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं

अब तक इन बैठकों के संबंध में कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन संसद सत्र के बीच, जब विपक्ष पूरी तरह सक्रिय है, और कई संवेदनशील विषयों पर सरकार जवाब दे रही है, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की राष्ट्रपति से एक ही दिन में हुई मुलाकातें संकेत देती हैं कि कुछ महत्वपूर्ण विचार-विमर्श चल रहा है।

राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि इन मुलाकातों का सीधा संबंध संसद में पेश होने वाले किसी नए बिल, राष्ट्रपति के माध्यम से संभावित नियुक्तियों या संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़ा हो सकता है।

ऐसे समय में जब संसद का मानसून सत्र जारी है, उपराष्ट्रपति चुनाव नजदीक है, बिहार की राजनीति गर्म है और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी चुनौतियां हैं — तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात एक सामान्य औपचारिकता से कहीं ज़्यादा प्रतीत होती है।

हालांकि अभी किसी ठोस निर्णय की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन 5 अगस्त जैसे संवेदनशील दिन से पहले ये उच्चस्तरीय बातचीतें किसी संभावित बदलाव या घोषणा का संकेत मानी जा सकती हैं।

राजनीतिक दृष्टि से आने वाला सप्ताह अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा। संसद के भीतर होने वाली चर्चाएं, राष्ट्रपति भवन की तरफ से संभावित सूचनाएं और चुनाव आयोग के फैसले — ये सभी अब देशभर की निगाहों में हैं।

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