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बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम 2025 : पश्चिमी चंपारण जिले के 9 सीटों में 7 पर NDA की जीत

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में पश्चिमी चंपारण जिले की नौ विधानसभा सीटों में से सात पर एनडीए ने जीत दर्ज की है। महागठबंधन को जिले से केवल दो सीटों पर सफलता मिली। पिछली विधानसभा चुनावों के मुकाबले इस बार एनडीए ने अपने प्रदर्शन में और सुधार किया है। 2020 में भी एनडीए ने आठ सीटों पर विजय प्राप्त की थी, जबकि महागठबंधन को एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा था। इस बार भाजपा ने छह सीटों पर जीत हासिल की, जबकि जदयू को एक सीट मिली। वहीं, कांग्रेस को दो सीटों पर विजय प्राप्त हुई।

पश्चिमी चंपारण सीटों पर एनडीए की बढ़त

पश्चिमी चंपारण के बेतिया विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की रेणु देवी ने कांग्रेस के वसी अहमद को 22,373 वोटों के अंतर से हराया। रेणु देवी को कुल 91,907 वोट मिले, जबकि वसी अहमद को 69,534 वोट मिले। वहीं, तीसरे स्थान पर मेयर गरिमा देवी सिकरिया के पति रोहित कुमार शिकारिया रहे, जिनके पास 24,665 वोट थे।

नौतन विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पूर्व मंत्री नारायण प्रसाद ने कांग्रेस के अमित कुमार को 22,072 वोटों से हराया। नारायण प्रसाद को 101,952 वोट मिले, जबकि अमित कुमार को 79,880 वोट मिले।

लौरिया विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विनय बिहारी ने विकासशील इंसाफ पार्टी (VIP) के रण कौशल प्रताप सिंह को 26,966 वोटों के अंतर से हराया। विनय बिहारी को कुल 96,510 वोट मिले, जबकि रण कौशल को 69,544 वोट मिले।

नरकटियागंज विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के संजय कुमार पांडे ने 26,458 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। संजय कुमार को 1,00,044 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी आरजेडी के दीपक यादव को 73,586 वोट मिले।

रामनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के नंदकिशोर राम ने आरजेडी के सुबोध पासवान को 35,680 वोटों से हराया। नंदकिशोर राम को 1,15,214 वोट मिले, जबकि सुबोध पासवान को 79,534 वोट मिले।

सिकटा सीट पर उलटफेर

सिकटा विधानसभा सीट पर इस बार काफी उलटफेर हुआ। यहां महागठबंधन के वर्तमान विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता तीसरे स्थान पर रहे, जिनके पास 37,252 वोट थे। इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के समृद्ध वर्मा ने 97,173 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की। समृद्ध वर्मा के निकटतम प्रतिद्वंदी निर्दलीय खुर्शीद आलम को केवल 50,029 वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे।

चनपटिया में कांटे की टक्कर

चनपटिया विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के अभिषेक रंजन ने भाजपा के उमाकांत सिंह को महज 602 वोटों से हराया। अभिषेक रंजन को कुल 87,538 वोट मिले, जबकि उमाकांत सिंह को 86,936 वोट मिले। यह चुनाव परिणाम कई राउंड तक काफी करीबी रहा था, लेकिन अंत में कांग्रेस ने बाजी मारी।

वाल्मीकिनगर में भी कांटे की टक्कर देखने को मिली, जहां कांग्रेस के सुरेंद्र प्रसाद ने जदयू के धीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ रिंकू सिंह को 1,675 वोटों से हराया। सुरेंद्र प्रसाद को कुल 1,07,730 वोट मिले, जबकि धीरेंद्र प्रताप सिंह को 1,06,055 वोट मिले।

मतगणना के दौरान रुझान और अपडेट्स

सुबह 10:20 बजे के बाद पांचवे चरण की मतगणना में बगहा से राम सिंह भाजपा के पक्ष में 1,904 वोटों से आगे थे। वहीं, सिकटा से समृद्ध वर्मा जदयू के उम्मीदवार 8,039 वोटों से आगे थे। रामनगर में भाजपा के नंदकिशोर राम 5,173 वोटों से आगे थे, जबकि वाल्मीकिनगर से रिंकू सिंह जदयू 2,385 वोटों से आगे थे।

सुबह 9:40 बजे तक, चनपटिया से अभिषेक रंजन कांग्रेस के उम्मीदवार 1,810 वोटों से आगे थे, जबकि बेतिया से वशी अहमद कांग्रेस के उम्मीदवार 1,570 वोटों से पीछे थे।

एनडीए की प्रचंड जीत और महागठबंधन का पराजय

एनडीए की शानदार जीत से यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा और जदयू का गठबंधन पश्चिमी चंपारण में अभी भी मजबूत स्थिति में है। भाजपा के प्रमुख उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिससे यह साबित होता है कि इस क्षेत्र में एनडीए का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

महागठबंधन के उम्मीदवारों के लिए यह चुनाव निराशाजनक साबित हुआ। पश्चिमी चंपारण जिले में महागठबंधन केवल दो सीटों पर ही सीमित रह गया। कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत दर्ज की, लेकिन यह सफलता महागठबंधन के लिए संजीवनी का काम नहीं कर सकी।

एनडीए के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण संकेत

एनडीए की इस जीत से यह साबित होता है कि बिहार में एनडीए की पकड़ अब पहले से भी मजबूत हो गई है। यह जीत भाजपा और जदयू के बीच के गठबंधन को और भी सशक्त करती है। भाजपा के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि पार्टी का प्रभाव अब बिहार में बढ़ चुका है, और यह 2025 के चुनाव परिणाम के बाद एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है।

महागठबंधन की रणनीति पर पुनर्विचार जरूरी

महागठबंधन के लिए यह परिणाम निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है। पार्टी को अब अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा और 2025 के चुनाव परिणामों से सबक लेना होगा। खासकर आरजेडी और कांग्रेस को अपनी कार्यशैली और नेतृत्व की समीक्षा करनी होगी।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव ने पश्चिमी चंपारण में एनडीए की सत्ता की मजबूत स्थिति को स्पष्ट किया है। यह चुनाव परिणाम न केवल राज्य की राजनीति में बदलाव का संकेत दे रहे हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि एनडीए की नेतृत्व में राज्य में राजनीतिक परिपक्वता आ चुकी है। महागठबंधन को इस हार से कई पाठ सीखने होंगे और अपनी रणनीतियों को नया रूप देना होगा।

एनडीए की इस जीत से यह साफ हो गया है कि बिहार की राजनीति में अब बदलाव का दौर शुरू हो चुका है।

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