टोक्यो के Japan National Stadium में गुरुवार की रात भारत के लिए भावनात्मक उतार-चढ़ाव लेकर आई। Olympic Champion Neeraj Chopra पहली बार सात सालों में किसी बड़े टूर्नामेंट में बिना मेडल के लौटे। वहीं, युवा साथी Sachin Yadav ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और चौथे स्थान पर रहे।
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Neeraj Chopra का निराशाजनक प्रदर्शन
2018 से लेकर अब तक Neeraj Chopra हर बड़े टूर्नामेंट में पोडियम पर दिखे। लेकिन इस बार World Athletics Championships Tokyo के Javelin Throw Final में वे आठवें स्थान पर रहे।
उन्होंने पहली बार 84.38 मीटर का थ्रो किया और दूसरी कोशिश में भी केवल 84 मीटर से थोड़ा अधिक दूरी हासिल कर पाए। उनकी टाइमिंग गड़बड़ थी और बैक इंजरी की वजह से ताकत भी साथ नहीं दे रही थी।
चोट और आत्मविश्वास की कमी
Neeraj ने मैच के बाद माना कि चेक गणराज्य में ट्रेनिंग के दौरान 4 सितम्बर से उनकी बैक में दिक्कत शुरू हो गई थी। इस वजह से तैयारी प्रभावित हुई और आत्मविश्वास भी कमजोर पड़ा।
उन्होंने कहा, “आज मैं बिल्कुल तैयार महसूस नहीं कर रहा था। टाइमिंग ठीक नहीं थी और विश्वास नहीं था कि बड़ा थ्रो कर पाऊंगा। यह अनुभव अलग है, लेकिन मुझे इससे सीखना होगा।”
Sachin Yadav की चमक
जहां Chopra असफल रहे, वहीं उनके साथी Sachin Yadav ने शानदार प्रदर्शन कर सबका ध्यान खींचा। दिल्ली के Jawaharlal Nehru Stadium में ट्रेनिंग करने वाले यशवंत ने 86.27 मीटर का अपना करियर बेस्ट थ्रो फेंका।
उनकी पहली ही कोशिश उन्हें दूसरे स्थान पर ले आई। हालांकि आखिर में वे चौथे स्थान पर रहे, लेकिन उनका प्रदर्शन भारत के लिए बड़ी उम्मीदें जगाने वाला रहा।
मेडल विजेता एथलीट्स
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Trinidad & Tobago के Keshorn Walcott ने 88.16 मीटर के साथ गोल्ड जीता।
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Grenada के Anderson Peters ने 87.38 मीटर थ्रो कर सिल्वर हासिल किया।
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अमेरिका के Curtis Thompson ने 86.67 मीटर थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल लिया।
Sachin Yadav ने चौथे स्थान पर रहते हुए दिखा दिया कि भारत में अब Neeraj Chopra के बाद भी Javelin Throw का भविष्य सुरक्षित है।
आखिरी कोशिश और हार की स्वीकृति
बारिश की वजह से आखिरी थ्रो में Chopra का ग्रिप फिसल गया और उन्होंने फाउल कर दिया। यह पल उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा।
फिर भी उन्होंने हार मानने से इनकार किया और कहा, “मैं वापस आऊंगा। खेल में ऐसा होता है। इससे मैं और मजबूत बनूंगा।”
चैंपियन की ईमानदारी
Neeraj Chopra ने अपने प्रदर्शन की कमी को बिना बहाने बनाए स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि मौसम, शेड्यूल बदलाव और नए नियमों की वजह से मुश्किलें बढ़ीं, लेकिन असली वजह उनकी बैक इंजरी थी।
उन्होंने साफ कहा, “मैं बहाना नहीं बनाना चाहता। बस यही कह सकता हूं कि चोट ने मेरी तैयारी बिगाड़ी। लेकिन मैं फिट होकर फिर लौटूंगा।”
भारतीय भाला फेंक का भविष्य
Neeraj के लगातार सात साल तक पोडियम पर रहने की लय टूट गई। लेकिन साथ ही Sachin Yadav जैसे नए चेहरों का उभरना भारत के लिए बड़ी राहत है।
Chopra की सफलता ने देशभर में नई पीढ़ी को प्रेरित किया और अब युवा खिलाड़ी भी विश्व स्तर पर चुनौती पेश कर रहे हैं।
अब Neeraj Chopra का ध्यान पूरी तरह रिकवरी और आने वाले टूर्नामेंट्स पर है। अगले साल Commonwealth Games, Asian Games और World Athletics Ultimate Championships Budapest जैसे बड़े इवेंट्स होने हैं।
Chopra का लक्ष्य लगातार 90 मीटर से ऊपर थ्रो करने का है। यह हार उन्हें और मजबूत बनाएगी और आने वाले समय में वे फिर से भारत का झंडा ऊंचा करेंगे।
World Athletics Championships Tokyo भारतीय प्रशंसकों के लिए अलग अनुभव लेकर आया। Neeraj Chopra का आठवां स्थान निराशाजनक रहा, लेकिन उनके साथी Sachin Yadav का चौथा स्थान नई उम्मीदें जगाता है।
Neeraj Chopra ने हार को खेल की सच्चाई मानकर स्वीकार किया और वादा किया कि वे और मजबूत होकर लौटेंगे। यह नतीजा भले ही निराशा लाया हो, लेकिन साथ ही भारत के लिए नए अध्याय की शुरुआत भी कर गया है।



