बुधवार, मई 27, 2026 2:12 पूर्वाह्न IST
होमNationalभारत की राजनीति का मुखौटा बना विकासवाद

भारत की राजनीति का मुखौटा बना विकासवाद

Published on

कौशलेन्द्र झा

सूरज की लालिमा अभी छटी भी नही थी और नेताजी का आगमन हो गया। कोई सुबह की अंगराई भर रहा था और कोई अपने इष्ट को याद करके दिन की शुरूआत करना चाहता था।

वहीं, नेताजी का अपना अलग ही एजेंडा है। अगड़ी- पिछड़ी का एजेंडा, दलित और गैर दलित का एजेंडा और इससे भी बढ़ कर कथित सेक्यूलरवाद का एजेंडा। बीच- बीच में नेताजी… मनुवाद, ब्राह्मणवाद, जातिवाद, सामंतवाद और समाजवाद की खिचड़ी भी बड़ी आसानी से पका लेते हैं। अचानक विषय परिवर्तन होता है। चाय की छोटी सी दुकान पर नेताजी के सामने बैठे लोगो को नेताजी अब गरीबी का कारण समझाना शुरू करतें हैं।
गुमराह करके बन रहें है स्वयंभू नेता
सरकार को पूंजीपतियों का हितैसी होने का तर्क, जब कम पढ़े लिखे लोगो के पल्ले नही पडा तो नेताजी ने रंग बदला और एक बार फिर से जातिवाद की जहर उगलना शुरू…। आरक्षण से लेकर समाजिक तानाबाना तक और जमींदारी प्रथा से लेकर समाजवाद तक… एक और लम्बा प्रवचन। आरक्षण को खत्म करने की कथित साजिश हो या संविधान खतरे में… नेताजी ने लोगो को गुमराह करने की कोई कसर बाकी नही छोड़ी। खैर, अपनी उंची पहुंच और रसूख का हवाला देने का और कोई लाभ हो या नही हो पर, नेताजी को मुफ्त का चाय और बिस्कुट जरुर मिल गया।
समाज को तोड़ कर सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने की जुगत
सवाल उठता है कि इतना सभी कुछ करने के बाद भी नेताजी का दर्जा, दोयम ही क्यों रह गए? ट्वीटर, फेसबुक और व्हाट्सएप का ग्रुप बना कर जहर उगलने वाले इनसे आगे कैसे बढ़ गए? इन्हीं सवालो के पीछे छिपा है, भारत की मौजूदा राजनीति का तानाबाना। सत्ता के खातिर समाज को तोडने और तथ्यों को तोड़ मरोर कर खुद को वर्ग विशेष का मसीहा बनने की राजनीति। विचारधाराओ के नाम पर नकारात्मक जहर उगलने की राजनीति और समाज में घोर नफरत और कटुता फैलाने की राजनीति। गांव से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक की, आज यही हकीकत बन चुकी है।
जातिवाद और धर्मिक उन्माद बना मार्ग
गौर से देंखे तो भारत की राजनीति, विकासवाद से बहुत दूर निकल चुका है। आज भारत में सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने के लिए दो ही मार्ग शेष बचे है। एक जाजिवाद का और दूसरा धार्मिक उन्माद का। विकासवाद तो महज एक मुखौटा बन कर रह गया है। नतीजा, आज का हमारा समाजिक तानाबाना खंड- खंड होने के कगार पर है। समाजिक तनाव चरम पर है और हम अकारण ही एक दूसरे को हिकारत भरी नजरो से देखने लगे है।
मौजूदा राजनीति को समझने का वक्त आ गया
सवाल उठना लाजमी है कि क्या इसी को राजनीति मान लिया जाए। क्या अपनी कमियों को दूसरो पर थोप देना ही राजनीति है? यदि नही तो, आजादी के सात दशक बाद भी देश में मौजूद गरीबी, निरक्षरता, बेरोजगारी और जातीय तनाव के लिए जिम्मेदार कौन है? जिस सरकारी धन को हमारे ही रहनुमाओं ने लूटा। दरअसल, वह राशि किसके विकास पर खर्च होना था? ऐसे दर्जनो सवाल है, जिसका जवाब अब हमीं को ढ़ूढ़ना पड़ेगा। यकीन मानिये, आप जिस रोज इन सवालो का हकीकत समझ जायेंगे। उसी रोज से हमारे देश की राजनीति एक बार फिर से विकासवाद की राह पकड़ लेगा।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

झारखंड के तीन अद्भुत पार्क Rock Garden, Jubilee Park & Zoological Park की रहस्यमयी कहानी

क्या पत्थर बोल सकते हैं? क्या एक पार्क इतिहास की खामोश कहानी सुना सकता...

भारत के खिलाफ डीप स्टेट की साजिश और Narrative Warfare का बड़ा खुलासा

क्या भारत सिर्फ सीमा पर लड़ाई लड़ रहा है… या फिर देश के खिलाफ...

“हाँ इश्क है” के लोकार्पण समारोह में जुटे कवि और साहित्य प्रेमी, पटना में दिखा साहित्य का रंग

पटना में रविवार को साहित्य, कविता और रचनात्मक अभिव्यक्ति का एक यादगार आयोजन देखने...

क्या पेट्रोलियम संकट की तरफ बढ़ रहा है भारत?

मिडिल ईस्ट की आग, अमेरिका की शांति वार्ता और भारत पर मंडराता खतरा KKN ब्यूरो।...

More like this

बिहार में ‘सम्राट कैबिनेट’ का बड़ा दांव, निशांत को स्वास्थ्य तो बीजेपी के पास गई शिक्षा की कमान

KKN ब्यूरो। बिहार की नई सत्ता व्यवस्था अब पूरी तरह आकार ले चुकी है।...

क्या बिहार में बदलेगी सत्ता की स्क्रिप्ट या दोहराएगा इतिहास?

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति में सचमुच एक युग का अंत और दूसरे...

बिहार में RTI सिस्टम ध्वस्त! 30,000 अपीलें लंबित, हाई कोर्ट सख्त—क्या खत्म हो रही पारदर्शिता?

KKN ब्यूरो। बिहार में पारदर्शिता की रीढ़ मानी जाने वाली सूचना का अधिकार (RTI)...

नीतीश युग का अंत या नई शुरुआत? सम्राट चौधरी के हाथों में बिहार की सत्ता का नया समीकरण

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है…...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

क्या मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुई अमेरिका की दादागिरी?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया एक बार फिर उसी खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां...

क्या नीतीश कुमार का दौर खत्म होने वाला है और क्या बीजेपी लिख रही है नई सत्ता की पटकथा?

पटना की राजनीति में अचानक क्यों तेज हुई फुसफुसाहट? KKN ब्यूरो। क्या बिहार में फिर...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...
00:10:10

क्या चीन-बांग्लादेश की साज़िश से घिर गया भारत? सिलिगुड़ी कॉरीडोर पर क्यों मंडराया खतरा

भारत का सबसे संवेदनशील इलाका — सिलिगुड़ी कॉरीडोर, जिसे दुनिया चिकेन नेक के नाम...

Pariksha Pe Charcha 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से की सीधी बातचीत

Pariksha Pe Charcha 2026 का आगाज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के...

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए प्रशांत किशोर, 8 फरवरी से शुरू करेंगे बिहार यात्रा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के नेता...

Budget 2026 : महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा बजट, She Mart और लखपति दीदी को नई रफ्तार

केंद्रीय बजट 2026 में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर...

Union Budget 2026–27: बजट के बाद क्या सस्ता हुआ, क्या हुआ महंगा

देश की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने रविवार को लोकसभा में वर्ष 2026–27 का...

Tatkal Ticket New Rules 2026 : तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

 Indian Railways ने Tatkal Ticket Booking प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के...

अजित पवार का अंतिम संस्कार : राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, शोक में डूबा महाराष्ट्र

महाराष्ट्र की राजनीति ने गुरुवार को एक बड़े और अपूरणीय नेता को खो दिया।...