KKN गुरुग्राम डेस्क | किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर के फिल्टरिंग सिस्टम की तरह काम करती है, जो खून को साफ करती है और टॉक्सिक पदार्थों, फालतू मिनरल्स और अनावश्यक द्रवों को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालती है। यह प्रक्रिया तभी ठीक से होती है जब शरीर में पर्याप्त पानी मौजूद हो।
क्या पानी की कमी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है?
जी हां, अगर शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो यूरीन अधिक गाढ़ा हो जाता है, जिससे उसमें मौजूद खनिज जमने लगते हैं। यही प्रक्रिया किडनी स्टोन (पथरी) बनने का कारण बनती है। साथ ही, पानी की कमी से किडनी की फिल्ट्रेशन प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे शरीर में विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।
डॉक्टर की सलाह: कितना पानी पीना सही है?
एशियन हॉस्पिटल के डायरेक्टर एंड हेड ऑफ नेफ्रोलॉजी, डॉ. रीतेश शर्मा के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को रोज़ाना 2 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि यह मात्रा अलग-अलग व्यक्ति की आयु, मौसम, शरीर की गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है।
जब पानी फायदेमंद होता है:
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शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं
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किडनी अच्छी तरह से काम करती है
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पेशाब सामान्य और साफ रहता है
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पथरी बनने का खतरा कम होता है
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ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है
क्या ज़्यादा पानी पीना नुकसानदायक हो सकता है?
यह एक आम भ्रम है कि जितना ज्यादा पानी, उतना बेहतर। लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, जरूरत से ज़्यादा पानी पीना भी ओवरहाइड्रेशन का कारण बन सकता है। इससे शरीर में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना, सूजन और यहां तक कि हाई ब्लड प्रेशर भी हो सकता है।
जिन लोगों को सतर्क रहना चाहिए:
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क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित मरीज
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दिल की बीमारी वाले लोग
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डायलिसिस पर रहने वाले मरीज
इन लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी पानी की मात्रा नहीं बढ़ानी चाहिए।
कम पानी पीने से होने वाले नुकसान
अगर आप रोज़ पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीते हैं, तो यह निम्न समस्याएं पैदा कर सकता है:
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पेशाब में जलन
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बार-बार यूरिन इंफेक्शन (UTI)
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किडनी स्टोन बनने का खतरा
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थकान और सिरदर्द
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त्वचा की रूखापन और मुंह सूखना
डॉक्टर बताते हैं कि पानी की कमी का सबसे स्पष्ट संकेत गाढ़ा और बदबूदार यूरीन है। अगर आपका पेशाब हल्के पीले रंग का नहीं है, तो समझ लें कि शरीर में पानी की कमी हो रही है।
पानी पीने का सही तरीका और समय
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सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पिएं – यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।
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भोजन से 30 मिनट पहले और 30 मिनट बाद पानी पिएं – इससे पाचन ठीक रहता है।
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प्यास लगने पर ही पानी पिएं, लेकिन गर्मियों में थोड़ी-थोड़ी देर में पानी लेते रहें।
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एक बार में बहुत सारा पानी ना पिएं, दिनभर में थोड़ा-थोड़ा करके पानी लें।
पानी और किडनी स्टोन का सीधा संबंध
जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो यूरीन गाढ़ा हो जाता है, और उसमें मौजूद कैल्शियम, ऑक्सेलेट जैसे मिनरल्स जमा होकर किडनी स्टोन बना सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से यह मिनरल्स पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते हैं, और स्टोन बनने का खतरा कम हो जाता है।
यूटीआई और इंफेक्शन से बचाव
ज्यादा पानी पीने से यूटीआई (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन) का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि पानी बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करता है। विशेषकर महिलाओं में यह समस्या अधिक देखी जाती है। हाइड्रेशन किडनी के सही तरीके से काम करने के लिए जरूरी है।
ओवरहाइड्रेशन से क्या होता है?
जब आप बिना प्यास के बार-बार पानी पीते हैं, तो किडनी को इसे फिल्टर करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे शरीर में सोडियम का स्तर गिर सकता है, और हाइपोनेट्रेमिया नामक स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें कमजोरी, उलझन और कभी-कभी मस्तिष्क पर असर भी हो सकता है।
उम्र और मौसम के अनुसार पानी की मात्रा (अनुमानित)
| आयु वर्ग | रोज़ाना पानी की मात्रा |
|---|---|
| छोटे बच्चे (1–8) | 1.0 – 1.5 लीटर |
| किशोर (9–18) | 1.5 – 2.0 लीटर |
| वयस्क (19–60) | 2.0 – 3.0 लीटर |
| बुजुर्ग (60+) | 1.5 – 2.0 लीटर |
| मेहनत करने वाले लोग | 3.0 – 3.5 लीटर |
नोट: यह सामान्य अनुमान है। अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लें।
जनता में जागरूकता की जरूरत
शहरी इलाकों में लोग अक्सर फिटनेस ट्रेंड के चलते जरूरत से ज़्यादा पानी पीते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पानी की कमी से डिहाइड्रेशन आम है। ऐसे में पानी के सही उपयोग और आवश्यकता के अनुसार सेवन के लिए जागरूकता फैलाना बेहद ज़रूरी है।
पानी हमारे शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन सिर्फ जरूरत के अनुसार। ना तो बहुत कम, और ना ही जरूरत से ज़्यादा। संतुलित जल सेवन ही स्वस्थ किडनी और शरीर की कुंजी है।
डॉ. रीतेश शर्मा की सलाह:
“प्यास लगने पर पानी जरूर पिएं, यूरीन का रंग ध्यान से देखें, और अपनी दिनचर्या के अनुसार पानी का संतुलन बनाए रखें।”
