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केन्द्र की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया राफेल सौंदे का दस्तावेज

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केन्द्र सरकार ने राफेल सौदे का दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौप दिया है। केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक 36 राफेल विमानों की खरीद के संबंध में किये गए फैसले के ब्योरे वाले दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिए हैं। अब यह दस्तावेज याचिकाकर्ताओं को भी उपलब्ध हो जायेगा। सौपे गए दस्तावेजों के अनुसार राफेल विमानों की खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया- 2013 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है। दस्तावेजों में कहा गया है कि फ्रांसीसी पक्ष के साथ बातचीत तकरीबन एक साल चली और समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति की मंजूरी भी ली गई।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था दस्तावेज

स्मरण रहे कि 31 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को दौरान फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद पर केन्द्र सरकार से ब्योरा मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने एनडीए सरकार से कहा था कि वह 10 दिनों के भीतर राफेल लड़ाकू विमानों से जुड़े ब्यौरे बंद लिफाफे में सौपें। तब सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अदालत से कहा था कि सरकार के लिए अदालत को कीमतों की जानकारी उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा क्योंकि यह जानकारी संसद को भी नहीं दी गई है।

क्या कहा था कोर्ट ने

डील पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुनावई करते हुए शीर्ष अदालत ने इससे पहले केन्द्र सरकार से राफेल खरीद पर नीतिगत प्रक्रिया से जुड़े ब्योरे को सौंपने का आदेश दिया था। लेकिन, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई कर रही तीन सदस्यीय पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे सूचना के तौर पर यह जानकारी मांग रहे हैं।

राफेल खरीदने का कैसे हुआ निर्णय

फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल सौदे को लेकर सरकार के फैसले पर उठाए जा रहे सवालों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से बिना नोटिस जारी किए इसकी खरीद के फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा मांगा था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसे कीमत और सौदे के तकनीकी विवरणों से जुड़ी सूचनाएं नहीं चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र से राफेल पर फैसले की प्रक्रिया का ब्योरा सीलबंद लिफाफे में सौंपने को कहा। दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि इसे औपचारिक नोटिस न समझा जाए।

शीर्ष अदालत में है दो याचिका

शीर्ष अदालत उन दो जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी जिनमें एक में यह मांग की गई थी कि 36 लड़ाकू राफेल विमानों को फ्रांस से खरीदने के लिए भारत ने जो समझौते किए उसका पूरा ब्योरा दिया जाए। जबकि, दूसरी याचिका में शीर्ष अदालत के पर्यवेक्षण में विशेष जांच दल बनाए जाने की मांग की गई थी।

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