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चिराग पासवान की एलजेपी (राम विलास) ने 29 उम्मीदवारों का ऐलान किया, एनडीए सहयोगियों में असंतोष

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के तहत सीटों के बंटवारे के बाद अब ध्यान उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया पर केंद्रित हो गया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) [एलजेपी (आरवी)], जिसे गठबंधन में 29 सीटें मिली हैं, अब अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के अंतिम चरण में है। हालांकि, गठबंधन में माहौल काफी तनावपूर्ण नजर आ रहा है। सोमवार को होने वाली एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को आखिरी वक्त में स्थगित कर दिया गया। इसके पीछे की वजह को लेकर कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह स्थगन सीटों के वितरण को लेकर गठबंधन के अंदर की असहमतियों के कारण हुआ है।

एनडीए सीट-बंटवारा और एलजेपी(आरवी) की रणनीति

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीटों का बंटवारा एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कुल 243 सीटों के बंटवारे के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) और जनता दल (यूनाइटेड) [जद(यू)] को 101-101 सीटें दी गई हैं, जबकि छोटे सहयोगियों के बीच शेष 41 सीटें बांटी गई हैं। एलजेपी(आरवी) को 29 सीटें मिली हैं, जबकि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) को 6-6 सीटें दी गई हैं।

सूत्रों का कहना है कि चिराग पासवान अपनी उम्मीदवारों की सूची में जातीय संतुलन और युवा चेहरों को तरजीह दे रहे हैं। इसके अलावा, कई प्रमुख उम्मीदवारों के नाम भी इस सूची में शामिल किए गए हैं, जो स्थानीय प्रभावशाली नेताओं के परिवारों से संबंधित हैं। यह रणनीति एलजेपी(आरवी) को चुनावी मुकाबले में मजबूत स्थिति में लाने के लिए बनाई गई है।

एलजेपी(आरवी) के संभावित उम्मीदवार

एलजेपी(आरवी) की सूची में उन उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जो स्थानीय राजनीति में प्रभावशाली रहे हैं। इसके कुछ प्रमुख उम्मीदवारों के नाम इस प्रकार हैं:

  • मधौरा: सैफ अली खान (आयूब खान के बेटे)

  • ब्रह्मपुर: हुलास पांडे (पूर्व विधायक सुनील पांडे के भाई)

  • साहेबपुर कमल: सुरेन्द्र विवेक

  • लालगंज: रामा सिंह या श्वेता सिंह (रामा सिंह या उनकी बेटी)

  • मोरवा: अभय सिंह

  • सिमरी बख्तियारपुर: संजय सिंह

  • राजापकड़: मृणाल पासवान का बेटा

  • गाय  घाट: कोमल (सांसद वीणा देवी की बेटी)

  • दानापुर: रंधीर यादव (लालू यादव के साले सब्बाश यादव के बेटे)

  • फतुहा: अभिमन्यु यादव (रामकृपाल यादव के बेटे)

  • बखरी: संजय पासवान

  • अर्वल: सुनील यादव

  • मखदुमपुर: रानी चौधरी

  • आगिओं: ज्योति देवी

  • हयाघाट: शहनवाज अहमद कैफी

  • राजगीर: परशुराम पासवान

  • हिलसा: कुमारी दीपिका (रंजीत डॉन की पत्नी)

  • एकमा: कमेश्वर सिंह उर्फ मुन्ना

  • ओबरा: प्रकाश चंद्र

  • गया: श्याम देव पासवान

  • कदवा: विभूति पासवान

  • बलरामपुर: संगीता कुमारी

  • सोनबरसा: रीना पासवान

  • हिसुआ: धीरेंद्र मुन्ना

  • कसबा: शंकर झा बाबा

  • सुगौली: (नाम तय नहीं)

एलजेपी(आरवी) की यह सूची पार्टी के लिए एक रणनीतिक कदम है। इन उम्मीदवारों में से कई स्थानीय प्रभावशाली परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, जो पार्टी को अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत करने में मदद करेंगे।

एनडीए के छोटे सहयोगियों में असंतोष

एलजेपी(आरवी) के उम्मीदवारों के ऐलान से पहले ही गठबंधन के छोटे सहयोगियों में असंतोष देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा अपने पार्टी के लिए 6 सीटों के आवंटन से नाखुश हैं। उन्हें लगता है कि उनकी पार्टी को सीटों का बंटवारा कम मिला है और वह इस पर अपनी असंतुष्टि जता रहे हैं।

वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी ने सार्वजनिक तौर पर यह बयान दिया है कि उनकी पार्टी भले ही केवल 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन वह “हर हाल में” एनडीए के साथ रहेंगे। उनके इस बयान से किसी भी तरह की विद्रोह की अफवाहों को खारिज कर दिया गया।

इन असंतोषों के बावजूद, जीतन राम मांझी ने यह साफ किया कि वह एनडीए से बाहर जाने का कोई इरादा नहीं रखते हैं, और गठबंधन के साथ बने रहेंगे। यह उनके सहयोगियों के लिए एक राहत की बात थी क्योंकि एनडीए के अंदर की खींचतान के कारण गठबंधन के टूटने की आशंका थी।

एनडीए के लिए चुनौतियां और एलजेपी(आरवी) की भूमिका

एनडीए का सीट-बंटवारा और उम्मीदवार चयन का यह पूरा प्रक्रिया इस समय काफी संवेदनशील है। जबकि बीजेपी और जद(यू) को सीटों का बड़ा हिस्सा मिला है, छोटे सहयोगी इससे असंतुष्ट हैं। एलजेपी(आरवी) की स्थिति इस मामले में अलग है क्योंकि पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के चयन में जातीय संतुलन और युवा चेहरों पर ध्यान दिया है। चिराग पासवान की पार्टी चुनावी मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार है, और उनका लक्ष्य बिहार में अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूत करना है।

हालांकि, बिहार का राजनीतिक माहौल इस समय काफी उतार-चढ़ाव भरा है। गठबंधन में असंतोष और सीटों के वितरण पर विचार-विमर्श से यह संकेत मिलता है कि एनडीए को आगामी चुनावों में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। चिराग पासवान के लिए यह समय अपने सहयोगियों के बीच मतभेदों को सुलझाने और एलजेपी(आरवी) के लिए मजबूत स्थिति बनाने का है।

एनडीए का भविष्य और एलजेपी(आरवी) की चुनौती

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए समय निकट आ रहा है, एनडीए के सहयोगी दलों के बीच असहमति और सीट बंटवारे पर विवाद आगे बढ़ सकते हैं। चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी(आरवी) ने खुद को गठबंधन के अंदर एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। पार्टी के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सटीक चुनाव रणनीतियों पर काम करे।

एलजेपी(आरवी) का उम्मीदवार चयन उन क्षेत्रों में ताकतवर उम्मीदवारों को खड़ा करना है, जहां पार्टी की पहले से मजबूत स्थिति है। लेकिन, गठबंधन में असंतोष और सहयोगियों के बीच मतभेद एनडीए के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। इन असंतोषों को हल करना और पार्टी की प्राथमिकताओं के अनुरूप उम्मीदवारों का चयन करना चिराग पासवान की अगली बड़ी चुनौती होगी।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए का सीट बंटवारा और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया जारी है। एलजेपी(आरवी) ने अपनी 29 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय कर लिए हैं, लेकिन एनडीए के भीतर असंतोष की भावना बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि चिराग पासवान और उनके सहयोगी किस तरह से इन चुनौतियों का सामना करते हैं और चुनावी मैदान में अपनी स्थिति को मजबूत करते हैं। आगामी महीनों में राजनीतिक माहौल और सीट बंटवारे पर होने वाले विवाद एनडीए के भविष्य को निर्धारित करेंगे।

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