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लालू यादव के ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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18 जुलाई, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव से जुड़े ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले के ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसने पहले ही ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हाई कोर्ट ने ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले के ट्रायल पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह ट्रायल को रोकने का आदेश नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, “हम रोक नहीं लगाएंगे, हम अपील खारिज कर देंगे और कहेंगे कि मुख्य मामले का फैसला होने दें।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब हाई कोर्ट पहले से ही इस मामले की सुनवाई कर रहा है, तो इसमें सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप करना आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि यह मामला आगे बढ़े और ट्रायल प्रक्रिया जारी रहे।

लालू यादव को मिली थोड़ी राहत

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को एक राहत दी। अदालत ने यह आदेश दिया कि उन्हें ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह लालू यादव की याचिका पर शीघ्र सुनवाई करे, जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

धारा 17A पर बहस और अनुमति का मुद्दा

लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले में पैरवी की, जबकि सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पक्ष रखा। इस दौरान, कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक अनुमति नहीं ली थी। इस धारा के तहत, किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य होता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मुद्दे पर रोक लगाने से मना करते हुए कहा था कि यह मुद्दा आरोप तय करने के समय पर उठाया जा सकता है। इस पर, एएसजी राजू ने तर्क दिया कि धारा 17A की अनुमति इस मामले में लागू नहीं होती, क्योंकि यह घटना 2018 के संशोधन से पहले की है।

सिब्बल ने पलटवार करते हुए कहा, “उनकी उत्सुकता बता रही है। वह 2005 से 2009 तक मंत्री थे। एफआईआर 2021 में दर्ज हुई। बिना अनुमति के जांच शुरू नहीं हो सकती। बाकी सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए अनुमति ली गई है, सिर्फ इनके लिए नहीं।” बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया कि इस स्तर पर मामले की गहराई में नहीं जाएंगे।

‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले का विवरण

‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले के अंतर्गत यह आरोप है कि जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे, तब उन्होंने लोगों से कथित रूप से जमीन ली और इसके बदले उन्हें भारतीय रेलवे में नौकरी दी। सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है, और उनका कहना है कि यह मामला भ्रष्टाचार और सरकारी नौकरियों के बदले जमीन लेने का है।

लालू यादव का बचाव यह रहा है कि सीबीआई ने उनकी जांच शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से जरूरी अनुमति नहीं ली। इस कानूनी खामी को लेकर वह बार-बार अपनी याचिका प्रस्तुत करते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय और उसके प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय यह साफ कर देता है कि अब लालू यादव को इस घोटाले से जुड़े ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। यह उनके लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि अगर उन्हें दोषी ठहराया जाता है, तो उन्हें जेल हो सकती है।

इस फैसले के बाद, अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट पर हैं। हाई कोर्ट में लालू यादव की याचिका पर कितनी जल्दी सुनवाई होती है, इस पर इस केस का भविष्य निर्भर करेगा।

राजनीतिक और कानूनी करियर पर असर

लालू यादव के लिए यह मामला उनके राजनीतिक और कानूनी करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर उन्हें इस घोटाले में दोषी पाया जाता है, तो यह उनकी राजनीतिक छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। उनके जेल जाने की संभावना से उनके समर्थकों में निराशा हो सकती है।

लालू यादव बिहार के एक प्रमुख राजनीतिक नेता हैं, और उनके ऊपर चल रहे मामलों का असर उनकी पार्टी RJD और राज्य की राजनीति पर भी पड़ेगा। उनकी राजनीतिक ताकत और आगामी चुनावों में उनकी भूमिका इस केस के परिणामों पर निर्भर करेगी।

क्या होगा इस केस का भविष्य?

अब इस केस की सुनवाई का मुख्य केंद्र दिल्ली हाई कोर्ट बनेगा। हाई कोर्ट में लालू यादव की याचिका पर जल्द सुनवाई की उम्मीद जताई जा रही है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद इस मामले की दिशा तय होगी। इस दौरान दोनों पक्षों की दलीलें और अदालत के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

सीबीआई और लालू यादव के वकील इस मामले में अपने-अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। इस केस का न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक प्रभाव भी होगा, और यह भविष्य में भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

लालू यादव से जुड़े ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला उनके लिए एक बड़ा झटका है। हालांकि, उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने से राहत मिली है, लेकिन ट्रायल का सामना करना अब अनिवार्य होगा। इस मामले के राजनीतिक और कानूनी परिणाम काफी दूरगामी हो सकते हैं। सभी की नजरें अब दिल्ली हाई कोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस मामले की जल्द सुनवाई होने की संभावना है।

लालू यादव के खिलाफ इस मामले का फैसला उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत आगे इस मामले को कैसे आगे बढ़ाती है।

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