Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana के तहत राज्य सरकार महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को अपना छोटा business शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में मदद करना है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को कुल मिलाकर ₹2 लाख तक की सहायता मिल सकती है। हालांकि, इस योजना में लाभ लेने के लिए महिलाओं को अपनी ओर से भी निर्धारित अंशदान करना अनिवार्य होगा। ग्रामीण विकास विभाग ने योजना से जुड़े नियम, किस्त और प्रक्रिया को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह योजना खासतौर पर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। सरकार का मानना है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और finance support मिले, तो वे अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार और समाज दोनों को मजबूत बना सकती हैं।
अंशदान को क्यों बनाया गया अनिवार्य
Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana में अंशदान की शर्त इसलिए रखी गई है ताकि महिलाएं अपने व्यवसाय को गंभीरता से लें। सरकार का स्पष्ट मानना है कि जब कोई व्यक्ति अपनी पूंजी निवेश करता है, तो वह कार्य को अधिक जिम्मेदारी और planning के साथ करता है। इससे व्यवसाय के लंबे समय तक टिके रहने की संभावना बढ़ जाती है।
अधिकारियों के अनुसार, केवल सरकारी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय महिलाओं को भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह व्यवस्था उन्हें financial discipline और decision making की समझ भी देती है।
चार किस्तों में मिलेगी आर्थिक सहायता
इस योजना के तहत ₹2 लाख की राशि एक साथ नहीं दी जाएगी। सरकार ने सहायता राशि को चार किस्तों में देने का प्रावधान किया है। प्रत्येक किस्त से पहले लाभुक महिला के व्यवसाय की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही अगली राशि जारी की जाएगी।
किस्तों में राशि देने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी धन का सही उपयोग हो और व्यवसाय वास्तव में आगे बढ़ रहा हो।
पहली किस्त में शुरुआती सहायता
योजना के पहले चरण में महिलाओं को ₹10,000 की राशि दी जाती है। इस किस्त के लिए किसी भी प्रकार का अंशदान नहीं देना होता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को business शुरू करने के लिए प्रारंभिक सहायता देना है।
इस राशि का उपयोग महिलाएं आवश्यक सामग्री खरीदने, पंजीकरण या छोटे स्तर की तैयारी में कर सकती हैं। यह चरण महिलाओं को आत्मविश्वास देने में अहम भूमिका निभाता है।
दूसरी किस्त के लिए जरूरी शर्तें
दूसरी किस्त के रूप में महिलाओं को ₹20,000 की सहायता मिलेगी। इस चरण में लाभुक महिला को यह दिखाना होगा कि उसका व्यवसाय शुरू हो चुका है और आगे बढ़ रहा है। कुछ मामलों में महिलाओं को अपनी ओर से सीमित निवेश भी करना पड़ सकता है।
इस किस्त का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ केवल गंभीर और सक्रिय महिलाओं को ही मिले।
अतिरिक्त सहायता का प्रावधान
योजना में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए ₹5,000 की अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान है। यह सहायता सभी को नहीं मिलती, बल्कि business performance के आधार पर दी जाती है। इसके लिए भी निर्धारित अंशदान करना जरूरी होता है।
इस व्यवस्था से महिलाओं को अपने काम को बेहतर ढंग से संचालित करने की प्रेरणा मिलती है।
तीसरी किस्त में निवेश की भागीदारी
तीसरे चरण में महिलाओं को ₹40,000 की सहायता दी जाएगी। इस किस्त के लिए लाभुक महिला को ₹10,000 का अंशदान देना होगा। यानी इस स्तर पर सरकार और महिला दोनों मिलकर व्यवसाय में निवेश करेंगे।
यह चरण आमतौर पर business expansion और आय बढ़ाने से जुड़ा होता है। इससे महिलाओं का रोजगार स्थिर होने लगता है।
चौथी किस्त में बड़ी सहायता
चौथे और अंतिम चरण में महिलाओं को ₹80,000 की राशि दी जाएगी। इसके लिए ₹20,000 का अंशदान करना अनिवार्य होगा। इस तरह पूरे योजना काल में महिलाओं को कुल ₹35,000 तक का निवेश करना होगा।
इस चरण में व्यवसाय के स्थायी रूप से स्थापित होने की उम्मीद की जाती है।
अंतिम चरण में अतिरिक्त राहत
योजना के अंतिम हिस्से में सरकार द्वारा ₹60,000 की अतिरिक्त सहायता भी दी जाती है। इस राशि के लिए किसी भी प्रकार का अंशदान नहीं लिया जाएगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक दबाव से राहत देना और business को स्थायित्व प्रदान करना है।
यह सहायता महिलाओं को बाजार में टिके रहने और आय बढ़ाने में मदद करती है।
एकमुश्त ₹2 लाख लेने का विकल्प
यदि कोई महिला ₹2 लाख की पूरी राशि एक साथ लेना चाहती है, तो इसके लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी होगी। सबसे पहले ग्राम स्तर पर उसके व्यवसाय का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को जिला स्तरीय समिति के पास भेजा जाएगा।
जिला समिति की approval मिलने के बाद मामला राज्य स्तरीय समिति के पास जाएगा। अंतिम मंजूरी के बाद ही एकमुश्त राशि जारी की जाएगी। यह विकल्प उन्हीं महिलाओं के लिए उपयुक्त है जिनकी planning और business model मजबूत है।
व्यवसाय की जांच के बाद ही अगली किस्त
ग्रामीण विकास विभाग ने साफ किया है कि बिना मूल्यांकन के कोई भी किस्त जारी नहीं की जाएगी। अधिकारियों द्वारा यह देखा जाएगा कि व्यवसाय वास्तव में चल रहा है या नहीं। यदि महिलाएं समूह में business शुरू करती हैं, तो ग्राम संगठन द्वारा जांच की जाएगी।
इस प्रक्रिया से transparency बनी रहती है और योजना का सही लाभ सही लोगों तक पहुंचता है।
अन्य योजनाओं से अलग नियम
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो महिलाएं Bihar Laghu Udyami Yojana का लाभ ले चुकी हैं, उन्हें Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana में अतिरिक्त राशि नहीं दी जाएगी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक नई महिलाओं को योजना से जोड़ना है।
इस नियम से सरकारी सहायता का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का अवसर
Mukhyamantri Mahila Rozgar Yojana महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि इसमें अंशदान की शर्त रखी गई है, लेकिन इससे महिलाओं में ownership और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
यह योजना खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार, आय और सम्मान बढ़ाने का एक मजबूत माध्यम बन रही है। सरकारी सहायता और स्वयं के निवेश के संतुलन से यह पहल महिलाओं को लंबे समय तक सशक्त बनाने में सहायक साबित हो सकती है।
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