बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के परिणामों के बाद, विकाशशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी ने एनडीए की जीत पर सवाल उठाए हैं। मुकेश सहनी, जिन्हें महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) ने अपने उपमुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश किया था, ने इस चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया दी। उनका मानना है कि एनडीए की जीत मुफ्त उपहारों की राजनीति का परिणाम है।
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शुक्रवार से बातचीत करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि हालांकि वह जनादेश का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए की जीत मुफ्त उपहारों के वितरण के कारण संभव हो पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के आरोपों के बावजूद चुनाव आयोग ने वोट चोरी की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
एनडीए की जीत पर मुफ्त उपहारों का आरोप
मुकेश सहनी ने कहा, “पीएम मोदी की भाषा में कहूं तो एनडीए सरकार ‘रेवड़ी’ बांटकर सरकार बना रहा है।” सहनी ने खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये भेजने का उदाहरण दिया, जिसे उन्होंने वोटरों को लुभाने की रणनीति बताया। उनका कहना था कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में महिलाओं के लिए बहुत काम किया, लेकिन इस चुनाव में वह अपनी सरकार बचाने के लिए 10,000 रुपये बांटकर आगे बढ़े।
सहनी ने नीतीश कुमार की सराहना की, लेकिन साथ ही इस रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “यह उनका आखिरी चुनाव था और उन्होंने इस बार पैसे बांटकर अपनी सरकार बचाई। मैं उन्हें बधाई देता हूं, लेकिन हमें भी आत्ममंथन करना होगा।”
वोट चोरी का आरोप और चुनाव आयोग से नाराजगी
सहनी ने आगे कहा कि विपक्ष ने वोट चोरी के आरोप लगाए थे और राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में भी भाग लिया था, लेकिन चुनाव आयोग ने इन शिकायतों को अनसुना कर दिया। “हमने कई लोगों के नाम चुनावी सूची से हटाए जाने की शिकायत की थी, लेकिन हमारी मांग को ठुकरा दिया गया। यह जनता के अधिकारों का उल्लंघन था,” सहनी ने कहा।
उन्होंने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया और कहा कि विपक्ष ने जो कुछ भी किया, वह सही था, लेकिन चुनाव आयोग से कोई मदद नहीं मिली। उनका मानना है कि इस वजह से चुनाव परिणाम विपक्ष के पक्ष में नहीं आए।
महागठबंधन में VIP का स्थान और भविष्य की रणनीति
पूर्व में एनडीए का हिस्सा रही विकाशशील इंसान पार्टी (VIP) ने महागठबंधन में शामिल होने के लिए कई दौर की बातचीत की थी। महागठबंधन के घटक दलों ने सहनी की पार्टी को 12 सीटें दी थीं। इसके अलावा, सहनी ने चुनाव जीतने पर उपमुख्यमंत्री बनने की भी मांग की थी। महागठबंधन ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया था, क्योंकि वह Nishad (मल्लाह) समुदाय और अत्यधिक पिछड़े वर्गों (EBCs) के वोट पाने के लिए सहनी की सहायता चाहते थे।
हालांकि, चुनाव परिणामों ने यह साबित कर दिया कि VIP को अपेक्षित सीटें नहीं मिल पाईं। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सहनी का उपमुख्यमंत्री बनने का सपना भी टूट गया। यह स्थिति महागठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है, जो अपने गठबंधन के प्रमुख दलों को एक साथ लाने के लिए सहनी को उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव लेकर आया था।
VIP के खराब प्रदर्शन का विश्लेषण
चुनाव परिणामों के बाद, मुकेश सहनी ने कहा कि उनकी पार्टी और महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को यह समझने की जरूरत है कि चुनावी रणनीति में कहां गलती हुई। उन्होंने कहा, “हम आत्ममंथन करेंगे और विश्लेषण करेंगे कि कहां गलती हुई।” सहनी ने इस बात पर जोर दिया कि महागठबंधन के सहयोगी दलों के साथ इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाएगा और देखा जाएगा कि किसी तरह की कोई गलती तो नहीं हुई।
सहनी ने यह भी कहा कि विपक्ष ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन फिर भी पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। महागठबंधन ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकी थी, लेकिन फिर भी सही परिणाम नहीं मिल सका।
महागठबंधन का भविष्य और बिहार की राजनीतिक स्थिति
महागठबंधन के लिए यह परिणाम निश्चित रूप से एक चुनौती है। अब, महागठबंधन को यह समझने की जरूरत है कि बिहार के चुनावी परिदृश्य में उन्हें किस तरह की रणनीतियों को अपनाने की आवश्यकता है। यदि महागठबंधन को बिहार में किसी भी चुनाव में सफलता प्राप्त करनी है, तो उसे अपने गठबंधन को फिर से मजबूत करने और जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है।
मुकेश सहनी ने अंत में कहा कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ मिलकर जनता के मुद्दों को उठाएंगे। उनका कहना था कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ जनता की समस्याओं का समाधान ढूंढने में लगी रहेगी।
महागठबंधन के भीतर सामूहिक सोच की जरूरत
महागठबंधन को अब यह समझना होगा कि आगामी चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का मुकाबला करने के लिए उसे एकजुट होकर काम करना होगा। विपक्ष को अपनी रणनीतियों में सुधार करना होगा, ताकि वह बिहार की राजनीति में एनडीए के खिलाफ अपनी ताकत को फिर से स्थापित कर सके।
मुकेश सहनी ने इस चुनाव के परिणामों को आत्ममंथन का अवसर बताया, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महागठबंधन के पास अब वक्त है, और उसे आगे आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
2025 के बिहार विधानसभा चुनावों ने महागठबंधन को एक कठिन स्थिति में ला खड़ा किया है। मुकेश सहनी के नेतृत्व में VIP का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिससे विपक्ष के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एनडीए की मुफ्त उपहारों की राजनीति, वोट चोरी के आरोप और चुनाव आयोग से मिली अनदेखी ने इस चुनाव के परिणामों को प्रभावित किया। अब महागठबंधन को अपनी रणनीतियों में सुधार करना होगा और जनता के बीच एक मजबूत संदेश देना होगा, ताकि भविष्य में वह बिहार की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत कर सके।



