होमWorldभारत का पासपोर्ट रैंकिंग 2025: आयरलैंड बना दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट,...

भारत का पासपोर्ट रैंकिंग 2025: आयरलैंड बना दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट, भारत की रैंकिंग में गिरावट

Published on

KKN गुरुग्राम डेस्क | हाल ही में दुनिया के सबसे ताकतवर पासपोर्ट की रैंकिंग जारी की है, जिसमें आयरलैंड का पासपोर्ट पहले स्थान पर रहा है। यह पहली बार है जब आयरलैंड ने इस रैंकिंग में टॉप किया है। वहीं, भारत की रैंकिंग में गिरावट आई है, जबकि पाकिस्तान का पासपोर्ट दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट में से एक बना हुआ है।

इस लेख में हम आयरलैंड के पासपोर्ट की सफलता, भारत की गिरती रैंकिंग और पासपोर्ट रैंकिंग तय करने के तरीके पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

पासपोर्ट रैंकिंग कैसे तय होती है?

Nomad Capitalist Passport Index अन्य पासपोर्ट रैंकिंग से अलग तरीके से पासपोर्ट की ताकत का मूल्यांकन करता है। सामान्य तौर पर, पासपोर्ट की ताकत का माप इस बात से किया जाता है कि वह कितने देशों में वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा देता है, लेकिन नोमैड पासपोर्ट इंडेक्स हर साल यह भी देखता है कि देशों का वैश्विक प्रभाव कैसे बदल रहा है।

नोमैड कैपिटलिस्ट पांच प्रमुख कारकों के आधार पर पासपोर्ट की रैंकिंग तय करता है:

  1. वीजा-मुक्त यात्रा (50%): यह सबसे बड़ा कारक है, जो यह बताता है कि एक पासपोर्ट धारक कितने देशों में वीजा के बिना यात्रा कर सकता है।

  2. कर प्रणाली (20%): किसी देश की कर नीति, जो नागरिकों की वित्तीय स्वतंत्रता पर असर डालती है।

  3. वैश्विक प्रतिष्ठा (10%): किसी देश की अंतरराष्ट्रीय छवि, जो नागरिकों के लिए यात्रा की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है।

  4. दोहरी नागरिकता (10%): किसी देश में दोहरी नागरिकता रखने की अनुमति।

  5. निजी स्वतंत्रता (10%): नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अधिकार, जो उन्हें देश और विदेश में प्राप्त होते हैं।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हर साल पासपोर्ट की ताकत का मूल्यांकन किया जाता है।

2025 में आयरलैंड का पासपोर्ट सबसे ताकतवर

नोमैड कैपिटलिस्ट पासपोर्ट इंडेक्स 2025 के मुताबिक, आयरलैंड का पासपोर्ट 109 के स्कोर के साथ दुनिया का सबसे ताकतवर पासपोर्ट है। पिछले साल आयरलैंड स्विट्जरलैंड से पीछे था, लेकिन इस साल वह फिर से नंबर 1 पर आ गया है। 2020 में आयरलैंड ने लक्ज़मबर्ग और स्वीडन के साथ मिलकर पहला स्थान हासिल किया था।

नोमैड कैपिटलिस्ट के शोध सहयोगी जेवियर कोरेया के मुताबिक, आयरलैंड को यह बढ़त तीन मुख्य कारणों से मिली है:

  1. मजबूत अंतरराष्ट्रीय छवि: आयरलैंड की अंतरराष्ट्रीय छवि बहुत मजबूत है, जिससे उसके नागरिकों के लिए यात्रा करना आसान होता है।

  2. व्यापार के लिए अनुकूल कर नीति: आयरलैंड की कर नीति विदेशी निवेशकों और व्यवसायों के लिए आकर्षक है।

  3. लचीली नागरिकता नीति: आयरलैंड की नागरिकता नीति लचीली है, जो दुनिया के कई देशों में रहने और काम करने की स्वतंत्रता प्रदान करती है।

आयरलैंड के पासपोर्ट की ताकत का एक और बड़ा कारण यह है कि आयरिश नागरिकों को पूरे यूरोपीय संघ (EU) और विशेष रूप से यूनाइटेड किंगडम (UK) में बिना किसी रोक-टोक के रहने और काम करने की सुविधा मिलती है।

2025 के सबसे ताकतवर और सबसे कमजोर पासपोर्ट

नोमैड कैपिटलिस्ट पासपोर्ट इंडेक्स 2025 के अनुसार, सबसे ताकतवर पासपोर्ट वाले देशों की सूची में आयरलैंड पहले स्थान पर है, इसके बाद स्विट्जरलैंड और ग्रीस दूसरे स्थान पर हैं। टॉप 10 पासपोर्ट की सूची में यह देश शामिल हैं:

  1. आयरलैंड

  2. स्विट्जरलैंड

  3. ग्रीस

  4. पुर्तगाल

  5. माल्टा

  6. इटली

  7. लक्जमबर्ग

  8. फिनलैंड

  9. नॉर्वे

  10. संयुक्त अरब अमीरात (UAE), न्यूजीलैंड, और आइसलैंड (तीनों 10वें स्थान पर)

ये देश पासपोर्ट की ताकत के मामले में सबसे ऊपर हैं, क्योंकि इन देशों के नागरिकों को अधिक स्वतंत्रता, वीजा-मुक्त यात्रा और बेहतर टैक्स नीतियां मिलती हैं।

वहीं, पाकिस्तान का पासपोर्ट हमेशा की तरह दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट में गिना गया है। पाकिस्तान का पासपोर्ट रैंकिंग के हिसाब से सबसे नीचे के स्थानों पर है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान के नागरिकों को विदेश यात्रा करने में कई कठिनाइयाँ होती हैं।

भारत का पासपोर्ट रैंकिंग: गिरावट आई

भारत का पासपोर्ट इस बार 148वें स्थान पर आया है, जो कि कोमोरोस के साथ साझा किया गया है। भारत को कुल 47.5 अंक मिले, जिनमें से:

  • कर प्रणाली (टैक्स): 20 अंक

  • वैश्विक प्रतिष्ठा (इमेज): 20 अंक

  • दोहरी नागरिकता की सुविधा: 20 अंक

  • निजी स्वतंत्रता: 20 अंक

भारत की रैंकिंग में गिरावट देखी गई है, क्योंकि पिछले साल यह मोज़ाम्बिक के साथ 147वें स्थान पर था। इसके अलावा, हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भी भारत की रैंकिंग गिरकर 85वीं हो गई है। यह इंडेक्स IATA (अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ) के डेटा पर आधारित है, जो केवल वीजा-मुक्त यात्रा को ही प्राथमिकता देता है।

भारत की गिरती पासपोर्ट रैंकिंग के कारण

भारत की गिरती पासपोर्ट रैंकिंग को लेकर कई कारक जिम्मेदार हैं। इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं:

  1. वीजा संबंधी कड़े नियम: भारत के नागरिकों को बहुत से देशों में वीजा प्राप्त करने में कठिनाई होती है, जिससे उनकी यात्रा की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।

  2. निवासी और नागरिक अधिकार: भारत में नागरिकता और दोहरी नागरिकता की नीतियों में कड़े नियम हैं, जो अन्य देशों के नागरिकों की तुलना में अधिक प्रतिबंधित हैं।

  3. वैश्विक छवि: भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि में कुछ सुधार की आवश्यकता है, क्योंकि इसके प्रभाव के कारण भारतीय पासपोर्ट की ताकत में कमी आई है।

Nomad Capitalist Passport Index 2025 ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पासपोर्ट की ताकत केवल वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक देश की वैश्विक छवि, कर नीति, और नागरिकों की स्वतंत्रता पर भी निर्भर करती है। आयरलैंड का पासपोर्ट इस साल नंबर 1 पर आकर यह दर्शाता है कि वैश्विक पटल पर किसी देश की छवि और उसकी नीतियाँ कितनी महत्वपूर्ण होती हैं।

भारत को अपनी पासपोर्ट रैंकिंग सुधारने के लिए वीजा नीतियों में लचीलापन लाने, नागरिकता कानूनों को सुधारने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। अगर भारत इन पहलुओं पर ध्यान देता है, तो भविष्य में उसकी पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार हो सकता है।

यह बदलाव दर्शाता है कि देशों के पासपोर्ट के मूल्यांकन में केवल राजनीतिक और सामाजिक कारक नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यावसायिक नीतियां भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative


Discover more from

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Latest articles

ग्रामीण सड़कों के ‘जानलेवा’ स्पीड ब्रेकर: सुरक्षा के नाम पर जनता की जेब और सेहत पर हमला?

KKN ब्यूरो। ग्रामीण भारत में पक्की सड़कों का जाल तेजी से बिछा है। प्रधानमंत्री...

बिहार के किसान और बेरोजगार: आखिर क्या है असली समाधान?

बिहार की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी नहीं, आय की कमी है KKN ब्यूरो। बिहार की...

योग दिवस विशेष | देवनारायण राय से जानिए योग का विज्ञान, लाभ और स्वस्थ जीवन का रहस्य

क्या योग केवल व्यायाम है, या फिर यह स्वस्थ और संतुलित जीवन का विज्ञान...

भरत तिवारी एनकाउंटर: कानून का सवाल, जाति की बहस और सच की तलाश

KKN ब्यूरो। भोजपुर के बिलौटी गांव का एक युवक...। फेसबुक लाइव...। पुलिस पर पिस्टल...

More like this

क्या दुनिया बायोलॉजिकल वेपन के मुहाने पर खड़ी है?

सुपर पावरों की गुप्त प्रयोगशालाएं, अमेरिकी फंडिंग और मानव अस्तित्व पर मंडराता नया खतरा KKN...

ईरान के सामने अमेरिका कितना सफल रहा?

क्या दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति सीमित हो चुकी है? KKN ब्यूरो। जब भारत...

क्या अमेरिका भारत का भरोसेमंद साझेदार है?

दोस्त, साझेदार या सिर्फ अपने हितों का प्रहरी? KKN ब्यूरो। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई स्थायी...

भारत–बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, लेकिन क्यों बढ़ रहा है तनाव?

KKN ब्यूरो। भारत ने बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में...

क्या पेट्रोलियम संकट की तरफ बढ़ रहा है भारत?

मिडिल ईस्ट की आग, अमेरिका की शांति वार्ता और भारत पर मंडराता खतरा KKN ब्यूरो।...

क्या ट्रंप हार गए ईरान से? स्ट्रेट ऑफ हार्मुज पर संकट, चीन की एंट्री और भारत के लिए बड़ा खेल

KKN ब्यूरो। क्या सच में Donald Trump ईरान के सामने झुक गए? क्या अमेरिका...

क्या ईरान सिर्फ एक देश है या एक ऐसी रणनीति, जिसे हराना नामुमकिन है?

KKN ब्यूरो। क्या आपने कभी सोचा है… कि दशकों से प्रतिबंध झेल रहा एक...

ट्रंप की दादागिरी का असली चेहरा अब दुनिया के सामने है

KKN ब्यूरो। क्या अमेरिका मिडिल ईस्ट में फंस चुका है? क्या ट्रंप की ‘दादागिरी’...

अफगानिस्तान का नूर खान एयरबेस पर हमला: पाकिस्तान को दिया गया एक रणनीतिक संदेश

KKN ब्यूरो। दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ घटती हैं जो केवल...

क्या दुनिया एक और हिरोशिमा मोमेंट की ओर बढ़ रही है?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया को पता भी है कि मिडिल ईस्ट में चल रही...

ईरान पर अमेरिकी हमला या चीन को घेरने की रणनीति?

KKN ब्यूरो। क्या मिडिल ईस्ट में उठती हर जंग की आग के पीछे कोई...

मिडिल ईस्ट की जंग: क्या दुनिया की इंटरनेट नसों पर कब्ज़े की लड़ाई शुरू हो चुकी है?

KKN ब्यूरो। क्या आपने कभी सोचा है कि मिडिल ईस्ट की हर जंग का...

क्या मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुई अमेरिका की दादागिरी?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया एक बार फिर उसी खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां...

मिडिल ईस्ट: महायुद्ध की दहलीज़ पर विभाजन और तड़पता हुआ क्षेत्र

KKN ब्यूरो। संयुक्त रूप से अमेरिका और इज़रायल ने अपने सबसे बड़े सैन्य अभियान...
00:07:40

क्या है ग्वादर का सच: अरब सागर के किनारे कैसे भूख और प्यास के बीच चीन का हो गया कब्ज़ा

ग्वादर, जिसे पाकिस्तान का भविष्य कहा गया, आज सवालों के घेरे में है। CPEC,...