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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने AAP पर ₹700 करोड़ COVID-19 घोटाले का आरोप लगाया, जांच का वादा

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KKN गुरुग्राम डेस्क |  दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कोविड-19 महामारी के दौरान ₹700 करोड़ के घोटाले में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। पंकज सिंह ने इन वित्तीय गड़बड़ियों का हवाला देते हुए कहा कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा।

₹700 करोड़ के घोटाले का आरोप

ANI से बातचीत करते हुए पंकज सिंह ने कहा, “AAP सरकार कोविड-19 के दौरान ₹700 करोड़ के घोटाले में शामिल थी।” उनका यह बयान सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) की रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कई घोटाले उजागर होने की संभावना जताई गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जब सीएजी रिपोर्ट सार्वजनिक होगी, तो इन घोटालों की पूरी जांच की जाएगी और इसके लिए जिम्मेदार सभी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सीएजी रिपोर्ट और गड़बड़ियां

पंकज सिंह का यह आरोप दिल्ली विधानसभा में 25 फरवरी को पेश की गई सीएजी रिपोर्ट के बाद सामने आया है। रिपोर्ट में दिल्ली के आबकारी नीति में गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है, जिसमें ₹941.53 करोड़ का राजस्व नुकसान बताया गया है।

सीएजी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आबकारी विभाग ने गैर-कानूनी वार्डों में शराब की दुकानें खोलने के लिए समय पर अनुमोदन नहीं लिया, जिसके कारण ₹890.15 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके अलावा, कोविड-19 के कारण दुकानें बंद होने पर लाइसेंस धारकों को ₹144 करोड़ की “अनियमित छूट” दी गई।

आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के आरोप

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, आबकारी नीति के डिज़ाइन, टेंडरिंग और क्रियान्वयन में भी गड़बड़ियां पाई गईं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नई आबकारी नीति में एकाधिकार को बढ़ावा दिया गया, जिससे प्रतिस्पर्धा कम हुई और कार्टेलाइजेशन (सामूहिक सौदा) का खतरा उत्पन्न हुआ।

इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि शराब परीक्षण प्रयोगशालाओं, बैच गुणवत्ता जांच और निगरानी को लेकर दिल्ली सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जो कि इस नीति के तहत ज़रूरी थे। इन व्यवस्थाओं की कमी ने भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों को बढ़ावा दिया है।

बीजेपी का हमला और AAP का बचाव

दिल्ली बीजेपी ने AAP पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह रिपोर्ट को छिपा रही है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर रही है। बीजेपी ने दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) वीके सक्सेना के आदेश का समर्थन किया, जिसमें सभी विभागों से 100-दिन का विकास योजना तैयार करने को कहा गया था। यह आदेश पिछले शासन के विफलताओं का संज्ञान लेने के लिए था।

बीजेपी के नेताओं का कहना है कि AAP ने केवल अपना पक्ष प्रस्तुत किया और जो असल सच्चाई है, उसे जनता से छिपाने की कोशिश की है। बीजेपी का आरोप है कि AAP के कार्यकाल में न केवल वित्तीय संसाधनों की कमी हुई है, बल्कि घोटालों की भी भरमार रही है।

AAP का जवाब

AAP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। पार्टी का कहना है कि COVID-19 संकट के दौरान सरकार ने हर संभव कदम उठाया था और सभी प्रोटोकॉल का पालन किया था।

AAP के नेताओं का कहना है कि सीएजी रिपोर्ट में जो भी गड़बड़ियां हैं, वह एक जटिल महामारी के दौरान आईं, और इसमें किसी भी प्रकार की घोटालेबाजी नहीं हुई। पार्टी ने यह भी कहा कि शराब लाइसेंस धारकों को दी गई छूट कोविड-19 के चलते व्यवसायिक संकट के कारण दी गई थी और यह किसी भी वित्तीय अनुशासन का उल्लंघन नहीं करती।

राजनीति में असर

दिल्ली में आगामी चुनावों के मद्देनज़र यह आरोप AAP के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट बन सकते हैं। यदि पंकज सिंह के आरोप सही साबित होते हैं तो AAP की छवि को करारा झटका लग सकता है। दिल्ली में बीजेपी अब इस मामले को चुनावी हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना सकती है।

बीजेपी के हमले के बीच, AAP ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह जांच में सहयोग करेगी, लेकिन आरोपों को राजनीतिक साजिश मानते हुए इनसे कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं उठाने की बात कही है।

सीएजी रिपोर्ट और दिल्ली के वित्तीय नुकसान

सीएजी रिपोर्ट में 941.53 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान के अलावा, आबकारी नीति के प्रावधानों में भी कई खामियां बताई गई हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शराब की दुकानों के लिए लाइसेंस जारी करने में समय पर अनुमोदन नहीं लिया गया, जिसके कारण सरकार को नुकसान हुआ। इसके अलावा, बिना री-टेंडरिंग किए लाइसेंसों को रद्द किया गया, जिससे राजस्व की हानि हुई।

इसके अलावा, यह रिपोर्ट कहती है कि सरकार ने शराब की गुणवत्ता की जांच के लिए जरूरी प्रयोगशालाएं नहीं स्थापित की, जो एक बड़े नुकसान की ओर इशारा करता है।

दिल्ली सरकार पर बढ़ती आलोचना

सीएजी रिपोर्ट और पंकज सिंह के आरोपों के बाद दिल्ली सरकार की आलोचना और बढ़ गई है। विपक्ष, खासकर बीजेपी, ने AAP सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और यह मांग की है कि इस मामले की पूरी जांच की जाए।

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली सरकार से सभी विभागों को एक 100-दिन का विकास कार्यक्रम पेश करने के लिए कहा है, ताकि पहले की शासनात्मक विफलताओं को सुधारा जा सके। इस कदम से स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार दिल्ली में AAP के कार्यकाल से नाखुश है और सुधार की दिशा में कदम उठा रही है।

जांच का भविष्य और राजनीति

दिल्ली सरकार ने जांच में पूरी तरह से सहयोग करने का वादा किया है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या इस मामले की जांच पारदर्शी तरीके से होगी। पंकज सिंह का कहना है कि कोई भी दोषी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा। अब यह देखना होगा कि दिल्ली सरकार इस मामले में कितनी जल्दी और ईमानदारी से कार्रवाई करती है, क्योंकि यह उनके भविष्य और जनता के विश्वास पर भारी पड़ सकता है।

यदि सीएजी रिपोर्ट में जिन गड़बड़ियों का खुलासा किया गया है, वे सही साबित होती हैं, तो यह AAP के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

दिल्ली में कोविड-19 के दौरान हुए ₹700 करोड़ के घोटाले का आरोप और सीएजी रिपोर्ट में हुए वित्तीय नुकसान ने दिल्ली सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस मामले में अगर जांच पारदर्शी होती है और सच्चाई सामने आती है, तो AAP के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका हो सकता है। दूसरी ओर, बीजेपी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है, और आगामी चुनावों में यह मामला प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है।

दिल्ली के लोगों को उम्मीद है कि इस घोटाले की जांच शीघ्र और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां न हो सकें और सरकार को जवाबदेह ठहराया जा सके।

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