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संसद में राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप, बोले – ‘मुझे बोलने नहीं दिया जाता’

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KKN गुरुग्राम डेस्क | कांग्रेस सांसद और नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संसद में कार्यवाही के दौरान गंभीर आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी का कहना है कि जब भी वह सदन में कुछ बोलने के लिए खड़े होते हैं, उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। राहुल गांधी ने यह बयान तब दिया जब वह संसद में बोलने के लिए खड़े हुए थे और तभी सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी को सदन की मर्यादा बनाए रखने की नसीहत दी थी।

मुख्य हाइलाइट्स:

  • राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता।

  • ओम बिरला ने राहुल गांधी को सदन की मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी।

  • सदन की कार्यवाही क्यों स्थगित की गई?

  • राहुल गांधी ने अपनी बात मीडिया से की और अपनी नाराजगी व्यक्त की।

राहुल गांधी के आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि जब भी वह संसद में कुछ बोलने के लिए खड़े होते हैं, तब उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि वह जब सदन में खड़े हुए थे, तब अचानक कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया, और उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। यह घटना संसद के भीतर हुई, और इसके बाद राहुल गांधी ने बाहर आकर मीडिया से बात की, जहां उन्होंने अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जाता, और Speaker (लोकसभा अध्यक्ष) ने तो मुझे बोलने से पहले ही कार्यवाही स्थगित कर दी।”

राहुल गांधी का कहना था, “मुझे समझ में नहीं आता कि क्या हो रहा है। मैंने उनसे (लोकसभा अध्यक्ष) अनुरोध किया कि मुझे बोलने दिया जाए, लेकिन वह (लोकसभा अध्यक्ष) बस भाग गए। इस तरह से सदन नहीं चल सकता।”

ओम बिरला का बयान

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस घटना से पहले राहुल गांधी को सदन में नियमों का पालन करने की सलाह दी थी। बिरला ने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि सभी सदस्य नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा, “हम सभी से अपेक्षाएं हैं कि हम सदन की गरिमा और उच्च शालीनता को बनाए रखें। कई घटनाएं हुई हैं जो सदन के उच्च मानकों के अनुरूप नहीं थीं।”

ओम बिरला ने राहुल गांधी से खासतौर पर कहा, “सदन में पिता-पुत्री, मां-बेटी, और पति-पत्नी जैसे सदस्य रहे हैं, और मैं उम्मीद करता हूं कि नेता प्रतिपक्ष (राहुल गांधी) लोकसभा के नियमों के तहत सदन में अपने आचरण और व्यवहार का पालन करें।”

यह बयान उन घटनाओं के संदर्भ में था, जो हाल ही में सदन में हुए थे, जहां कुछ सदस्य सदन की परंपराओं के खिलाफ आचरण कर रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष का यह बयान सदन के आदर्श और मानकों को बनाए रखने के उद्देश्य से था, ताकि सभी सदस्य सही तरीके से अपनी बात रख सकें।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी ने ओम बिरला द्वारा दी गई नसीहत के बाद मीडिया से बात की और अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह किसी भी सदस्य को बोलने से नहीं रोकते हैं, लेकिन उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है, यह समझ से बाहर है। गांधी का कहना था कि संसद में उनका यह अधिकार है कि वह अपनी बात रखें, और जब वह खड़े हुए, तो उन्हें बोलने का मौका मिलना चाहिए था।

उन्होंने कहा, “मैं खड़ा हुआ और बोलने की कोशिश की, लेकिन मुझे नहीं दिया गया। जब मैंने कहा कि मुझे बोलने दें, तो Speaker ने कार्यवाही स्थगित कर दी। यह लोकतंत्र के खिलाफ है। मुझे ऐसा लगता है कि मेरी आवाज को जानबूझकर दबाने की कोशिश की जा रही है।”

राहुल गांधी के इस बयान ने संसद के भीतर चल रहे विवादों और वाद-विवाद को और भी तूल दे दिया है। उनका आरोप है कि विपक्ष के नेताओं को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जबकि वे लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने का अधिकार रखते हैं।

विपक्षी नेताओं की चिंता

राहुल गांधी का यह आरोप विपक्षी नेताओं के बीच चिंता का विषय बन गया है। विपक्षी पार्टियों का कहना है कि सदन के अंदर विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है और उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। यह मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका है, जब विपक्षी दलों ने कहा था कि सदन में उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा।

विपक्ष के नेताओं का मानना है कि यदि सदन में स्वस्थ और लोकतांत्रिक बहस नहीं हो सकती, तो लोकतंत्र की नींव कमजोर हो जाएगी। इसलिए विपक्षी नेताओं का यह आग्रह है कि सरकार को सदन में विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका देना चाहिए, ताकि वे जनता की समस्याओं और सवालों को सही तरीके से उठा सकें।

सदन की कार्यवाही क्यों स्थगित की गई?

सदन की कार्यवाही स्थगित करने का कारण उस समय स्पष्ट नहीं था, लेकिन इसके बाद जब राहुल गांधी मीडिया से बात कर रहे थे, तब उन्होंने अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह कदम पूरी तरह से अनुचित था, क्योंकि वह अपनी बात रखने के लिए खड़े थे। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित करते हुए कहा कि कुछ घटनाएं सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं हैं, और उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

लोकतंत्र और संसद की गरिमा

यह घटना लोकतंत्र और संसद की गरिमा को बनाए रखने की आवश्यकता को और भी स्पष्ट करती है। संसद एक ऐसा स्थान है जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं और सार्वजनिक नीति पर बहस होनी चाहिए। यदि सदन में एक सदस्य को बोलने का अवसर नहीं मिलता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कमजोर स्थिति को दिखाता है।

राहुल गांधी के आरोपों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या संसद में सभी दलों और उनके नेताओं को समान रूप से बोलने का अवसर मिल रहा है। यह घटना विपक्षी नेताओं के लिए एक चेतावनी के रूप में सामने आई है कि सरकार और लोकसभा अध्यक्ष को विपक्षी नेताओं को सदन में अपनी बात रखने का पूरा मौका देना चाहिए।

राहुल गांधी का यह आरोप कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा, एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रश्न उठाता है। संसद की कार्यवाही और सदन की मर्यादा दोनों ही लोकतंत्र की बुनियादी धारा हैं, और किसी भी पार्टी या नेता को अपनी आवाज उठाने का पूरा हक है। इस मुद्दे को लेकर आगे भी संसद में चर्चा होने की संभावना है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बयान और राहुल गांधी की प्रतिक्रिया दोनों ही इस बात का संकेत हैं कि भारतीय राजनीति और लोकतंत्र में संवाद और बहस की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोकतंत्र के अच्छे संचालन के लिए यह जरूरी है कि सभी दलों को एक समान मंच पर अपनी बात रखने का अवसर मिले।

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