भारत ने कृषि क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी है कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश बन गया है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने यह घोषणा हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। यह उपलब्धि भारतीय कृषि की बढ़ती ताकत और किसानों के परिश्रम को दर्शाती है।
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15.18 करोड़ टन चावल उत्पादन के साथ नया रिकॉर्ड
केंद्रीय मंत्री के अनुसार भारत ने 15.18 करोड़ टन चावल का उत्पादन किया है। यह आंकड़ा चीन के 14.5 करोड़ टन उत्पादन से अधिक है। उन्होंने बताया कि यह अंतर दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक कृषि परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह उपलब्धि देश के लिए गर्व का विषय है और लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
भोजन की कमी वाले देश से वैश्विक खाद्य प्रदाता तक का सफर
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत का सफर असाधारण रहा है। उन्होंने बताया कि एक समय भारत भोजन की कमी से जूझने वाला देश था। आज वही भारत वैश्विक खाद्य प्रदाता के रूप में उभर चुका है। उन्होंने इसे अभूतपूर्व परिवर्तन बताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया के कई देशों को चावल की आपूर्ति कर रहा है।
किसानों और वैज्ञानिकों की भूमिका अहम
कृषि मंत्री ने इस सफलता का श्रेय किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर कृषि नीतियों, अनुसंधान और तकनीक के उपयोग से उत्पादन में निरंतर वृद्धि हुई है। उन्नत बीज, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और आधुनिक खेती के तरीकों ने चावल उत्पादन को नई ऊंचाई तक पहुंचाया है।
25 फसलों की 184 नई किस्में जारी
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने 25 फसलों की 184 नई किस्में भी जारी कीं। उन्होंने कहा कि ये नई किस्में अधिक उपज देने वाली हैं और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेंगी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन बीजों को जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे आगामी फसलों में इनका लाभ उठा सकें।
उच्च उपज वाले बीजों पर सरकार का फोकस
चौहान ने कहा कि देश ने उच्च उपज देने वाले बीजों के विकास में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि 1969 में राजपत्र अधिसूचना प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक 7,205 फसल किस्मों को अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, दालें, तिलहन और फाइबर फसलें शामिल हैं।
नरेन्द्र मोदी सरकार में तेजी से हुए अनुमोदन
कृषि मंत्री ने बताया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने कृषि नवाचार को प्राथमिकता दी है। उनके अनुसार 3,236 उच्च उपज देने वाली फसल किस्मों को वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मंजूरी दी गई है। इसके मुकाबले 1969 से 2014 के बीच 3,969 किस्में अधिसूचित की गई थीं। इससे साफ है कि हाल के वर्षों में प्रक्रिया को और तेज किया गया है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम
नई फसल किस्मों का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है। मंत्री ने कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। बेहतर बीज से उत्पादन लागत कम होती है और उपज अधिक मिलती है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है।
वैश्विक खाद्य बाजार में भारत की मजबूत उपस्थिति
भारत के सबसे बड़े चावल उत्पादक बनने से वैश्विक खाद्य बाजार में उसकी भूमिका और मजबूत हुई है। भारत अब कई देशों के लिए भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बन चुका है। यह स्थिति वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कृषि नीति और तकनीक का असर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की कृषि नीतियों और तकनीकी सहयोग का असर अब साफ दिखने लगा है। अनुसंधान संस्थानों को मजबूत किया गया है और किसानों को नई तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी किसानों को जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
टिकाऊ कृषि पर जोर
चौहान ने भविष्य की योजनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है। नई फसल किस्मों को इस तरह विकसित किया गया है कि वे कम पानी में बेहतर उत्पादन दे सकें। इससे टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम होगा।
भारत का दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बनना कृषि क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि है। चीन को पीछे छोड़ना यह दर्शाता है कि भारतीय कृषि अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन चुकी है। किसानों की मेहनत, वैज्ञानिकों का योगदान और सरकार की नीतियों ने इस सफलता को संभव बनाया है। आने वाले वर्षों में भारत की भूमिका वैश्विक खाद्य आपूर्ति में और मजबूत होने की उम्मीद है।
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