यह एक खामोश हकीकत है। अगर एक फिल्म… सिर्फ एक घटना को दिखा रही हो… तो सिस्टम को… उसे रोकने की जरूरत क्यों पड़ी…। यह बड़ा सवाल है। सवाल यह भी… कि क्या कोई सच… इतना खतरनाक हो सकता है… कि उसे पर्दे तक पहुँचने से पहले ही… रोक दिया जाए…।
यह एक खामोश हकीकत है। अगर एक फिल्म… सिर्फ एक घटना को दिखा रही हो… तो सिस्टम को… उसे रोकने की जरूरत क्यों पड़ी…। यह बड़ा सवाल है। सवाल यह भी… कि क्या कोई सच… इतना खतरनाक हो सकता है… कि उसे पर्दे तक पहुँचने से पहले ही… रोक दिया जाए…।