Home West Bengal भारत–बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, लेकिन क्यों बढ़ रहा है तनाव?

भारत–बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, लेकिन क्यों बढ़ रहा है तनाव?

KKN ब्यूरो। भारत ने बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में अब निर्णायक कदम बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने सीमा पर फेंसिंग और “स्मार्ट बॉर्डर” प्रोजेक्ट को युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। लेकिन इस बीच सीमा के कई इलाकों में बांग्लादेश की ओर से आपत्ति और बाधाएं भी सामने आने लगी हैं। सवाल यह है कि आखिर भारत इतनी तेजी से बॉर्डर फेंसिंग क्यों कर रहा है? और बांग्लादेश को इससे दिक्कत क्या है?

अमित शाह का स्मार्ट बॉर्डर मिशन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में साफ कहा कि भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा को अब केवल कंटीले तारों से नहीं, बल्कि हाईटेक तकनीक से भी सुरक्षित किया जाएगा। इस “स्मार्ट बॉर्डर” योजना के तहत कैमरे, सेंसर, रडार, लेजर सिस्टम और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीक लगाई जा रही है। सरकार का दावा है कि इसका मुख्य उद्देश्य है:

  • अवैध घुसपैठ रोकना
  • पशु तस्करी पर लगाम लगाना
  • ड्रग्स और हथियारों की तस्करी रोकना
  • सीमा क्षेत्रों में “डेमोग्राफिक बदलाव” को नियंत्रित करना

सूत्रों के मुताबिक पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा में फेंसिंग कार्य को सबसे अधिक गति दी गई है। पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल में बीएसएफ को 142 एकड़ से अधिक जमीन सौंप दी है ताकि बॉर्डर आउटपोस्ट और फेंसिंग का निर्माण तेज किया जा सके।

4096 किलोमीटर लंबी चुनौती

भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह दुनिया की सबसे जटिल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में गिनी जाती है। बड़ी समस्या यह है कि इस सीमा का बड़ा हिस्सा नदी, दलदली इलाकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है। रिपोर्टों के अनुसार अब तक लगभग आधी सीमा पर फेंसिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन कई संवेदनशील हिस्से अभी भी खुले हैं। इन्हीं इलाकों को “वulnerable corridors” माना जाता है जहां से अवैध घुसपैठ और तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं।

बांग्लादेश क्यों कर रहा है विरोध?

सीमा फेंसिंग को लेकर बांग्लादेश लंबे समय से आपत्ति जताता रहा है। बांग्लादेश का तर्क है कि 1975 के भारत-बांग्लादेश सीमा समझौते के अनुसार “जीरो लाइन” से 150 गज के भीतर किसी प्रकार की रक्षा संरचना नहीं बनाई जा सकती। हालांकि भारत का कहना है कि यह “डिफेंस स्ट्रक्चर” नहीं बल्कि सुरक्षा अवरोध है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में फेंसिंग सर्वे के दौरान Border Guard Bangladesh (BGB) की ओर से हस्तक्षेप की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि बीएसएफ अधिकारियों के सर्वे कार्य के दौरान बांग्लादेशी सुरक्षा बलों ने आपत्ति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश को डर है कि अगर पूरी सीमा हाईटेक फेंसिंग से सील हो गई तो सीमा पार आने-जाने की अनौपचारिक गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी। इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और सीमा से जुड़े सामाजिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

क्या केवल सुरक्षा ही मुद्दा है?

सीमा फेंसिंग का मामला अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। यह राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है। भारत में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और जनसंख्या संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं बांग्लादेश इसे मानवीय और सीमा समझौते के नजरिए से देख रहा है। इसी कारण दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सीमा तनाव के बावजूद भारत कूटनीतिक स्तर पर नरमी का संकेत भी दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में बांग्लादेशी नेतृत्व को बकरीद की शुभकामनाएं भेजकर सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है।

क्या पूरा हो पाएगा मिशन?

गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा फेंसिंग को तेज गति से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह काम उतना आसान नहीं है जितना राजनीतिक मंचों से दिखाई देता है। भूमि अधिग्रहण, कानूनी विवाद, नदी क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौती और स्थानीय विरोध बड़ी बाधाएं हैं। पूर्व बीएसएफ अधिकारियों का मानना है कि “सीमा को पूरी तरह सील करना लगभग असंभव है, लेकिन उसे इतना सुरक्षित जरूर बनाया जा सकता है कि घुसपैठ और तस्करी को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सके।”

आने वाले समय में क्या होगा?

भारत अब केवल पारंपरिक बॉर्डर सुरक्षा पर निर्भर नहीं रहना चाहता। “स्मार्ट बॉर्डर” मॉडल इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में भारत अपनी सीमाओं को तकनीक आधारित सुरक्षा ढांचे में बदलने जा रहा है। लेकिन दूसरी ओर, यदि सीमा फेंसिंग को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच संवाद मजबूत नहीं हुआ, तो यह मुद्दा भविष्य में बड़ा कूटनीतिक विवाद भी बन सकता है। फिलहाल इतना तय है कि भारत सीमा सुरक्षा को लेकर अब किसी प्रकार का जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रहा। और इसी कारण सीमा पर फेंसिंग का काम अब सिर्फ निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Previous articleझारखंड के तीन अद्भुत पार्क Rock Garden, Jubilee Park & Zoological Park की रहस्यमयी कहानी
कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version