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चैती छठ पूजा 2025: पटना में तीसरे दिन का पहला अर्घ्य, प्रशासन ने की कड़ी व्यवस्था

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KKN गुरुग्राम डेस्क | चार दिवसीय महापर्व चैती छठ पूजा का आज तीसरा दिन है, जिसमें पहला अर्घ्य दिया जाएगा। बुधवार को खरना के बाद से छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया था। आज शाम अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। इसके साथ ही कल (शुक्रवार) सुबह का अर्घ्य दिया जाएगा, जिसके बाद व्रत समाप्त हो जाएगा।

पटना में छठ घाटों की तैयारी पूरी हो चुकी है और जिला प्रशासन की टीम मुस्तैदी से काम कर रही है। इस बार प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कड़ी तैयारी की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई समस्या न हो।

छठ पूजा का महत्व और आज का दिन

छठ पूजा का महत्व बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के कुछ हिस्सों में बहुत अधिक है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छठी मईया की पूजा के लिए मनाया जाता है। इस दिन व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवासी रहते हैं और सूर्य देवता की पूजा करते हैं।

आज के दिन, छठ व्रती अपने घरों में स्नान आदि कर पारंपरिक पकवान ठेकुआ और अन्य प्रसाद तैयार करने में जुट जाते हैं। आज शाम, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। व्रति और उनके परिवार के सदस्य ठेकुआ, नारियल, फल और अन्य प्रसादों से सूप (विनिंग बास्केट) को सजाकर सूर्य को अर्घ्य देंगे।

पटना के थोक फल मंडी में आज सुबह 3-4 बजे से ही बाजार में भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि, फल मंडी में भीड़ बुधवार से ही देखी जा रही है, क्योंकि लोग जल्दी से जल्दी पूजा के लिए जरूरी सामग्री जुटाना चाहते हैं।

पटना में सुरक्षा और व्यवस्थाएँ

आज दोपहर के बाद, छठ व्रती घाटों के लिए निकलने लगेंगे। पटना जिला प्रशासन ने गंगा घाटों और अन्य तालाबों में अर्घ्य देने के लिए पूरी तैयारी की है। कच्ची तालाब (गर्दनीबाग), पटना चिड़ियाघर और अन्य सात जगहों पर अर्घ्य देने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा और सफाई व्यवस्था हो, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

सड़क परिवहन पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही में कोई परेशानी न हो। घाटों तक पहुंचने के लिए पार्किंग की अलग व्यवस्था की गई है, जिससे वाहनों की भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन की ओर से सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और पुलिस की गश्त भी बढ़ा दी गई है।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व

छठ पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन भी है। यह पर्व सूर्य देवता के प्रति आस्था और श्रद्धा को व्यक्त करता है। इस पूजा में व्रती 36 घंटे का उपवास रखते हैं और सच्ची श्रद्धा के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह पूजा खासतौर पर स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की सुख-शांति के लिए की जाती है।

पूरे बिहार और आसपास के राज्यों में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह समय परिवारों के बीच एकजुटता और सामूहिक उत्सव का होता है, जिसमें हर कोई भाग लेता है। खासतौर पर पटना के घाटों पर इस दिन का माहौल भक्तिमय होता है, जहां हजारों लोग एक साथ सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जमा होते हैं।

छठ पूजा और स्थानीय बाजार

छठ पूजा के दौरान पटना के बाजारों में फल, फूल, नारियल, ठेकुआ, और अन्य पूजा सामग्री की भारी मांग होती है। इससे स्थानीय व्यापार को काफी बढ़ावा मिलता है। थोक फल मंडी और सुपर मार्केट में हर साल छठ के समय बिक्री में भारी वृद्धि होती है। ठेकुआ, जो इस त्योहार का प्रमुख प्रसाद है, इसकी बिक्री में भी बड़ा उछाल देखा जाता है।

स्थानीय व्यापारियों के लिए यह अवसर व्यवसाय को बढ़ाने का होता है।  श्रद्धालु विशेष रूप से पटना में आने के लिए उत्सुक रहते हैं, जहां वे गंगा घाटों पर सूर्य पूजा में भाग लेते हैं।

छठ पूजा 2025: छठ व्रतियों का 36 घंटे का व्रत

छठ पूजा में सबसे कठिन हिस्सा 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है, जिसे व्रती पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पालन करते हैं। इस दौरान व्रती न तो पानी पीते हैं और न ही कोई आहार ग्रहण करते हैं। यह एक कठिन परीक्षा होती है, लेकिन सूर्य देवता के प्रति आस्था और विश्वास व्रतियों को मजबूती प्रदान करता है।

इस कठिन व्रत को पूरा करने के बाद व्रति सूर्य को अर्घ्य देने के लिए घाट पर जाते हैं, जहां वे पूजा करते हैं और सूर्योदय के समय दूसरा अर्घ्य देते हैं। यह समय उनके जीवन में नए बदलाव और नवीनीकरण का प्रतीक होता है।

पटना में छठ पूजा के आयोजन का इतिहास

पटना में छठ पूजा का आयोजन बहुत पुराने समय से होता आ रहा है। यह एक पारंपरिक पर्व है, जिसे लोग बड़ी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाते हैं। यहां के गंगा घाट और तालाब हमेशा श्रद्धालुओं से भरे रहते हैं, खासकर छठ पूजा के दौरान। इस समय पटना में विशेष तौर पर घाटों की सजावट, पूजा सामग्री की व्यवस्था, और सुरक्षा व्यवस्थाओं का आयोजन किया जाता है ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी पूजा को अंजाम दे सकें।

छठ पूजा 2025 में पटना और अन्य भागों में बड़े धूमधाम से मनाई जा रही है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा, व्यवस्था, और सड़क परिवहन को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को कोई कठिनाई न हो। इस महापर्व के दौरान श्रद्धालु अपने परिवार की समृद्धि और सुख-शांति के लिए भगवान सूर्य से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

पटना के गंगा घाटों और कच्ची तालाबों में भक्तों की भारी भीड़ जुटने वाली है, और यह शहर के सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक बना हुआ है। इस दौरान श्रद्धालु पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए, एकता और सामूहिक पूजा के महत्व को उजागर करते हैं। छठ पूजा का यह उत्सव ना केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता और सामाजिक भाईचारे का भी प्रतीक है।

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