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बिहार में Exit Poll: कब चूके, कब लगे सटीक – सनसनीखेज विश्लेषण

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KKN ब्यूरो। बिहार की राजनीति ने एक बार फिर देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 11 नवंबर 2025 को दूसरे चरण की वोटिंग समाप्त होने के बाद जारी हुए Exit Poll के अनुमानों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। लेकिन क्या बिहार में Exit Poll पर भरोसा किया जा सकता है? पिछले चार विधानसभा चुनावों का गहन विश्लेषण करने पर एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आती है – बिहार का मतदाता “साइलेंट” है और उसे समझना बड़े-बड़े सर्वे एजेंसियों के बस की बात नहीं।​

NDTV के प्रख्यात psephologist प्रणव रॉय के अध्ययन के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में बिहार में Exit Poll की सटीकता महज 71% रही है, जो राष्ट्रीय औसत 79% से काफी कम है। यह आंकड़ा बिहार की जटिल जाति समीकरण, अविकसित अर्थव्यवस्था और मतदाताओं की अप्रत्याशित व्यवहार को दर्शाता है।​

2020: Exit Poll की सबसे बड़ी विफलता

2020 का विधानसभा चुनाव बिहार में Exit Poll के इतिहास का सबसे काला अध्याय साबित हुआ। 11 में से 10 सर्वे एजेंसियों ने महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविकता बिल्कुल उलटी निकली।​

Today’s Chanakya की सबसे बड़ी भूल: सबसे चौंकाने वाला अनुमान Today’s Chanakya का था, जिसने महागठबंधन को 180 सीटें और NDA को महज 55 सीटें दी थीं। लेकिन वास्तविक परिणामों में NDA ने 125 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि महागठबंधन 110 सीटों पर सिमट गया। यह 125 सीटों की भयंकर गलती थी – एक ऐसी भूल जो चुनाव पूर्वानुमान के इतिहास में दर्ज हो गई।​​

 

बिहार 2020 में Exit Poll की सटीकता – ज्यादातर एजेंसियां गलत साबित हुईं

India Today-Axis My India भी चूक गया: इस एजेंसी ने महागठबंधन को 139-161 सीटें और NDA को 69-91 सीटें देने का अनुमान लगाया था। यह भी पूरी तरह गलत साबित हुआ। Times Now-C Voter ने त्रिशंकु विधानसभा का अनुमान लगाया था – महागठबंधन को 120 और NDA को 116 सीटें।​

एकमात्र सही अनुमान: इस चुनाव में केवल Dainik Bhaskar का Exit Poll सटीक साबित हुआ, जिसने NDA को 120-127 सीटें और महागठबंधन को 95-102 सीटें दी थीं। औसतन, 2020 के Exit Polls ने NDA की ताकत को 17 सीटों से कम और महागठबंधन की ताकत को 15 सीटों से ज्यादा आंका था।​

2015: लालू-नीतीश के तूफान को आंशिक रूप से पकड़ पाए Exit Poll

2015 का चुनाव ऐतिहासिक था क्योंकि कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने हाथ मिलाया था। छह Exit Polls ने करीबी मुकाबले का अनुमान लगाया था – महागठबंधन को औसतन 123 सीटें और NDA को 114 सीटें। लेकिन जब नतीजे आए तो महागठबंधन ने 178 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया, जबकि NDA महज 58 सीटों पर सिमट गई।​

 

बिहार 2015 में Exit Poll – CNN IBN-Axis सबसे सटीक, Today’s Chanakya पूरी तरह गलत

CNN IBN-Axis सबसे सटीक: इस चुनाव में सबसे करीबी अनुमान CNN IBN-Axis का रहा, जिसने महागठबंधन को 169-183 सीटें (औसत 176) और NDA को 58-70 सीटें (औसत 64) दी थीं। यह वास्तविक परिणाम – महागठबंधन 178, NDA 58 – के बेहद करीब था।​

Today’s Chanakya फिर गलत: 2015 में भी Today’s Chanakya पूरी तरह चूक गया और NDA को 155 सीटों की जीत का अनुमान लगाया था, जबकि NDA को केवल 58 सीटें मिलीं। सामूहिक रूप से, Exit Polls ने महागठबंधन की ताकत को 55 सीटों से कम और NDA की ताकत को 56 सीटों से ज्यादा आंका था।​

ABP-Nielsen और News X-CNX आंशिक रूप से सही: ABP-Nielsen ने महागठबंधन को 130 सीटें और NDA को 108 सीटें दी थीं, जबकि News X-CNX ने महागठबंधन को 130-140 और NDA को 90-100 सीटों का अनुमान लगाया था। दोनों ने विजेता का सही अनुमान लगाया लेकिन जीत के पैमाने को समझने में नाकाम रहे।​

2010: जीत तो सही बताई, लेकिन “सुनामी” को मिस कर गए

2010 का चुनाव नीतीश कुमार के “सुशासन बाबू” इमेज का चरम था। सभी Exit Polls ने NDA की जीत का सही अनुमान लगाया था, लेकिन जीत के विशाल पैमाने को समझने में विफल रहे।​

Star News-Nielsen ने NDA को 170 सीटें दी थीं, जबकि वास्तविक परिणाम में NDA ने 206 सीटों पर भूस्खलन जीत हासिल की। यह एकतरफा मुकाबला था। IBN-Week ने तो NDA को केवल 110-122 सीटों का अनुमान लगाया था, जो वास्तविकता से बहुत दूर था।​

नतीजा यह रहा कि Exit Polls ने विजेता तो सही बताया, लेकिन नीतीश कुमार की ऐतिहासिक जीत के असली आयाम को पकड़ने में असफल रहे। RJD-LJP गठबंधन को 34-89 सीटों के बीच अनुमान लगाए गए थे, लेकिन वास्तव में वे लगभग खत्म हो गए।​

2005 और 2000: अनिश्चितता का दौर

2005 के फरवरी चुनाव में Exit Polls ने मिश्रित संकेत दिए थे। Zee TV ने RJD गठबंधन को 100 सीटें और JD(U)-BJP को 93 सीटें दी थीं। वास्तविक परिणाम में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और त्रिशंकु विधानसभा बनी, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा।​

2000 के चुनाव में Exit Polls ने NDA की व्यापक जीत का अनुमान लगाया था और RJD को “डूबता जहाज” बताया था। लेकिन बिहार के मतदाताओं की अन्य योजनाएं थीं। लालू प्रसाद यादव की सांप्रदायिकता विरोधी राजनीति ने काम किया और फिर से त्रिशंकु सदन बना।​

2025: फिर से एक बार NDA की भविष्यवाणी, लेकिन क्या सही होगी?

11 नवंबर 2025 को जारी Exit Polls में से 11 एजेंसियों ने NDA की स्पष्ट जीत का अनुमान लगाया है, जबकि केवल Axis My India ने करीबी मुकाबले की भविष्यवाणी की है।​

सबसे ज्यादा सीटों का अनुमान:

  • Kamakhya Analytics: NDA को 167-187 सीटें​
  • Today’s Chanakya: NDA को 148-172 (औसत 160) सीटें​​
  • CNX: NDA को 150-170 सीटें​

सबसे कम सीटों का अनुमान:

  • Axis My India: NDA को 121-141 सीटें, महागठबंधन को 98-118 सीटें​

यह अनुमान चौंकाने वाला है क्योंकि Axis My India ने NDA को बहुमत के आंकड़े (122) से नीचे भी जा सकने की संभावना जताई है। वोट शेयर में भी महज 2% का अंतर (NDA 43%, महागठबंधन 41%) बताया गया है।​

NDTV Poll of Polls: सभी Exit Polls का औसत बताता है कि NDA को 146 सीटें और महागठबंधन को 92 सीटें मिल सकती हैं।​

प्रशांत किशोर की जन सुराज: लगभग सभी Exit Polls ने प्रशांत किशोर की नई पार्टी जन सुराज को 0-2 सीटें दी हैं, जो उनकी महत्वाकांक्षाओं के लिए बड़ा झटका होगा।​

Exit Poll क्यों चूकते हैं बिहार में?

  1. साइलेंट वोटर्स का प्रभुत्व:बिहार का मतदाता अपनी राय छुपाने में माहिर है। India TV की रिपोर्ट के अनुसार, “बिहार का मतदाता बहुत ‘साइलेंट’ है। उसको समझना बड़े-बड़े pollsters के बस की बात नहीं है”।​
  2. जटिल जाति समीकरण:2022 की बिहार जाति जनगणना से पता चला कि राज्य की60% से अधिक जनसंख्या पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्गों से है। 36% अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC), 27.1% पिछड़ा वर्ग (OBC), 19.7% अनुसूचित जाति, और केवल 15.5% सामान्य वर्ग। यह जटिल जाति गणित Exit Polls के लिए चुनौती बन जाता है।​
  3. अंतिम समय में बदलाव:बिहार में मतदाता अंतिम समय तक अपना मन बदलते रहते हैं। 2020 में 40 सीटों पर जीत का अंतर2% से कम था, जो Exit Polls के लिए सटीक अनुमान लगाना मुश्किल बना देता है।​
  4. सैंपलिंग की समस्याएं:Exit Poll एजेंसियां आमतौर पर कुछ हजार से लेकर कुछ लाख मतदाताओं का सर्वे करती हैं। 2015 में NDTV ने76,000 मतदाताओं का सर्वे किया था, लेकिन फिर भी गलत अनुमान लगाया। India TV-Matrize ने 2025 में 66,087 मतदाताओं का सर्वे किया, लेकिन क्या यह पर्याप्त होगा?​
  5. महिला मतदाताओं का रुझान:2025 के चुनाव मेंमहिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक रही। कई विशेषज्ञों का मानना है कि महिला मतदाता “साइलेंट वोटर” हैं जिनका रुझान Exit Polls पकड़ नहीं पाते।​​
  6. प्रवासी मतदाताओं की वापसी:छठ पर्व के दौरान लाखों प्रवासी मजदूर बिहार लौटे और मतदान किया। कुछ जगहों पर उन्हें मुफ्त यात्रा और आतिथ्य दिया गया, जिसने मतदान पैटर्न को प्रभावित किया।​​

ऐतिहासिक डेटा: क्या कहती हैं संख्याएं?

Prannoy Roy के शोध के अनुसार, 1990 से 2020 तक बिहार में Exit Polls की सटीकता 71% रही है। यह भारत के अन्य राज्यों की तुलना में मध्यम स्तर की सटीकता है – कुछ राज्यों में यह 90% तक है, जबकि कुछ में 60% या उससे कम।​

रिकॉर्ड मतदान का इतिहास: ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि जब भी मतदान 60% से ज्यादा हुआ है, लालू प्रसाद यादव को फायदा मिला है, जबकि 60% से कम मतदान पर नीतीश कुमार की वापसी हुई है। 2025 में दोनों चरणों में मिलाकर 66.90% मतदान हुआ है, जो 2020 की तुलना में 9.6% अधिक है।​​

तेजस्वी यादव ने Exit Polls को किया खारिज

महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने Exit Polls को खारिज करते हुए दावा किया है कि “बिहार में महागठबंधन की 1995 से भी बड़ी जीत होगी” और वे “18 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे”। उन्होंने सर्वे करने वालों के सैंपल साइज पर सवाल उठाया और कहा कि “72 लाख से ज्यादा वोट ‘वोट फॉर चेंज’ के नाम पर पड़े हैं”।​

RJD नेता ने कहा, “Exit polls गलत साबित होंगे। जनता ने रोजगार, शिक्षा और बेहतर शासन के लिए वोट किया है”। Congress ने भी सावधानी बरतते हुए कहा, “Let’s wait for real results”।​

NDA का आत्मविश्वास

दूसरी ओर, NDA नेता Exit Polls के परिणामों से उत्साहित हैं। पूर्व डिप्टी CM और BJP उम्मीदवार तारकिशोर प्रसाद ने कहा, “ये Exit Polls आश्चर्यजनक नहीं हैं क्योंकि CM नीतीश कुमार ने 2005 से बिहार को बदल दिया है”। Union Minister Giriraj Singh ने तो यहां तक दावा किया कि “NDA 2010 से भी ज्यादा सीटें जीतेगी”।​

BJP MP Dinesh Sharma ने कहा, “बिहार से Congress और RJD की सफाई शुरू हो गई है। इस बार के नतीजे सबसे आश्चर्यजनक होंगे”।​

14 नवंबर: सच का दिन

अब सभी की नजरें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब वोटों की गिनती होगी। क्या Exit Polls इस बार सही साबित होंगे? क्या NDA फिर से सत्ता में लौटेगा? या फिर 2020 और 2015 की तरह Exit Polls फिर से गलत साबित होंगे और बिहार की राजनीति में एक बार फिर उलटफेर होगा?

बिहार के इतिहास ने बार-बार साबित किया है कि यहां का मतदाता अप्रत्याशित है। Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, “Exit polls serve as useful indicators, but the tendency to oversimplify complex electoral sentiments may lead to surprising outcomes”।​

NDTV के प्रणव रॉय ने 2015 में गलत अनुमान के लिए माफी मांगते हुए कहा था: “The last time we made an error as big as this was 32 years ago”। उन्होंने स्वीकार किया कि विश्वसनीय एजेंसी का डेटा भी गलत हो सकता है।​

The Week पत्रिका ने सही कहा है: “Exit polls can actually go wrong, and in Bihar, it has always proven to be unreliable”। 2020 में Dainik Bhaskar और 2015 में Axis जैसे अपवादों को छोड़ दें तो बिहार के चुनावी नतीजों ने अधिकतर बार Exit Polls को गलत साबित किया है।​

Exit Poll – एक संकेत, अंतिम सत्य नहीं

बिहार में Exit Poll का इतिहास हमें यह सिखाता है कि इन्हें संकेतक के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम सत्य के रूप में। पिछले 20 वर्षों में Exit Polls ने जितनी बार सही अनुमान लगाया, उतनी ही बार वे गलत भी साबित हुए हैं।

71% सटीकता का मतलब है कि 10 में से लगभग 3 बार बिहार में Exit Polls गलत होते हैं। 2025 का चुनाव भी इसका अपवाद साबित हो सकता है। रिकॉर्ड मतदान, महिला वोटरों का उछाल, ECI के विवादास्पद SIR अभ्यास, और जाति समीकरणों में बदलाव – ये सभी कारक 14 नवंबर को एक बड़ा सरप्राइज दे सकते हैं।​

जैसा कि एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, “Bihar’s silent voter outsmarts pollsters time and again”। अब देखना यह है कि 2025 में क्या होता है – क्या Exit Polls सही साबित होंगे या बिहार एक बार फिर सबको चौंका देगा?

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