Home Anjuman आख़िरी मुगल बादशाह की वह चीख जो आज भी गूंजती है

आख़िरी मुगल बादशाह की वह चीख जो आज भी गूंजती है

क्या बहादुर शाह ज़फ़र सिर्फ एक बूढ़े शायर थे… या 1857 की क्रांति का वह प्रतीक, जिससे अंग्रेज भी कांप उठे थे? क्यों एक सम्राट को अपने ही वतन में दो गज़ ज़मीन नसीब नहीं हुई? इस एपिसोड में जानिए अंतिम मुगल बादशाह की वह कहानी, जो पराजय में भी अमर हो गई।

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कौशलेन्द्र झा, KKN Live की संपादकीय टीम का नेतृत्व करते हैं और हिन्दुस्तान (हिन्दी दैनिक) में नियमित रूप से लेखन करते हैं। बिहार विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। वे प्रातःकमल और ईटीवी बिहार-झारखंड सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों से जुड़े रहे हैं। सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है—वे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संघ (भारत) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और “मानवाधिकार मीडिया रत्न” सम्मान से सम्मानित किए गए हैं। पत्रकारिता में उनकी गहरी समझ और सामाजिक अनुभव उनकी विश्लेषणात्मक लेखन शैली को विशिष्ट बनाते हैं

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