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जीविका दीदियों के लिए बड़ी पहल, 10 लाख तक का लोन 7 प्रतिशत ब्याज पर

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बिहार सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि राज्य की जीविका दीदियां जो बड़े स्तर पर रोजगार शुरू करना चाहती हैं, उन्हें बैंकों के माध्यम से दस लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस ऋण पर केवल सात प्रतिशत ब्याज लगेगा, जिससे महिलाओं पर आर्थिक बोझ कम होगा और वे आसानी से अपना व्यवसाय शुरू कर सकेंगी।

मंत्री ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को छोटे कामों तक सीमित रखना नहीं है। सरकार चाहती है कि महिलाएं बड़े स्तर पर स्वरोजगार और entrepreneurship की दिशा में आगे बढ़ें। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पहले आओ पहले पाओ के आधार पर मिलेगा लाभ

श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि इस योजना का लाभ पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा। जो महिलाएं समय पर आवेदन करेंगी और पात्रता की शर्तें पूरी करेंगी, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से पारदर्शिता बनी रहेगी और जरूरतमंद महिलाओं तक समय पर सहायता पहुंच सकेगी।

उन्होंने कहा कि कोई भी जीविका दीदी जो रोजगार शुरू करना चाहती है, उसे इस योजना के तहत सहयोग दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं इस योजना से जुड़ें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

बड़े रोजगार की ओर महिलाओं को प्रेरित करने की कोशिश

मंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं को केवल सीमित आजीविका तक नहीं देखना चाहती। उद्देश्य यह है कि महिलाएं बड़े व्यवसाय शुरू करें और अपने गांव तथा आसपास के क्षेत्रों में रोजगार देने वाली बनें। इस सोच के साथ सरकार ने महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता और बैंकिंग सहयोग को मजबूत किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है, जहां महिलाओं को संगठित कर रोजगार से जोड़ने की ठोस पहल की गई। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के नेतृत्व में जीविका जैसी योजनाओं के माध्यम से लाखों महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। इसका सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है।

महिला रोजगार योजना की राशि की हो रही समीक्षा

सरकार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दी गई प्रोत्साहन राशि की भी समीक्षा कर रही है। इस योजना के अंतर्गत पहले चरण में चयनित महिलाओं के खातों में दस हजार रुपये भेजे गए थे। इस राशि का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना था।

अब सरकार यह जांच कर रही है कि कितनी महिलाओं ने इस राशि का सही उपयोग कर वास्तव में काम शुरू किया है। जिन महिलाओं ने रोजगार शुरू कर लिया है, उन्हें आगे और सहायता दी जाएगी। ऐसे लाभार्थियों को दो लाख रुपये तक की अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी, ताकि वे अपने काम को आगे बढ़ा सकें।

काम शुरू करने वाली महिलाओं को मिलेगी अतिरिक्त मदद

सरकार का कहना है कि जो महिलाएं सच में काम कर रही हैं और व्यवसाय को आगे बढ़ाने की इच्छा रखती हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। अतिरिक्त राशि से महिलाएं अपने व्यवसाय के लिए जरूरी संसाधन, कच्चा माल और अन्य सुविधाएं जुटा सकेंगी।

अधिकारियों के अनुसार, जिलों से आंकड़े मंगाए जा रहे हैं ताकि सही लाभार्थियों की पहचान की जा सके। सरकार चाहती है कि सरकारी धन का उपयोग सही हाथों में हो और इससे स्थायी रोजगार सृजन हो।

लंबित मामलों का जल्द होगा समाधान

मंत्री श्रवण कुमार ने उन महिलाओं का भी जिक्र किया, जिनके खातों में अब तक दस हजार रुपये की राशि नहीं पहुंच पाई है। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में तकनीकी कारणों या दस्तावेजों की कमी के चलते भुगतान में देरी हुई है। सरकार ने ऐसे सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें पूरा करने में प्रशासन मदद करेगा। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। सरकार का दावा है कि कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित नहीं रहेगी।

महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार का फोकस

बिहार सरकार का मानना है कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सामाजिक और आर्थिक विकास की कुंजी है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं, तो इसका सकारात्मक असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। महिला उद्यमिता से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।

सरकार को उम्मीद है कि इस नई ऋण योजना से ग्रामीण महिलाओं में business mindset विकसित होगा। जीविका नेटवर्क के माध्यम से महिलाओं को बैंकों और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है, जिससे योजना का क्रियान्वयन आसान हो सके।

बैंकों की भूमिका रहेगी अहम

इस योजना के तहत बैंकों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण होगी। जीविका दीदियों को आसान प्रक्रिया के तहत ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार और बैंक मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ऋण का उपयोग सही उद्देश्य के लिए हो।

कम ब्याज दर के कारण महिलाओं पर कर्ज का दबाव कम रहेगा। सरकार का मानना है कि महिलाएं समय पर ऋण चुकाने में अनुशासित होती हैं, जिससे बैंकिंग व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

समय पर आवेदन करने की अपील

सरकार ने पात्र महिलाओं से अपील की है कि वे समय पर आवेदन करें। पहले आओ पहले पाओ के नियम के कारण देर करने पर अवसर छूट सकता है। स्थानीय स्तर पर जीविका कार्यकर्ता और अधिकारी महिलाओं को आवेदन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

सरकार को भरोसा है कि यह योजना बिहार में महिला उद्यमिता को नई दिशा देगी। सस्ती दर पर ऋण और निरंतर सरकारी सहयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और राज्य की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएंगी।

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