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कोल्ड ड्रिंक: ताजगी या धीमा ज़हर? क्या कहती है वैज्ञानिक रिसर्च?

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KKN ब्यूरो। गर्मी हो, पार्टी हो या सफर, कोल्ड ड्रिंक आज हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस पेय को हम प्यास बुझाने या ताजगी के लिए पीते हैं, वह हमारे शरीर के साथ क्या करता है? क्या कोल्ड ड्रिंक वास्तव में शरीर के लिए खतरनाक है? क्या इसे लेकर कोई वैज्ञानिक शोध हुआ है? क्या यह केवल मोटापा बढ़ाती है या इससे दिल, दिमाग, हड्डियां और किडनी भी प्रभावित होती हैं? इन सभी सवालों की पड़ताल दुनिया की प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाओं और वैज्ञानिक शोधों के आधार पर।

क्या कोल्ड ड्रिंक पर वैज्ञानिक रिसर्च हुई है?

हाँ…। पिछले दो दशकों में हजारों वैज्ञानिक अध्ययन किए गए हैं। इनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और अनेक मेडिकल जर्नल शामिल हैं। एक बड़े सिस्टेमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में पाया गया कि नियमित रूप से शक्करयुक्त पेय (Sugar-Sweetened Beverages) पीने वालों में टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और समय से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक पाया गया।

कोल्ड ड्रिंक में क्या-क्या होता है?

ब्रांड के अनुसार सामग्री बदल सकती है, लेकिन अधिकांश कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक में— कार्बोनेटेड पानी, चीनी या हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप, कारमेल कलर, फॉस्फोरिक एसिड, साइट्रिक एसिड, कैफीन (कई पेयों में), कृत्रिम फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और कुछ “डाइट” पेयों में एस्पार्टेम या अन्य कृत्रिम स्वीटनर मिला होता है। इनमें से अधिकांश पदार्थ नियामक संस्थाओं द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर उपयोग किए जाते हैं, लेकिन समस्या तब बढ़ती है जब इनका सेवन नियमित और अधिक मात्रा में होने लगता है।

शरीर पर क्या असर पड़ता है?

  1. मोटापा- कोल्ड ड्रिंक में कैलोरी बहुत अधिक होती है लेकिन पोषण लगभग नहीं के बराबर। तरल चीनी जल्दी अवशोषित होती है और पेट भी पूरी तरह नहीं भरती। परिणामस्वरूप व्यक्ति अधिक कैलोरी ले लेता है। WHO और NHS दोनों मानते हैं कि अधिक चीनी का सेवन वजन बढ़ने का बड़ा कारण है।
  2. टाइप-2 डायबिटीज- जब शरीर में लगातार अधिक चीनी जाती है तो इंसुलिन पर दबाव बढ़ता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकती है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का कारण बन सकती है। बड़ी आबादी पर आधारित शोधों में नियमित शक्करयुक्त पेय सेवन और मधुमेह के बढ़े जोखिम के बीच संबंध पाया गया है।
  3. हृदय रोग- अत्यधिक चीनी से— ट्राइग्लिसराइड बढ़ा सकती है। मोटापा बढ़ा सकती है। ब्लड प्रेशर पर प्रभाव डाल सकती है और सूजन (Inflammation) बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है। ये सभी कारक हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं।
  4. दांतों का नुकसान- कोल्ड ड्रिंक में— चीनी और एसिड दोनों होते हैं। चीनी बैक्टीरिया को भोजन देती है जबकि एसिड दांतों की ऊपरी परत (Enamel) को कमजोर करता है। इसलिए दांतों में सड़न और इनेमल क्षरण का खतरा बढ़ता है।
  5. हड्डियों पर प्रभाव- कई कोला पेयों में फॉस्फोरिक एसिड होता है। कुछ अध्ययनों में अत्यधिक कोला सेवन और हड्डियों के खनिज घनत्व (Bone Mineral Density) के बीच संबंध देखा गया है, हालांकि सभी अध्ययनों के निष्कर्ष एक जैसे नहीं हैं। यदि व्यक्ति पर्याप्त कैल्शियम और संतुलित आहार लेता है तो जोखिम कम हो सकता है। इसलिए इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
  6. फैटी लिवर- अधिक मात्रा में फ्रुक्टोज का सेवन यकृत में वसा जमा होने से जुड़ा पाया गया है। लंबे समय तक अधिक शक्करयुक्त पेय पीना नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के जोखिम को बढ़ा सकता है।
  7. किडनी पर असर- कुछ अध्ययनों में नियमित शक्करयुक्त सॉफ्ट ड्रिंक सेवन और किडनी रोग के जोखिम के बीच संबंध देखा गया है, हालांकि कारण-परिणाम का संबंध पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है। मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं।

क्या डाइट कोल्ड ड्रिंक सुरक्षित है?

डाइट ड्रिंक में चीनी की जगह कृत्रिम स्वीटनर होते हैं। WHO ने 2023 में सलाह दी कि केवल वजन कम करने के उद्देश्य से कृत्रिम स्वीटनर का नियमित उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि दीर्घकालिक लाभ स्पष्ट नहीं हैं और कुछ अध्ययनों में टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग तथा मृत्यु के बढ़े जोखिम से संबंध देखा गया है। यह संबंध कारण सिद्ध नहीं करता, लेकिन सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

क्या एस्पार्टेम कैंसर पैदा करता है?

2023 में IARC ने एस्पार्टेम को “संभवतः कैंसरकारी” (Group 2B) श्रेणी में रखा है। लेकिन साथ ही WHO/FAO की JECFA समिति ने कहा कि सामान्य सीमा (Acceptable Daily Intake) के भीतर इसका सेवन सुरक्षित माना जाता है और उपलब्ध साक्ष्य कैंसर के जोखिम को निर्णायक रूप से सिद्ध नहीं करते। इसलिए इस विषय पर संतुलित दृष्टिकोण आवश्यक है।

क्या कभी-कभार पीना भी खतरनाक है?

वर्तमान वैज्ञानिक साक्ष्य यह नहीं कहते कि कभी-कभार एक गिलास कोल्ड ड्रिंक पीना अपने-आप में गंभीर नुकसान पहुंचाता है। मुख्य चिंता रोजाना या बार-बार अधिक मात्रा में सेवन को लेकर है। कुल आहार, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली भी स्वास्थ्य जोखिम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

मधुमेह के मरीज को, मोटापे से ग्रस्त लोगो को, बच्चे और किशोर को, हृदय रोगी को, किडनी रोगी को और दांतों की समस्या वाले लोग को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। आप इसके विकल्प के रूप में सादा पानी, नींबू पानी (कम चीनी), नारियल पानी, छाछ, बिना चीनी की लस्सी, ताजा फल, बिना चीनी का नींबू-सोडा और घर का बना शरबत (सीमित चीनी के साथ) सेवन कर सकतें हैं।

क्या सरकार भी चिंतित हैं?

दुनिया के कई देशों ने शक्करयुक्त पेयों की खपत कम करने के लिए Sugar Tax, चेतावनी लेबल और जनजागरूकता अभियान शुरू किए हैं। WHO भी मुक्त शर्करा (Free Sugars) का सेवन कम करने की सिफारिश करता है ताकि मोटापा, मधुमेह और दांतों की बीमारियों का जोखिम घटाया जा सके। हालांकि, कोल्ड ड्रिंक को “ज़हर” कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा, लेकिन इसे पूरी तरह सुरक्षित पेय भी नहीं कहा जा सकता। उपलब्ध शोध यह संकेत देते हैं कि नियमित और अधिक मात्रा में शक्करयुक्त कोल्ड ड्रिंक का सेवन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, दांतों की सड़न और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़े जोखिम से जुड़ा है। वहीं डाइट ड्रिंक के बारे में भी दीर्घकालिक लाभ स्पष्ट नहीं हैं और उन पर भी वैज्ञानिक निगरानी जारी है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की आम सलाह यही है कि कोल्ड ड्रिंक को दैनिक आदत नहीं, बल्कि कभी-कभार लिया जाने वाला पेय माना जाए और प्यास बुझाने के लिए पानी तथा अन्य पौष्टिक पेयों को प्राथमिकता दी जाए।

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