तमिल अभिनेता और नेता विजय की चुनावी रैली में 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में भयावह भगदड़ मच गई। इस हादसे में 40 लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए। घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकार ने मुआवज़े की घोषणा की, वहीं आपराधिक जाँच और न्यायिक आयोग भी गठित किए गए।
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हादसा कैसे हुआ?
यह त्रासदी कई कारणों के चलते एक खतरनाक स्थिति में बदल गई:
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देरी से आगमन: विजय को दोपहर 12 बजे पहुँचना था लेकिन वे करीब 7 घंटे की देरी से रात 7:40 बजे पहुँचे।
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बेतहाशा भीड़: कार्यक्रम स्थल की क्षमता 10,000 लोगों की थी, लेकिन भीड़ बढ़कर लगभग 27,000 तक पहुँच गई।
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खराब इंतज़ाम: समर्थक घंटों तेज़ धूप में बिना पर्याप्त पानी, भोजन और छाँव के खड़े रहे।
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घातक पल: जैसे ही विजय मंच पर पहुँचे, हज़ारों लोग आगे बढ़ने लगे। इस धक्का-मुक्की में जनरेटर शेड और टीवी वैन के पास ज़बरदस्त भगदड़ मच गई।
मौतें और घायल
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कुल 40 लोगों की मौत:
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17 महिलाएँ
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14 पुरुष
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9 बच्चे (सबसे छोटा पीड़ित 2 वर्षीय धुरु विष्णु)
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100 से अधिक घायल, जिनमें से 67 अस्पताल में भर्ती
व्यापक मदद और मुआवज़ा
तमिलनाडु सरकार
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मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख
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घायलों को ₹1 लाख
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न्यायिक जाँच का आदेश
केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी)
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मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख
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घायलों को ₹50,000
विजय की व्यक्तिगत घोषणा
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मृतकों के परिजनों को ₹20 लाख (राज्य सरकार से दोगुना)
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घायलों को ₹2 लाख
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उनकी कुल मदद का आँकड़ा ₹10 करोड़ से अधिक पहुँचा
अतिरिक्त सहयोग
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44 से अधिक डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ़ पड़ोसी ज़िलों से तैनात किए गए
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की
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BJP ने भी मृतकों के परिजनों को अतिरिक्त ₹1 लाख देने की घोषणा की
कानूनी कार्रवाई
इस हादसे के बाद तीन वरिष्ठ TVK नेताओं के खिलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हुए:
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गंभीर लापरवाही से मौत (Culpable Homicide)
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भीड़ की अधिकृत सीमा से ज़्यादा लोगों को इकट्ठा करना
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सुरक्षा इंतज़ाम की भारी कमी
हालाँकि विजय का नाम सीधे FIR में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन जाँच जारी है। एक न्यायिक आयोग इस मामले की गहराई से पड़ताल करेगा और भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए सुरक्षा मानक तय करेगा।
यह हादसा तमिलनाडु की सबसे भयावह राजनीतिक रैलियों में से एक बन गया है। करूर त्रासदी ने यह साफ़ कर दिया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में crowd management और safety protocols कितने ज़रूरी हैं। विजय की रैली का यह दर्दनाक हादसा आने वाले समय में राजनीतिक सभाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गहन बहस और बदलाव की माँग तेज़ करेगा।



