Yogi Adityanath Biopic: सीबीएफसी की देरी पर फिल्म का मामला पहुंचा हाई कोर्ट

Yogi Adityanath Biopic: Controversy Over Film Certification

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर बनी फिल्म अब विवादों में है। इस Yogi Adityanath Biopic की रिलीज़ को लेकर उठे सवाल बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंच गए हैं। फिल्म निर्माता का आरोप है कि CBFC Delay जानबूझकर किया जा रहा है और सेंसर बोर्ड फिल्म को प्रमाणपत्र देने में टालमटोल कर रहा है।

फिल्म का शीर्षक और पृष्ठभूमि

इस फिल्म का नाम है Ajey: The Untold Story of a Yogi। इसे Samrat Cinematics India Private Limited ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म लेखक शांतनु गुप्ता की किताब The Monk Who Became Chief Minister पर आधारित है। निर्माताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक राजनीतिक जीवनी नहीं है, बल्कि युवाओं को एकता और अखंडता का संदेश देने वाली फिल्म है। दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने भी इस फिल्म पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।

फिल्मकारों की दलील और अदालत की पहल

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 5 जून 2025 को सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया गया था। नियमों के अनुसार CBFC को सात दिन में आवेदन की जांच करनी चाहिए और पंद्रह दिन के भीतर स्क्रीनिंग करनी होती है। लेकिन एक महीने से ज़्यादा बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद निर्माताओं ने Priority Scheme के तहत दोबारा आवेदन किया। बोर्ड ने 7 जुलाई को स्क्रीनिंग की तारीख तय की लेकिन अचानक रद्द कर दी।

फिल्मकारों का कहना है कि सेंसर बोर्ड ने न सिर्फ सर्टिफिकेट में देरी की बल्कि टीज़र, ट्रेलर और प्रमोशनल गानों की मंजूरी भी रोकी। मजबूर होकर उन्हें Bombay High Court का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा।

कोर्ट में हुई सुनवाई

सुनवाई के दौरान सीबीएफसी ने कहा कि आवेदन पर दो वर्किंग डे के भीतर फैसला किया जाएगा। वहीं निर्माताओं ने बताया कि फिल्म की रिलीज़ डेट 1 अगस्त तय थी, लेकिन अब तक देरी से पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है।

21 जुलाई को सीबीएफसी ने फिल्मकारों को सूचित किया कि उनका आवेदन खारिज कर दिया गया है। इस पर याचिकाकर्ता फिर कोर्ट पहुंचे। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बोर्ड को बताना होगा कि फिल्म में आपत्तिजनक सामग्री क्या है ताकि उसे हटाया जा सके।

सेंसर बोर्ड की आपत्तियां

सीबीएफसी ने शुरुआत में फिल्म पर 29 आपत्तियां लगाईं। बाद में इनमें से 8 आपत्तियां हटा दी गईं। बोर्ड ने फिल्म के टाइटल Ajey: The Untold Story of a Yogi पर भी सवाल उठाए। निर्माताओं का आरोप है कि ये आपत्तियां अस्पष्ट और अनावश्यक हैं। उनका कहना है कि फिल्म का मकसद न तो किसी नेता की छवि को नुकसान पहुंचाना है और न ही राजनीतिक लाभ लेना।

कोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट ने माना कि सेंसर बोर्ड प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने में असफल रहा है। जजों ने कहा कि कोई आदेश जारी करने से पहले वे खुद फिल्म देखेंगे। अगली सुनवाई 25 अगस्त 2025 को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि बोर्ड चाहे तो सुधार सुझा सकता था, लेकिन देरी करके फिल्मकारों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

प्रोड्यूसर का पक्ष

निर्माताओं का कहना है कि यह फिल्म युवाओं को प्रेरणा देने के लिए बनाई गई है। उनका दावा है कि इसमें योगी आदित्यनाथ के जीवन की यात्रा दिखाई गई है जो साधारण से असाधारण बनने का उदाहरण है। प्रोड्यूसर्स का तर्क है कि जब मुख्यमंत्री के कार्यालय ने आपत्ति नहीं जताई, तो सेंसर बोर्ड के पास देरी का कोई औचित्य नहीं है।

CBFC की दलील

सीबीएफसी ने अदालत में कहा कि याचिका टिकाऊ नहीं है क्योंकि फिल्मकार रिवाइजिंग कमेटी के आदेश को Cinematograph Act के तहत चुनौती दे सकते थे। हालांकि प्रोड्यूसर का कहना है कि रिवाइजिंग कमेटी खुद मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। कोर्ट ने यह भी माना कि प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

रिलीज़ पर असर

फिल्म की रिलीज़ पहले 1 अगस्त तय थी, लेकिन अब तक संभव नहीं हो सकी। मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन की योजना बिगड़ चुकी है। टीज़र और ट्रेलर तक की रिलीज़ में रोड़ा अटका दिया गया है। प्रोड्यूसर का कहना है कि इससे आर्थिक नुकसान हो रहा है और पूरी टीम निराश है।

संवेदनशीलता और सार्वजनिक रुचि

राजनीतिक हस्तियों पर आधारित फिल्मों में विवाद होना आम है। UP CM Yogi Adityanath Film Controversy भी इसलिए संवेदनशील मानी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि फिल्म युवाओं को प्रेरित करेगी, जबकि आलोचकों को डर है कि इससे राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है।

सेंसरशिप पर बड़ा सवाल

यह विवाद एक बार फिर भारत में फिल्म सेंसरशिप पर बहस को जन्म देता है। फिल्मकार अक्सर सीबीएफसी पर मनमाने निर्णय और पक्षपात का आरोप लगाते हैं। सवाल यही है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बने। इस केस का फैसला भविष्य की कई राजनीतिक फिल्मों के लिए मिसाल बन सकता है।

आगे क्या होगा

अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। जज फिल्म देखने के बाद ही तय करेंगे कि आपत्तियां सही हैं या नहीं। अगर कोर्ट को लगे कि फिल्म में आपत्तिजनक कुछ नहीं है, तो जल्द रिलीज़ का रास्ता साफ होगा। लेकिन अगर संशोधन की ज़रूरत पड़ी तो देरी और बढ़ सकती है।

Yogi Adityanath Biopic पर उठे विवाद ने राजनीति, सिनेमा और कानून के बीच खींचतान को फिर उजागर कर दिया है। जहां प्रोड्यूसर इसे युवाओं को प्रेरित करने वाली फिल्म बता रहे हैं, वहीं CBFC Delay ने रिलीज़ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Bombay High Court ने साफ कहा है कि आदेश देने से पहले फिल्म खुद देखी जाएगी। अब सबकी निगाहें 25 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि Ajey: The Untold Story of a Yogi दर्शकों तक कब पहुंचेगी।

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