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77वें गणतंत्र दिवस पर देश में उत्साह और गर्व का माहौल

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भारत सोमवार, 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिन भारतीय संविधान के लागू होने के 76 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। देशभर में राष्ट्रीय पर्व पूरे उत्साह और देशभक्ति के साथ मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर मुख्य समारोह आयोजित किया गया है, जहां भव्य परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संदेश में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, महिला सशक्तीकरण, आर्थिक प्रगति और वैश्विक शांति जैसे अहम विषयों पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत विश्व को शांति का संदेश दे रहा है, जो मानवता के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रपति ने वंदे मातरम् और भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का भी उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गणतंत्र दिवस संदेश

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस भारत की आन, बान और शान का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पर्व हमें स्वतंत्रता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाता है। यह अवसर नागरिकों को एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करता है। उनका संदेश unity और collective responsibility पर केंद्रित रहा।

यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता मुख्य अतिथि

गणतंत्र दिवस 2026 का आयोजन कूटनीतिक दृष्टि से भी खास है। इस वर्ष यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल हुए हैं। उनकी मौजूदगी भारत और यूरोपीय संघ के बीच मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है।

विदेश मंत्री S Jaishankar हाल ही में दोनों नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। गणतंत्र दिवस समारोह के बाद मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी के साथ शिखर वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर निर्णायक घोषणा होने की उम्मीद है। इसके अलावा रणनीतिक रक्षा साझेदारी और भारतीय पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े ढांचे पर भी चर्चा होगी।

कर्तव्य पथ पर परेड में दिखी भारत की सैन्य शक्ति

कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सैन्य क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। परेड में ब्रह्मोस और आकाश हथियार प्रणालियां प्रमुख आकर्षण रहीं। इसके साथ ही गहन मारक क्षमता वाला सूर्यास्त्र रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भी प्रदर्शित किया गया।

अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक ने परेड में सबका ध्यान खींचा। अधिकारियों के अनुसार यह परेड रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की प्रगति को दर्शाती है। इस बार पहली बार नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन और शक्तिबन रेजिमेंट ने भी मार्च पास्ट में हिस्सा लिया। ज़ांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊंटों की मौजूदगी ने परेड को विशिष्ट स्वरूप दिया।

पहली बार दिखा बैटल ऐरे फॉर्मेट

इस वर्ष परेड में भारतीय सेना का चरणबद्ध बैटल ऐरे फॉर्मेट पहली बार प्रस्तुत किया गया। इसमें थल और वायु घटकों का समन्वित प्रदर्शन देखने को मिला। उच्च गतिशीलता वाले टोही वाहन और भारत के पहले स्वदेश निर्मित बख्तरबंद हल्के विशेष वाहन को भी प्रदर्शित किया गया।

वायु समर्थन के लिए ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और उसका सशस्त्र संस्करण रुद्र प्रहार फॉर्मेशन में शामिल रहे। इसके बाद टी-90 भीष्म टैंक, अर्जुन टैंक, अपाचे एएच-64ई हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ने सलामी मंच के ऊपर से उड़ान भरी।

भारतीय नौसेना की दमदार मौजूदगी

परेड में भारतीय नौसेना की भागीदारी भी खास रही। नौसेना की टुकड़ी में 144 युवा अधिकारी और जवान शामिल थे। इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट करन नाग्याल ने किया। प्लाटून कमांडर के रूप में लेफ्टिनेंट पवन कुमार गांडी, लेफ्टिनेंट प्रीति कुमारी और लेफ्टिनेंट वरुण द्वेरेरिया शामिल रहे।

नौसेना की झांकी का विषय मजबूत राष्ट्र के लिए मजबूत नौसेना रहा। इसमें पांचवीं शताब्दी की पारंपरिक नौका को प्रदर्शित किया गया, जिसे अब आईएनएसवी कौंडिन्य नाम दिया गया है। झांकी में स्वदेशी विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि की झलक भी देखने को मिली।

सांस्कृतिक प्रस्तुति और पुष्प वर्षा

गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत लगभग 100 सांस्कृतिक कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। इसका विषय विविधता में एकता रहा। संगीत और वाद्य यंत्रों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाया गया।

इसके बाद 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने कर्तव्य पथ पर पुष्प वर्षा की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सलामी मंच से परेड की सलामी ली। परेड का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल भावनिश कुमार ने किया, जो दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं।

वीरता पुरस्कार विजेताओं को सम्मान

परेड में देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कारों से सम्मानित सैनिक भी शामिल हुए। परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव और सूबेदार मेजर संजय कुमार ने परेड में भाग लिया। अशोक चक्र विजेता मेजर जनरल सी. ए. पिथावालिया और कर्नल डी. श्रीराम कुमार भी इस दल का हिस्सा रहे।

इसके साथ ही यूरोपीय संघ की एक छोटी सैन्य टुकड़ी ने भी परेड में मार्च किया, जो भारत और यूरोप के बीच रक्षा सहयोग का प्रतीक है।

देशभर से नेताओं के संदेश

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र की जननी भी है। उन्होंने नागरिकों से विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की।

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में खड़ा होगा। उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय संकल्प को दोहराने की बात कही।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने संविधान की भूमिका को याद करते हुए कहा कि 76 वर्षों की यात्रा में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन देश की एकता और अखंडता बनी रही।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों और वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

दिल्ली के उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena ने राष्ट्र रक्षा में योगदान देने वाले वीरों और संविधान निर्माताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

देशभर में ध्वजारोहण और सुरक्षा व्यवस्था

देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। चेन्नई में तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि ने ध्वजारोहण किया। भाजपा मुख्यालय, आरएसएस मुख्यालय और कई मुख्यमंत्रियों के आवास पर भी कार्यक्रम आयोजित हुए।

गणतंत्र दिवस को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। दिल्ली पुलिस ने करीब 10 हजार जवान तैनात किए। एआई आधारित स्मार्ट चश्मे और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। भारत-नेपाल सीमा पर भी सशस्त्र सीमा बल ने चौकसी बढ़ा दी है।

गणतंत्र दिवस 2026 का संदेश

गणतंत्र दिवस 2026 भारत की लोकतांत्रिक मजबूती, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य क्षमता को दर्शाता है। यह आयोजन भारत के आत्मविश्वास और वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है। कर्तव्य पथ से दिया गया यह संदेश स्पष्ट है कि भारत एक सशक्त, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र है।

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