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नेपाल संकट: प्रदर्शन की आग में PM KP Oli का इस्तीफा

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नेपाल में राजनीतिक उथल-पुथल गहराती जा रही है। सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध अब बड़े विद्रोह में बदल चुका है। राजधानी काठमांडू की सड़कों पर तीन दिनों से लगातार बवाल मचा हुआ है। इसी बीच हालात बेकाबू होते देख प्रधानमंत्री KP Oli ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा नेपाल की राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

पीएम KP Oli का इस्तीफा

मंगलवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गए और वहां घुसने की कोशिश की। हालात बिगड़ते देख Oli ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। पहले चर्चा थी कि Oli इस्तीफे के तुरंत बाद देश छोड़ देंगे, लेकिन फिलहाल वह नेपाल में ही मौजूद हैं। लगातार जारी हिंसा और विद्रोह की लहर ने उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया।

सोशल मीडिया बैन से उपजा विद्रोह

नेपाल में आंदोलन की शुरुआत सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाने से हुई। पहले दिन लोग केवल इसी फैसले का विरोध कर रहे थे। हालांकि, जब यह बैन हटा तो आंदोलन का फोकस बदल गया और गुस्सा सीधे Oli सरकार पर टूट पड़ा। सोशल मीडिया से उपजा यह असंतोष जल्द ही संवैधानिक संकट में बदल गया।

काठमांडू की सड़कों पर हिंसा

राजधानी काठमांडू में मंगलवार को हिंसा अपने चरम पर थी। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति के निजी आवास और प्रधानमंत्री KP Oli के घर में आग लगा दी। कुछ मंत्रियों के घरों में भी तोड़फोड़ हुई। वित्त मंत्री पर तो प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर हमला कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि कई मंत्रियों को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित निकाला गया।

जान गंवाने वालों की संख्या बढ़ी

सोमवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव में 19 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद गुस्से से भरी भीड़ और हिंसक हो गई। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के आवास को जलाने से लेकर मंत्रियों को बंधक बनाने तक हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। यह विद्रोह केवल काठमांडू तक सीमित नहीं रहा बल्कि नेपाल के कई हिस्सों में फैल गया।

Gen Z का गुस्सा

इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसमें बड़ी संख्या में Gen Z शामिल है। हजारों युवा हाथों में पत्थर और लाठी लेकर सड़कों पर उतरे। उनका जोश और आक्रोश इतना था कि पुलिस भी उन्हें काबू करने में नाकाम दिखी। यह स्पष्ट है कि नेपाल की नई पीढ़ी अब राजनीतिक बदलाव चाहती है और वह इसे हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

सेना ने संभाली कमान

Oli के इस्तीफे के बाद हालात संभालने के लिए सेना मैदान में उतर आई है। मंगलवार शाम सेना की ओर से बयान जारी कर लोगों से शांति की अपील की गई। राजधानी और अन्य संवेदनशील इलाकों में सेना की तैनाती की गई है। जब तक अंतरिम सरकार का गठन नहीं हो जाता, नेपाल की कमान सेना के हाथों में ही रहेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरे दिन भी नेपाल की सड़कों पर शांति लौटना मुश्किल है।

अंतरराष्ट्रीय चिंता

नेपाल की मौजूदा स्थिति पर पड़ोसी देशों की नजर बनी हुई है। राजनीतिक अस्थिरता का असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ सकता है। कई देशों ने अपने नागरिकों को काठमांडू और हिंसा प्रभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। अगर हालात और बिगड़े तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल को लेकर और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

नेपाल का भविष्य क्या होगा?

KP Oli का इस्तीफा नेपाल की राजनीति में खालीपन छोड़ गया है। अब सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी अंतरिम सरकार बनाने की होगी जो जनता का भरोसा जीत सके। हालांकि, मौजूदा हालात में लोगों का गुस्सा केवल इस्तीफे से शांत नहीं होगा। खासकर युवाओं की अगुवाई में चल रहे इस आंदोलन का असर लंबे समय तक बना रह सकता है।

नेपाल में सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ विरोध अब Oli सरकार को सत्ता से बाहर कर चुका है। प्रधानमंत्री के इस्तीफे के बाद सेना ने मोर्चा संभाल लिया है, लेकिन सड़कों पर फैली नाराजगी थमने का नाम नहीं ले रही। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि नेपाल स्थिरता की ओर बढ़ेगा या फिर गहरे राजनीतिक संकट में और फंस जाएगा।

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