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रेलवे बोर्ड ने सुरक्षित और निर्बाध रेल परिचालन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए

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भारत सरकार के रेलवे बोर्ड ने हाल ही में सभी रेलवे जोनों को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है, जिसमें रेल परिचालन को सुरक्षित और निर्बाध बनाने के लिए सिग्नल और दूरसंचार केबलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया गया है। रेलवे बोर्ड ने बताया कि बुनियादी ढांचे के कामों के दौरान इन केबलों का नुकसान रेल परिचालन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, और इसके नतीजे विनाशकारी हो सकते हैं।

सिग्नल और दूरसंचार केबलों की महत्वता

सिग्नल और दूरसंचार केबलें रेल परिचालन के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। ये केबलें ट्रेन के संचालन और सुरक्षा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी का आदान-प्रदान करती हैं। इन केबलों के क्षतिग्रस्त होने से सिग्नल फेल हो सकते हैं, जिसके कारण ट्रेनों का संचालन बाधित हो सकता है। यह न केवल ट्रेन की गति में रुकावट डालता है, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न कर सकता है। इसलिए, रेलवे बोर्ड ने सभी जोनों को सिग्नल और दूरसंचार केबलों के नुकसान से बचने के लिए सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

केबल क्षति के कारण परिचालन में बाधाएं

रेलवे बोर्ड ने पत्र में यह स्पष्ट किया कि बार-बार सिग्नल फेल होने के कारण ट्रेन सेवाओं की सुरक्षा और विश्वसनीयता को गंभीर खतरा हो सकता है। यदि पर्याप्त सावधानी नहीं बरती जाती, तो इसके परिणाम बहुत ही भयावह हो सकते हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि रेलवे पटरियों के किनारे सिग्नल और दूरसंचार केबलों की सुरक्षा के लिए समय-समय पर सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद केबल कटने और क्षतिग्रस्त होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े कार्यों का महत्व

रेलवे बोर्ड के पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान में विभिन्न जोनों में बुनियादी ढांचे के कई महत्वपूर्ण काम चल रहे हैं, जैसे ट्रैक का दोहरीकरण, यार्ड रिमॉडलिंग, चारदीवारी निर्माण, एलएचएस (सीमित ऊंचाई वाले सबवे), एबीएस (स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग) और कवच (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली) की स्थापना। इन कामों के दौरान सिग्नल और दूरसंचार केबलों के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में रेलवे अधिकारियों को इन कामों को अत्यधिक सावधानी से करने की आवश्यकता है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

केबल नुकसान को रोकने के उपाय

रेलवे बोर्ड ने केबलों के नुकसान को रोकने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इनमें प्रमुख सुझाव यह है कि खुदाई का काम शुरू करने से पहले यूटिलिटी केबलों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। इसके अलावा, ट्रैक के पास या उसके किनारे कोई भी काम शुरू करने से पहले विभिन्न विभागों के बीच उचित समन्वय होना चाहिए। एकीकृत केबल रूट प्लान का पालन करना भी जरूरी है, जो पहले ही सभी जोनों को भेज दिया गया है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि 2023 में सभी जोनों को कई बार लिखित निर्देश दिए गए थे, जिनमें बताया गया था कि बुनियादी ढांचा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले क्या एहतियाती कदम उठाने होंगे।

निर्देशों का पालन न करने पर चिंता

बोर्ड ने यह भी चिंता जताई कि कई अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप सिग्नल केबलों के क्षतिग्रस्त होने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। रेलवे बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश मंडलों में बुनियादी ढांचे के कामों में कवच प्रणाली की स्थापना, ट्रैक का दोहरीकरण, और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणालियों की स्थापना का कार्य चल रहा है। ऐसे में अधिकारियों को और भी अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि कोई भी क्षति न हो।

सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए

रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि यह समझा जा सकता है कि नियमित ट्रेन संचालन के साथ बुनियादी ढांचे का काम जारी रखना एक बड़ी चुनौती है। फिर भी, रेलवे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के कामों के लिए पर्याप्त निर्देश और सुरक्षा उपाय पहले ही उपलब्ध हैं, और अधिकारियों को इनका पालन करना अनिवार्य है। किसी भी प्रकार के शॉर्टकट अपनाने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जो रेलवे के परिचालन और सुरक्षा दोनों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

रेलवे बोर्ड द्वारा सभी जोनों को भेजा गया यह पत्र एक महत्वपूर्ण कदम है, जो रेलवे परिचालन की सुरक्षा और विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है। सिग्नल और दूरसंचार केबलों के संरक्षण पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, खासकर जब बुनियादी ढांचा निर्माण और अन्य बड़े कार्य चल रहे हों। रेलवे अधिकारियों को इन कार्यों को सावधानीपूर्वक और पूरी सतर्कता के साथ पूरा करने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्रकार की विफलता या दुर्घटना से बचा जा सके।

रेलवे बोर्ड ने सुरक्षा के लिए जो दिशा-निर्देश जारी किए हैं, उनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि भारतीय रेलवे के संचालन में कोई भी व्यवधान न आए और यात्री यात्रा के दौरान पूरी तरह से सुरक्षित रहें।

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