7 अक्टूबर 2025 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में एक भयावह लैंडस्लाइड ने एक प्राइवेट बस को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र की सबसे घातक सड़क दुर्घटनाओं में से एक घटित हुई। इस हादसे में अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं और एक बच्चा अब भी लापता बताया जा रहा है।
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घटना का विवरण
यह हादसा शाम लगभग 6:30 बजे बिलासपुर जिले के झंडूत्ता सबडिवीजन स्थित भल्लू ब्रिज के पास बालूघाट क्षेत्र में हुआ। कृष्णा ट्रांसपोर्ट द्वारा चलायी जा रही एक प्राइवेट बस, जो नियमित रूप से मरोटन से घुमारविन जा रही थी, भारी बारिश के कारण अचानक आई लैंडस्लाइड की चपेट में आ गई।
पहाड़ी क्षेत्र का मलबा बिना किसी चेतावनी के नीचे गिरने लगा, और यह बस पर आ गिरा। मलबे के साथ भारी पत्थर, बोल्डर और मिट्टी बस के ऊपर आ गिरी, जिससे बस पूरी तरह से कुचल गई और उसमें सवार यात्री अपनी सीटों पर ही दब गए।
मृतक और बचाव कार्य
अब तक इस दुर्घटना में 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें बस चालक और कंडक्टर भी शामिल हैं। मृतकों में 9 पुरुष, 4 महिलाएं और 2 बच्चे हैं। दुखद यह है कि मृतकों में एक ही परिवार के चार सदस्य भी शामिल हैं – एक मां और उनके दो बच्चे, साथ ही उनकी एक चाची भी।
बचाव कार्यों के दौरान तीन लोग मलबे से सुरक्षित निकाले गए, जिनमें 10 साल की अरुषी और 8 साल का शौर्य (कुछ रिपोर्ट्स में शौर्य को 5 साल का बताया गया है) शामिल हैं। ये दोनों बच्चे बस की आखिरी सीट पर बैठे थे। इन्हें तुरंत AIIMS बिलासपुर अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया, और अब दोनों को छुट्टी मिल चुकी है।
रात भर और अगले दिन सुबह तक बचाव कार्य जारी रहे। JCB खुदाई मशीनों का उपयोग मलबे को हटाने के लिए किया गया। बुधवार सुबह लगभग 10:00 बजे लापता एक बच्चे का शव बरामद किया गया, जिसके बाद खोज और बचाव कार्यों को समाप्त कर दिया गया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और राहत उपाय
इस दुखद घटना के बाद तत्काल प्रशासनिक प्रतिक्रिया हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से ₹2 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा की, और घायलों को ₹50,000 की राहत दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बचाव कार्यों की निगरानी की और अधिकारियों को राहत प्रयासों को तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद प्रदान करेगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी शोक व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की।
बचाव कार्य में चुनौतियां
बचाव कार्य में भारी बारिश के कारण कई चुनौतियाँ आईं। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण भारी मशीनरी जैसे JCBs को मलबा हटाने के लिए तैनात किया गया, लेकिन सुरक्षा कारणों से रात 2:30 बजे कार्य अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, क्योंकि भारी बारिश और आगे के लैंडस्लाइड का खतरा था।
स्थानीय निवासियों और पुलिस ने पहले मैन्युअल रूप से बचाव कार्यों की कोशिश की, लेकिन भारी मशीनरी की तैनाती लगभग 30 मिनट बाद हुई। कुछ अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने देरी से प्रतिक्रिया देने की आलोचना की, उनका कहना था कि अगर JCBs को पहले ही तैनात कर दिया गया होता तो कई और जानें बच सकती थीं, क्योंकि कई मृतकों की मौत शारीरिक चोटों से नहीं, बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी।
घटना के कारण और वर्तमान चिंताएं
यह हादसा भारी मॉनसून बारिश के दौरान हुआ, जो पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में हो रही थी। 7 अक्टूबर को बिलासपुर जिले में 12.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उसी पहाड़ी क्षेत्र से दो दिन पहले मलबा गिरा था, लेकिन इसके बावजूद कोई चेतावनी नहीं दी गई और न ही कोई सुरक्षा उपाय किए गए थे।
कुछ स्थानीय लोगों ने इलाके में अवैध खनन गतिविधियों का आरोप भी लगाया है, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। यह क्षेत्र बारिश के दौरान लैंडस्लाइड के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, और हिमाचल प्रदेश में जून से लेकर अब तक बारिश से संबंधित घटनाओं में 470 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।
व्यापक संदर्भ और भविष्य की चुनौती
यह घटना उत्तरी भारत में हो रहे अन्य मॉनसून संबंधित आपदाओं का हिस्सा है। यह हादसा पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है, जहां लैंडस्लाइड सड़क यातायात और स्थानीय समुदायों के लिए लगातार खतरा बनते हैं।
बिलासपुर की बस दुर्घटना पहाड़ी समुदायों की प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को एक कड़ा स्मरण कराती है। यह भी दर्शाता है कि लैंडस्लाइड-प्रवण क्षेत्रों में बेहतर चेतावनी प्रणालियाँ और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
बिलासपुर में हुआ यह हादसा पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि सरकार और संबंधित विभाग लैंडस्लाइड से बचने के लिए प्रभावी चेतावनी प्रणालियाँ विकसित करें और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दें।
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