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ट्रंप के टैरिफ वार के बीच पीएम मोदी और जिनपिंग की संभावित मुलाकात

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच रविवार को द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर चीन के तियानजिन में होगी। प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक आयोजित इस सम्मेलन में भाग लेंगे। यह सात वर्षों में प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा होगी और इसे कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

सात साल बाद चीन की यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी आखिरी बार 2018 में चीन गए थे। वहीं, दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस बार मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक व्यापार परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और भारत को नए विकल्प तलाशने की जरूरत है।

सीमा विवाद में नरमी

यह बैठक ऐसे वक्त में हो रही है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पर तनाव कम हुआ है। पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर मई 2020 में शुरू हुए गतिरोध के बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गए थे। हालांकि हाल ही में देपसांग मैदानी क्षेत्र और डेमचोक क्षेत्र में गश्त अधिकार को लेकर सहमति बनी है। यह समझौता दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

रिश्तों को सुधारने की कोशिशें

लद्दाख गतिरोध के बाद से भारत-चीन संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। लेकिन अब दोनों देश रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया गया है, चीनी पर्यटकों के लिए वीजा की सुविधा दी गई है और सीधी उड़ानें शुरू करने पर विचार चल रहा है। ये प्रयास संकेत देते हैं कि दोनों देशों के बीच संवाद की गुंजाइश अब भी बाकी है।

अमेरिका से टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि

मोदी-जिनपिंग मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत और अमेरिका के बीच Tariff War गहराता जा रहा है। अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने से New Delhi पर दबाव बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि चीन के साथ बातचीत भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगी, जिससे वह अमेरिका की आक्रामक व्यापार नीति का संतुलन बना सके।

पाकिस्तान फैक्टर भी बना चुनौती

हालांकि संबंध सुधारने के प्रयासों को इस साल मई में झटका लगा था। तब भारत को सबूत मिले थे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तानी सेना को सक्रिय सहायता दी थी। यह घटना फिर से भरोसे की दीवार कमजोर कर गई। इसके बावजूद दोनों देश अब संवाद को आगे बढ़ाने के इच्छुक नजर आ रहे हैं।

संभावित मुद्दे

मुलाकात के दौरान सीमा प्रबंधन, व्यापारिक सहयोग, Tourism और Regional Security पर बातचीत हो सकती है। सीधी उड़ानों को फिर से शुरू करने और लोगों के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने जैसे मुद्दे भी एजेंडे में रह सकते हैं। भारत की ओर से यह भी अपेक्षा होगी कि चीन पाकिस्तान को मिलने वाले समर्थन पर पुनर्विचार करे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह संभावित बैठक कूटनीति का अहम मोड़ साबित हो सकती है। अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद और चीन के साथ सीमा तनाव में कमी की पृष्ठभूमि इसे और भी प्रासंगिक बना रही है। हालांकि पाकिस्तान फैक्टर अभी भी एक बड़ी चुनौती है, लेकिन संवाद की कोशिश बताती है कि दोनों देश साझा हितों को पहचानते हैं। इस मुलाकात से न केवल भारत-चीन संबंधों में नई दिशा मिलने की उम्मीद है बल्कि यह एशिया की भू-राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है।

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