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पहलगाम आतंकी हमले के बाद उत्तर प्रदेश से पाकिस्तानी नागरिकों को किया गया डिपोर्ट

KKN गुरुग्राम डेस्क | जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले ने देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को और भी चाक-चौबंद कर दिया है।
26 निर्दोष हिंदुओं की हत्या के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल कई अहम फैसले लिए, जिनमें एक बड़ा फैसला देश में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की जांच और आवश्यकतानुसार डिपोर्टेशन का रहा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिशा में तेज़ी से कदम उठाते हुए शॉर्ट टर्म वीजा पर रह रहे लगभग सभी पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट कर दिया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केंद्र सरकार के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

पहलगाम आतंकी हमले के बाद गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि वे अपने-अपने राज्यों में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की तत्काल जांच करें।
खासकर शॉर्ट टर्म वीजा (अल्पकालिक वीजा) पर रह रहे लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सुरक्षा के लिहाज से ज़रूरी कार्रवाई करें।

इसी आदेश के तहत उत्तर प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया गया, जिसमें अधिकांश पाकिस्तानी नागरिकों को चिन्हित कर डिपोर्ट कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश से पाकिस्तानी नागरिकों का डिपोर्टेशन

उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने एक सघन ऑपरेशन के तहत राज्य में शॉर्ट टर्म वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की पूरी जानकारी जुटाई।
सूत्रों के मुताबिक, सिर्फ एक व्यक्ति को विशेष मानवीय आधार पर डिपोर्टेशन से छूट दी गई है, बाकी सभी को वापस भेज दिया गया है।

डिपोर्टेशन की इस कार्रवाई में पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया ताकि कोई राजनयिक या मानवाधिकार से जुड़ी जटिलता न उत्पन्न हो।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “पहलगाम हमले के बाद हमें तत्काल कार्रवाई के निर्देश मिले थे। हमने त्वरित जांच कर सभी संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिकों को राज्य से बाहर कर दिया।”

पाकिस्तानी नागरिकों पर क्यों बढ़ा संदेह?

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, जिनमें आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ एक प्रमुख कारण है।
अतीत में भी कई बार पाकिस्तानी नागरिकों के जरिए आतंकी नेटवर्क को समर्थन मिलने के मामले सामने आ चुके हैं।

पहलगाम हमला, जिसमें पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों के हाथ होने की आशंका है, ने इस चिंता को और गहरा कर दिया।
इसीलिए शॉर्ट टर्म वीजा पर रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों को सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा मानते हुए कार्रवाई की गई।

डिपोर्टेशन में अपवाद: एक मानवीय मामला

उत्तर प्रदेश से डिपोर्ट किए गए सभी पाकिस्तानी नागरिकों में से एक व्यक्ति को विशेष मानवीय आधार पर राहत दी गई है।
हालांकि, सुरक्षा कारणों से इस व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। माना जा रहा है कि उसकी गतिविधियों में कोई संदिग्धता नहीं पाई गई और मानवीय मूल्यांकन के बाद उसे भारत में रहने की अस्थायी अनुमति दी गई है।

यह निर्णय बताता है कि भारत सरकार सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखती है।

अन्य राज्यों में भी चल रही जांच

उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों जैसे राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र में भी पाकिस्तानी नागरिकों की गहन जांच की जा रही है।
राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियां वीजा की वैधता, स्थानीय रिपोर्टिंग, और गतिविधियों का आकलन कर रही हैं।
जहां भी नियमों का उल्लंघन या संदेहास्पद गतिविधियां पाई जाती हैं, वहां वीजा रद्द कर डिपोर्टेशन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

पहलगाम हमला: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक मोड़

पहलगाम आतंकी हमला हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में हुआ सबसे बड़ा नरसंहार माना जा रहा है।
इस हमले के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा संदेश दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ अब “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।

महत्वपूर्ण कदमों में शामिल हैं:

  • कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान।

  • आतंकियों के मददगारों के खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई।

  • एनआईए को जांच सौंपकर हमले के पीछे के नेटवर्क का पर्दाफाश करना।

  • सीमावर्ती इलाकों में नागरिक आवाजाही पर रोक और सैन्य तैनाती बढ़ाना।

भारत का सख्त संदेश पाकिस्तान और दुनिया को

पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट करने का निर्णय केवल आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान और वैश्विक समुदाय के लिए भी एक स्पष्ट संदेश है —
भारत अपनी नागरिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा और आतंकवाद के किसी भी स्रोत को बर्दाश्त नहीं करेगा।

भारत सरकार ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों की गतिविधियों से जुड़े साक्ष्य भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश करने की तैयारी कर ली है।

जनता का समर्थन: सरकार के कदमों का स्वागत

उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में आम जनता ने इस कार्रवाई का खुलकर समर्थन किया है।
सोशल मीडिया पर लोग सरकार से और भी कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं, जैसे:

  • वीजा नियमों को और सख्त करना।

  • पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा आवेदनों की गहन जांच करना।

  • भारत में रह रहे पाकिस्तानी मूल के लोगों पर विशेष निगरानी रखना।

सुरक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की त्वरित कार्रवाई से आतंकवाद से जुड़े संभावित खतरों को समय रहते रोका जा सकता है।

उत्तर प्रदेश से पाकिस्तानी नागरिकों का डिपोर्टेशन भारत के बदलते सुरक्षा दृष्टिकोण का स्पष्ट उदाहरण है।
अब भारत केवल हमलों के बाद प्रतिक्रिया नहीं कर रहा, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही पहचानकर उन्हें समाप्त कर रहा है।

यह proactive रणनीति भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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