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पटना के पीएमसीएच अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान 3 साल की बच्ची की मौत

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बिहार की राजधानी पटना के पीएमसीएच (पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल) में एक दुखद घटना घटी, जिसमें एक 3 साल की बच्ची की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई। इस मामले की जांच के लिए अस्पताल प्रशासन ने एक चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। मृतक बच्ची के परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान एनेस्थिसिया की ज्यादा डोज दी गई, जिससे बच्ची की मौत हो गई।

जांच के लिए टीम का गठन

बच्ची की मौत की घटना के बाद, पीएमसीएच अस्पताल प्रशासन ने एक जांच टीम बनाई है, जो इस घटना की जांच करेगी। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आईएस ठाकुर ने सोमवार को बताया कि यह जांच टीम दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी, जिसे संबंधित विभाग को सौंपा जाएगा। जांच टीम में हड्डी रोग, शिशु रोग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल किए गए हैं।

परिजनों का आरोप: एनेस्थिसिया की अधिक डोज से हुई मौत

मृतक बच्ची के परिजनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि 2 दिसंबर को पीएमसीएच के हड्डी रोग विभाग में ऑपरेशन के दौरान बच्ची को एनेस्थिसिया की अधिक डोज दी गई थी। परिजनों का कहना है कि बच्ची इस डोज को सहन नहीं कर पाई और ऑपरेशन के बाद वह होश में नहीं आई। इसके बाद बच्ची को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था, लेकिन 6 दिसंबर को उसकी मौत हो गई।

घटना का विवरण और बच्ची की पृष्ठभूमि

यह बच्ची, अवंतिका राय, गोपालगंज जिले की रहने वाली थी। दो सप्ताह पहले खेलते समय अवंतिका गिर गई थी और उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर हो गए थे। बेहतर इलाज के लिए परिजन उसे पटना ले आए और पीएमसीएच के हड्डी रोग विभाग में भर्ती करवा दिया। डॉक्टर महेश प्रसाद की यूनिट में बच्ची का ऑपरेशन तय किया गया था, जो 2 दिसंबर को हुआ।

ऑपरेशन के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ी

ऑपरेशन के दौरान बच्ची को एनेस्थिसिया दिया गया था ताकि वह सर्जरी के दौरान बेहोश रहे। हालांकि, ऑपरेशन के बाद बच्ची होश में नहीं आई। डॉक्टरों ने देखा कि उसकी दिल की धड़कन रुक गई थी और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इसके बावजूद, 6 दिसंबर को बच्ची की मौत हो गई।

परिजनों का आरोप: डॉक्टरों की लापरवाही

बच्ची के परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने बच्ची को एनेस्थिसिया की डबल डोज दे दी थी, जिसे बच्ची का शरीर सहन नहीं कर सका। इसके कारण उसकी तबीयत बिगड़ी और उसकी जान चली गई। इस आरोप के बाद, अस्पताल प्रशासन ने जांच का आदेश दिया है, ताकि मौत के कारणों का सही पता चल सके।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

अस्पताल प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और जांच टीम गठित की है। डॉ. आईएस ठाकुर ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्ची की मौत का असली कारण क्या था। अस्पताल प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी अगर लापरवाही पाई जाती है।

समाज में प्रतिक्रियाएँ और चिकित्सा सेवाओं पर सवाल

इस घटना ने सोशल मीडिया और स्थानीय समुदाय में भारी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। लोग दुखी हैं और मृतक बच्ची के परिवार के साथ संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। वहीं, इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का कहना है कि अस्पतालों में संसाधनों की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही से ऐसी घटनाएं घटित होती हैं।

चिकित्सा पेशेवरों का कहना है कि बच्चों की सर्जरी के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है, खासकर एनेस्थिसिया की डोज के मामले में। उन्होंने इस घटना के बाद अस्पतालों में बेहतर निगरानी और प्रक्रिया का पालन करने की आवश्यकता की बात की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।

अगले कदम और जांच रिपोर्ट का इंतजार

जांच टीम मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि मौत के कारणों में किसी प्रकार की चिकित्सा लापरवाही थी या नहीं। अगर जांच में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों का दुख अब भी गहरा है, और वे न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। इस घटना ने चिकित्सा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को और अधिक उजागर किया है। इलाज के दौरान सुरक्षा और प्रोटोकॉल का पालन करना बेहद जरूरी है, खासकर बच्चों के मामले में। जांच रिपोर्ट के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि बच्ची की मौत के पीछे की असली वजह क्या थी।

 अवंतिका राय की मौत ने चिकित्सा क्षेत्र में सुधार की जरूरत को एक बार फिर से उजागर किया है। अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, खासकर बच्चों की सर्जरी के दौरान, सर्वोपरि होनी चाहिए। इस घटना के बाद, उम्मीद की जाती है कि अस्पतालों में बेहतर प्रक्रियाएं लागू होंगी और चिकित्सा कर्मचारियों को और अधिक जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस मामले की जांच से यह तय होगा कि क्या लापरवाही हुई थी और क्या कार्रवाई की जानी चाहिए।

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