बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति में अपराध और भ्रष्टाचार सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभर रहे हैं। हाल ही में आए इंडिया टूडे-सी वोटर सर्वे के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, 60% मतदाता कानून-व्यवस्था को सबसे अहम चुनावी मुद्दा मान रहे हैं, जबकि 55% लोग भ्रष्टाचार से बेहद नाराज़ हैं।
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बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था
बिहार में बीते कुछ महीनों में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। आए दिन हो रही हत्याएं, लूट, डकैती और पुलिस पर हमले इस बात को साबित कर रहे हैं कि अपराधियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।
- बेतिया और पटना में करोड़ों की बरामदगी से भ्रष्टाचार पर बहस तेज हो गई है।
- पुलिस अधिकारियों पर हो रहे हमले कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
- आपराधिक घटनाओं की बढ़ती संख्या आम जनता की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
तेजस्वी यादव और विपक्ष का हमला
राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “सत्ता संरक्षित अपराध” करार देते हुए कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उनका दावा है कि जनता इस बार बदलाव के मूड में है और सरकार को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
प्रशांत किशोर की नई रणनीति
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी बिहार में अपनी नई रणनीति के साथ सक्रिय हो गए हैं। उनका मानना है कि जनता अब सिर्फ वादों पर भरोसा नहीं करेगी, बल्कि सरकार से ठोस परिणामों की उम्मीद कर रही है।
क्या सत्ता परिवर्तन संभव है?
बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन (NDA) की सरकार है, लेकिन अपराध और भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाकर चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश में जुटा है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या बिहार की जनता इस बार सत्ता परिवर्तन का मन बना चुकी है, या फिर NDA सरकार इसे संभालने में कामयाब होगी? यह तो आने वाले महीनों में साफ हो जाएगा।
जनता की राय महत्वपूर्ण
इस बार बिहार का चुनाव कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर लड़ा जाएगा। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या जनता सरकार पर दोबारा भरोसा जताएगी या बदलाव की ओर कदम बढ़ाएगी?
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