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महाकुंभ मेला 2025: बसंत पंचमी पर अमृत स्नान, कड़ी सुरक्षा के बीच हुए आयोजन

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KKN गुरुग्राम डेस्क | महाकुंभ मेला 2025 के तीसरे ‘अमृत स्नान’ का आयोजन बसंत पंचमी के मौके पर हुआ, जिसमें पहले से तय कड़े सुरक्षा उपायों के साथ यह आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन उस दुखद घटना के कुछ दिन बाद हुआ, जब पहले के एक प्रमुख स्नान पर्व ‘मौनी अमावस्या’ पर एक भयंकर भगदड़ में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस दुर्घटना ने महाकुंभ मेला की पवित्रता पर सवाल उठाए थे, लेकिन इस बार प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया ताकि कोई अप्रत्याशित घटना न हो।

बसंत पंचमी पर अमृत स्नान का महत्व

हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का विशेष महत्व है और महाकुंभ मेला में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु गंगा, यमुना  और किवदंती अनुसार सरस्वती के संगम स्थल प्रयागराज में पवित्र स्नान करते हैं। 2025 के महाकुंभ मेला में बसंत पंचमी पर हुआ तीसरा ‘अमृत स्नान’ बहुत ही सुसंगठित तरीके से हुआ, जिसमें नागा साधुओं और भक्तों ने पवित्र जल में डुबकी लगाई।

इस साल अमृत स्नान को लेकर प्रशासन ने एक पूर्व-निर्धारित समय-सारणी बनाई थी ताकि कोई दुर्घटना न हो और श्रद्धालु आसानी से इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बन सकें।

कड़ी सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के उपाय

‘मौनी अमावस्या’ पर हुई भगदड़ के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस बार महाकुंभ मेला में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के उपायों को बेहद मजबूत कर दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और सुनिश्चित किया कि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।

इस बार प्रशासन ने विशेष सुरक्षा बल, चिकित्सा टीमें और संसाधनों को विशेष रूप से संगम स्थल और प्रमुख स्नान घाटों पर तैनात किया था। महाकुंभ मेला के अधिकारियों द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर अखाड़े को निर्धारित समय के भीतर ही पवित्र जल में स्नान करने की अनुमति दी गई थी, ताकि कोई भीड़-भाड़ न हो और सभी श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के स्नान कर सकें।

तीसरे अमृत स्नान का समय-सारणी

महाकुंभ मेला 2025 में तीसरे ‘अमृत स्नान’ की शुरुआत सोमवार, 3 फरवरी, 2025 को सुबह 4 बजे हुई। इस स्नान में सबसे पहले सन्यासी संप्रदाय के साधु-संतों ने पवित्र जल में डुबकी लगाई। इस दौरान प्रत्येक अखाड़े को 40 मिनट का समय दिया गया था ताकि वे अपने अनुष्ठान को शांति से पूरा कर सकें। पहले समूह ने अपनी डुबकी पूरी कर 8:30 बजे तक अपने कैंप लौटने का कार्य पूरा किया।

योजना के अनुसार, महाकुंभ मेला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सभी अखाड़े बिना किसी अड़चन के अपनी प्रक्रिया पूरी करें। इस बार का स्नान पहले से तय समय पर हुआ, जबकि मकर संक्रांति के स्नान के दौरान अखाड़े थोड़ा देरी से रवाना हुए थे।

इस बार साधु-संतों के स्नान के बाद आम भक्तों को संगम में डुबकी लगाने का मौका दिया गया। इससे पहले के स्नान के दौरान हुई भीड़-भाड़ से बचने के लिए यह कदम उठाया गया था।

श्रद्धालुओं की भारी संख्या

बसंत पंचमी के दिन, सुबह 4 बजे तक 16.58 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगा ली थी। महाकुंभ मेला के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक कुल 34.97 करोड़ श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया है। इसमें 10 लाख कल्पवासियों और 6.58 लाख तीर्थयात्रियों की संख्या भी शामिल है।

अभी तक लगभग 33 करोड़ से अधिक भक्तों ने इस महाकुंभ मेला में स्नान किया और प्रशासन का अनुमान है कि सोमवार के दिन केवल 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान करने आएंगे।

अखाड़ों की धूमधाम से यात्रा

महाकुंभ मेला में अखाड़ों की यात्रा को खास महत्व दिया जाता है। यह अखाड़े तीन प्रमुख संप्रदायों—सन्यासी, बैरागी और उदासीन—में विभाजित होते हैं। हर अखाड़ा अपने निर्धारित समय के अनुसार पवित्र जल में डुबकी लगाता है।

इस बार, सन्यासी संप्रदाय के अखाड़ों की यात्रा 4 बजे शुरू हुई। प्रमुख अखाड़ों में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी, श्री शंभु पंचायती अटल अखाड़ा, और श्री तपोनि पंचायती श्री निरंजनी अखाड़ा प्रमुख रहे। ये अखाड़े अपने निर्धारित समय पर पवित्र जल में डुबकी लगाकर 8:30 बजे तक अपने कैंप लौट गए।

इसके बाद, बैरागी संप्रदाय के अखाड़े 8:25 बजे से अपनी यात्रा शुरू करते हैं और 12:35 बजे तक अपना स्नान पूरा कर लेते हैं। अंत में, उदासीन संप्रदाय के अखाड़े 11 बजे से अपनी यात्रा शुरू करते हैं और 3:55 बजे तक अपना स्नान पूरा करते हैं।

मौनी अमावस्या के बाद सुरक्षा में बढ़ोतरी

‘मौनी अमावस्या’ पर हुई भगदड़ के बाद प्रशासन और सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि इस बार स्नान पर्व बिना किसी दुर्घटना के सम्पन्न हो। संगम की तरफ जाने वाले श्रद्धालुओं को प्रशासन ने यह अपील की थी कि किसी भी गहरे आस्था के कारण वे भीड़-भाड़ न करें और सभी घाटों को समान रूप से महत्वपूर्ण मानें।

उत्तर प्रदेश सरकार ने यह संदेश भी जारी किया कि संगम नोज़ (जहां भगदड़ हुई थी) की ओर बढ़ने की कोई जल्दी न हो, क्योंकि हर गंगा घाट की अपनी पवित्रता है और सभी का महत्व एक समान है।

महाकुंभ मेला 2025 के तीसरे ‘अमृत स्नान’ का आयोजन एक अत्यधिक व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से किया गया। प्रशासन द्वारा लागू किए गए कड़े सुरक्षा उपायों और समय-सारणी की मदद से श्रद्धालुओं को पवित्र जल में डुबकी लगाने का एक सुखद और सुरक्षित अनुभव मिला।

उत्तर प्रदेश सरकार, महाकुंभ मेला प्रशासन, और संत समुदाय के समन्वय से यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व को बढ़ाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि श्रद्धालु अपने विश्वास के साथ पूरी श्रद्धा और सुरक्षा के साथ स्नान कर सकें।

महाकुंभ मेला 2025 के इस आयोजन को लेकर अधिक जानकारी और लाइव अपडेट्स के लिए हमारे समाचार पोर्टल पर बने रहें।

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