KKN ब्यूरो। संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” का अहसास कराते हुए ईरान पर बमबारी और मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं — जिसका सीधा मक़सद ईरानी नेतृत्व को हटाना और उसकी सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है।
लेकिन इसका असर कहीं ज़्यादा गहरा और अराजक है
ईरान ने तेज़ी से मिसाइलों और ड्रोन से पलटवार किया है — न केवल इज़रायल पर बल्कि खाड़ी में अमेरिका के प्रमुख सैन्य ठिकानों को चुनिंदा निशाने पर लिया गया है।
मध्य पूर्व के कई देशों — जैसे यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी — ने हवाई क्षेत्रों को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे यात्राएँ, वाणिज्य और दुनिया की तेल आपूर्ति पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
ये संघर्ष तुरंत अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमती आपूर्ति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को धमकी दे रहे हैं, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ़ होरमज़ जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर जोखिम चरम पर है।
ख़ामोशी के दरवाज़े पर छुपा सच — वह जो खबरों में कम दिखा
- बातचीत नहीं, युद्ध की भाषा
हालांकि कूटनीतिक वार्ताएँ जिनेवा और वियना में निरंतर चल रही थीं, अचानक से उस प्रक्रिया पर धावा बोला गया — यह दिखाता है कि शांतिपूर्ण समाधान अभी भी कमजोर है, और समझौते के बुनियादी दावे धूमिल हो रहे हैं।
- तटस्थता खत्म — क्षेत्रीय समीकरण बदल रहे
परंपरागत मध्य पूर्वी शक्तियाँ जैसे सऊदी अरब और ओमान अब सक्रिय रूप से कूटनीति और सैन्य संतुलन में अपनी भूमिका पुनः परिभाषित कर रहे हैं — यह बदलाव आने वाले महीनों में क्षेत्रीय राजनीति को उलट सकता है।
- आम नागरिक युद्ध की चपेट में
तेहरान में स्कूलों और नागरिक बस्तियों पर भी हमले हुए बताए जा रहे हैं, जिससे नागरिक हताहतों की संख्या बढ़ रही है — एक ऐसा पहलू जो अक्सर औपचारिक रिपोर्टों में हल्के में लिया जाता है।
- वैश्विक प्रभाव far-reaching
यह संघर्ष सिर्फ सीमांत लड़ाई नहीं है — इसके दुष्प्रभाव विश्व भर के आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं; कई देशों ने दूतावासों को खाली कर दिया है और भारत समेत अन्य सरकारों ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
असली पर्दा: क्या हो रहा है?
यह संघर्ष अब स्थानीय विवाद से एक व्यापक युद्ध की तरफ़ बढ़ रहा है — जहाँ मिसाइलें, सैन्य ठिकानों पर हमले और व्यापक आतंकवाद विरोधी संचालन पूरी मध्य पूर्व को तनावपूर्ण बना रहे हैं।
अमेरिका और इजरायल के रणनीतिक उद्देश्य न सिर्फ़ ईरान की सैन्य क्षमता को कम करना है, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक परिवर्तन की नींव भी रखना है — जिसका असर आने वाले वर्षों में देखा जाएगा।
इसी बीच ईरान का जवाब सिर्फ़ सैन्य नहीं है — वह राजनीतिक और सांस्कृतिक भी है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्यापक समर्थन और विरोध दोनों तक फैल रहा है।
