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बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा जब तक ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, वह राज्य में कथा करने के लिए नहीं जाएंगे।

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बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल में अपनी कथा के लिए अनुमति नहीं मिलने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं, वह राज्य में कथा करने के लिए नहीं जाएंगे। पंडित शास्त्री ने कहा कि अगर राज्य में “दादा” की सरकार आएगी तो वह वहां जरूर कथा करने जाएंगे, लेकिन फिलहाल वह ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य में कोई कार्यक्रम नहीं करेंगे।

ममता बनर्जी पर आरोप

धीरेंद्र शास्त्री ने यह बयान छत्तीसगढ़ के रायपुर में अपने एक कार्यक्रम के दौरान दिया। उन्होंने कहा, “जब हमें पश्चिम बंगाल में कथा करने जाना था तो ममता दीदी ने हमारी अनुमति रद्द कर दी। दीदी के रहते हुए हम वहां नहीं जाएंगे। अगर दादा (किसी अन्य नेता) सत्ता में आते हैं, तब हम जरूर जाएंगे। लेकिन हम भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि दीदी बनी रहें, हमें उनसे कोई परेशानी नहीं है, बस वह धर्म के खिलाफ न जाएं और बुद्धि सही रखें।”

कोलकाता में होने वाली थी कथा

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा 10 से 12 अक्टूबर तक कोलकाता में आयोजित होने वाली थी। हालांकि, भारी बारिश और जलभराव के कारण पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी कथा करने की अनुमति रद्द कर दी। इस फैसले से शास्त्री जी को गहरा दुख हुआ है। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए दुखद है कि वे वहां कथा नहीं कर पा रहे, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके और राज्य सरकार के बीच कोई व्यक्तिगत विवाद नहीं है।

हिंदू राष्ट्र की बात

धीरेंद्र शास्त्री अपनी कथाओं में अक्सर हिंदू राष्ट्र के विचारों पर जोर देते हैं। उनका कहना है कि हिंदू समाज को एकजुट करना और हिंदुत्व की स्थापना करना उनकी मुख्य प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष राजनीतिक दल के समर्थक नहीं हैं, लेकिन वह हमेशा हिंदू धर्म और हिंदुत्व के पक्ष में खड़े रहेंगे। पिछले महीने, उन्होंने आगरा में कहा था कि सनातन धर्म का कोई आदि और अंत नहीं है और यह धर्म हजारों साल पुराना है।

शास्त्री ने यह भी कहा कि किसी भी धर्म के अनुयायी अगर अपने पूर्वजों को खंगालें, तो उनकी जड़ें सनातन धर्म से जुड़ी हुई मिलेंगी। उन्होंने मुस्लिम समुदाय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि असली मुसलमान दूसरे देशों में हैं, भारत में जो लोग मुसलमान कहलाते हैं, वे सभी कन्वर्टेड हैं।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की धार्मिक विचारधारा

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हमेशा धार्मिक एकता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया है। वह अपने कार्यों और बयानों के माध्यम से हिंदू समाज को एकजुट करने की कोशिश करते हैं। उनका कहना है कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व को न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सामाजिक रूप से भी मजबूत करने की आवश्यकता है। उनका मानना है कि अगर हिंदू समाज एकजुट होता है, तो कोई भी बाहरी ताकत इसे प्रभावित नहीं कर सकती।

ममता बनर्जी के खिलाफ उनका आरोप

पंडित शास्त्री ने ममता बनर्जी के खिलाफ अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में कहा कि वह धर्म के प्रति अपने दृष्टिकोण को सही रखें और देश की धार्मिक पहचान के साथ कोई समझौता न करें। उन्होंने यह भी कहा कि वह ममता से व्यक्तिगत रूप से कोई विरोध नहीं करते, लेकिन उनका उद्देश्य केवल यह है कि वह धार्मिक मामलों में अपनी स्थिति सही रखें और हिंदू समाज को कोई नुकसान न पहुंचाए।

उनके बयान से यह साफ है कि शास्त्री जी का ध्यान सिर्फ धर्म और हिंदू हितों की रक्षा पर केंद्रित है, और वह किसी राजनीतिक विवाद में नहीं पड़ना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी एक पार्टी के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि वह भारतीय संस्कृति और धर्म के लिए काम कर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में कथा के न होने का असर

पंडित शास्त्री की कथा रद्द होने से उनकी बहुत बड़ी संख्या में अनुयायी और भक्त काफी निराश हुए हैं। हालांकि, उन्होंने अपने समर्थकों से आग्रह किया कि वे इस फैसले से परेशान न हों और अपनी धार्मिक आस्थाओं को बनाए रखें। शास्त्री जी का कहना है कि यह सिर्फ एक अस्थायी संकट है और भविष्य में वह अपने अनुयायियों के बीच अपनी कथाएं जरूर करेंगे, जब परिस्थितियां अनुकूल होंगी।

धार्मिक नेता का राजनीति में दखल

धीरेंद्र शास्त्री के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि उनका राजनीति में कोई दखल नहीं है, लेकिन वह धार्मिक मुद्दों पर अपने विचार रखने से पीछे नहीं हटते। उनका मानना है कि धर्म और राजनीति को अलग रखना जरूरी है, लेकिन जब धर्म की बात आती है, तो वह हमेशा हिंदू समाज के पक्ष में खड़े रहेंगे।

उनका कहना है कि वह किसी पार्टी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वह उस सरकार का विरोध करते हैं जो हिंदू धर्म के खिलाफ काम करती है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि वह केवल हिंदू समाज के उत्थान के लिए काम करते हैं और उनका उद्देश्य केवल भारत में हिंदुत्व की रक्षा करना है।

भविष्य में क्या होगा?

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के लिए यह एक बड़ा झटका था कि उनकी कथा को रद्द कर दिया गया। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका उद्देश्य केवल धार्मिक जागरूकता फैलाना है। भविष्य में जब उन्हें मौका मिलेगा, तो वह अपनी कथा फिर से आयोजित करेंगे। वह अपने अनुयायियों से यह अपील करते हैं कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने विश्वासों को न छोड़ें और धर्म के प्रति अपनी आस्था को बनाए रखें।

पंडित शास्त्री का यह विचार कि ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री रहते वह पश्चिम बंगाल में कथा नहीं करेंगे, निश्चित रूप से राज्य की राजनीति और धर्म के बीच एक विवाद को जन्म देता है। लेकिन शास्त्री जी का यह साफ संदेश है कि वह धर्म और हिंदू समाज के हितों को सर्वोपरि मानते हैं।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का पश्चिम बंगाल में कथा आयोजित करने से मना करना और ममता बनर्जी के खिलाफ उनका बयान, राज्य की राजनीति और धर्म के मुद्दे पर गहरे सवाल खड़े करता है। हालांकि शास्त्री जी ने यह साफ किया कि उनका उद्देश्य राजनीतिक विवादों में न फंसना है, लेकिन वह धार्मिक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उनका यह बयान यह दर्शाता है कि वह हिंदू समाज और धर्म के लिए अपनी जिम्मेदारियों को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

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