उत्तर प्रदेश के बरेली में ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद और हिंसा को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को अपने बयान में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गुंडा राज और माफिया राज बढ़ता जा रहा है। पुलिस को इतना अधिकार मिल गया है कि वह किसी का भी हाथ-पैर तोड़ सकती है और किसी को भी जेल में डाल सकती है। इस पूरी स्थिति पर आजमी ने पुलिस की बर्बर कार्रवाई को लेकर कड़ी आलोचना की और इसे अन्यायपूर्ण बताया। उनका कहना था कि पुलिस के इस रवैये के खिलाफ मुकदमा चलना चाहिए।
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अबू आजमी का पुलिस पर तीखा आरोप
अबू आजमी ने कहा कि यदि किसी स्थान पर कुछ गलत हो रहा है तो पुलिस को उसे नोटिस जारी करना चाहिए, लोगों से बात करनी चाहिए और फिर उस पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन लाठीचार्ज जैसी हिंसक कार्रवाई बिल्कुल गलत और बर्बर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस तरह के कामों के जरिए हिंदू-मुसलमानों के बीच दरार पैदा करना चाहती है। उनका कहना था कि अगर उनके इलाके में ऐसा कुछ गलत होता, तो वह पुलिस से उचित जांच और कार्रवाई की उम्मीद करते हैं।
आजमी ने कहा, “यह मामला तब शुरू हुआ था जब ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर कुछ लोगों ने ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा था। सभी धर्मों के लोग अपने देवताओं के बारे में अच्छा बोलते हैं और मुझे उनका सम्मान है। मुसलमानों ने भी वही लिखा था, लेकिन इसके बावजूद 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और यह मामला अब पूरे देश में फैल गया।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह सब केवल चुनावी राजनीति का हिस्सा है। नेताओं को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि लोग जिएं या मरे, वे बस चुनाव जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। चुनाव जीतने के लिए वे पूरे देश में नफरत का संदेश फैला रहे हैं। इस राजनीति के कारण ही समाज में इस तरह की हिंसा और अशांति फैल रही है।
बरेली से बाराबंकी और मऊ तक तनाव
बरेली में शुरू हुआ ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद धीरे-धीरे बाराबंकी और मऊ जिलों में भी फैल गया है। इस बढ़ते तनाव को काबू में करने के लिए पुलिस ने सख्त रवैया अपनाया है और भारी सुरक्षा बल तैनात किया है। अधिकारियों का दावा है कि स्थिति अब शांतिपूर्ण है और नियंत्रण में है। हालांकि, पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि शनिवार को बरेली में 500 से अधिक लोगों की पहचान सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के माध्यम से की गई। पुलिस ने शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक घर-घर दबिश दी और कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। इसके बावजूद बाकी संदिग्धों की तलाश जारी है।
मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना थाना क्षेत्र के नई बाजार इलाके में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद कुछ लोगों ने ‘आई लव मोहम्मद’ अभियान के तहत जुलूस निकाला। पुलिस ने इस पर हल्का बल प्रयोग करते हुए उन्हें खदेड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे स्थिति और भी बिगड़ी है।
समाज में बढ़ती धार्मिक विभाजन की चिंता
अबू आजमी ने इस घटनाक्रम के पीछे बढ़ते धार्मिक तनाव और समाज में फैल रही नफरत को लेकर भी चिंता जताई। उनका मानना है कि यह घटनाएं सिर्फ एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक खेल का हिस्सा हैं। वह मानते हैं कि नेता और राजनीतिक दल इन घटनाओं को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनावों के लिए धर्म को एक औजार बनाना समाज के लिए खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह एक ऐसी जहर है जो नफरत फैलाती है और समुदायों को आपस में लड़ाता है।
अबू आजमी ने कहा कि किसी भी घटना की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस को पूरी जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन पुलिस का इस तरह का हिंसक रवैया देश में शांति और सद्भाव के लिए खतरा पैदा कर सकता है। वह यह भी कहते हैं कि मौजूदा सरकार को इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय और बढ़ावा दे रही है, जिससे समाज में और भी ज्यादा तनाव पैदा हो रहा है।
पुलिस के रवैये पर सवाल
अबू आजमी ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए और पुलिस अधिकारियों से यह पूछा कि क्या यह कोई समाधान था? उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को वाकई कानून का पालन कराना है, तो उन्हें लोगों के साथ संवाद करना चाहिए, न कि हिंसा का सहारा लेना चाहिए। वह मानते हैं कि पुलिस को अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और इस तरह के बलात्कार, हिंसा और अन्याय के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
इस पूरी स्थिति में एक बात साफ है कि किसी भी स्थिति में पुलिस का बल प्रयोग बिना सोचे-समझे और उचित कारण के नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में पुलिस को पहले नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए और फिर कानून के तहत उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
अबू आजमी का यह बयान केवल उत्तर प्रदेश की घटनाओं तक सीमित नहीं है। यह एक बड़े सवाल को उठाता है कि हमारे देश में क्या धार्मिक और राजनीतिक असहमति के कारण समाज में इतना तनाव फैल सकता है? क्या चुनावी फायदे के लिए धर्म को राजनीति का हिस्सा बनाना सही है? और क्या पुलिस को इस तरह की घटनाओं पर पूरी निष्पक्षता से काम करना चाहिए?
उत्तर प्रदेश में बढ़ती धार्मिक असहमति, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक तकरार के बीच यह सवाल और भी अहम हो जाता है। शांति और सद्भाव को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि हम अपने राजनीतिक दृष्टिकोण को भूलकर समाज को एकजुट रखें और धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोगों को जवाबदेह ठहराएं। केवल तभी हम अपने समाज को सही दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।
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