शुक्रवार, जनवरी 16, 2026 10:58 पूर्वाह्न IST
होमNationalभैया दूज 2025 : कब है, क्यों मनाया जाता है और इस...

भैया दूज 2025 : कब है, क्यों मनाया जाता है और इस पवित्र पर्व को कैसे मनाएं

Published on

भैया दूज, हिंदू

का एक अत्यंत प्रिय और महत्वपूर्ण पर्व है, जो भाई-बहन के बीच अटूट रिश्ते को मनाने का अवसर प्रदान करता है। यह पर्व दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का समापन करता है और भारत के साथ-साथ दुनिया भर के करोड़ों परिवारों के लिए सांस्कृतिक, धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है।

भैया दूज 2025: कब मनाया जाएगा?

2025 में भैया दूज 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष (उज्जवल पक्ष) की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025 को रात 8:16 बजे शुरू होकर 23 अक्टूबर 2025 को रात 10:46 बजे समाप्त होगी। हिंदू परंपरा के अनुसार, इस दिन का पर्व उषा तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को मनाया जाता है, इसलिए भैया दूज 23 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

भैया दूज के लिए शुभ मुहूर्त

भैया दूज 2025 पर तिलक समारोह के लिए शुभ समय 1:13 बजे से 3:28 बजे तक है। यह दो घंटे का समय विशेष रूप से उपयुक्त माना जाता है, जब बहनें अपने भाई को तिलक करके और आरती करके उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

भैया दूज क्यों मनाया जाता है?

भैया दूज का पर्व गहरी पौराणिक मान्यता से जुड़ा हुआ है, जो भाई-बहन के बीच रक्षा और प्रेम के रिश्ते को मनाता है। इस दिन को यम द्वितीया भी कहा जाता है, जो इसे प्राचीन हिंदू कथाओं से जोड़ता है।

यमराज और यमुनाजी की कथा

भैया दूज के पीछे सबसे प्रसिद्ध कथा यमराज (मृत्यु के देवता) और उनकी बहन यमुनाजी से जुड़ी हुई है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने आए थे। लंबे समय के बाद भाई से मिलकर यमुनाजी अत्यंत खुशी से उन्हें अपने घर बुलाती हैं और उनके माथे पर तिलक करके उन्हें स्वादिष्ट भोजन परोसती हैं। यमराज अपनी बहन की स्नेह और आतिथ्य से बहुत प्रभावित होते हैं और उन्हें एक वरदान देते हैं। जब यमुनाजी ने उनसे कहा कि वह हर साल इस दिन उनसे मिलने आएं, तो यमराज ने न केवल यह वचन दिया, बल्कि यह भी आशीर्वाद दिया कि जो भाई अपनी बहन से इस दिन तिलक करवाएगा, वह अकाल मृत्यु से बचा रहेगा और यमराज से भयमुक्त रहेगा। यही कारण है कि आज भी यह परंपरा चली आ रही है।

श्री कृष्ण और सुभद्राजी की कथा

एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान श्री कृष्ण और उनकी बहन सुभद्राजी से जुड़ी हुई है। नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्री कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे। सुभद्राजी ने उन्हें फूल, मिठाई और तिलक करके उनका स्वागत किया। यह स्नेह और प्रेम का प्रतीक बन गया, जो भैया दूज के पर्व के रूप में स्थापित हुआ।

आध्यात्मिक महत्व

“भाई दूज” नाम में ही गहरी भावना है: “भाई” का मतलब भाई और “दूज” का अर्थ नव चंद्र के दूसरे दिन से है। यह पर्व भाई-बहन के बीच निःस्वार्थ प्रेम, विश्वास और आपसी सुरक्षा का प्रतीक है। बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, समृद्धि और बुराई से सुरक्षा की कामना करती हैं, जबकि भाई अपनी बहन को जीवनभर रक्षा का वचन देते हैं।

भैया दूज कैसे मनाएं: रिवाज और परंपराएं

भैया दूज का पर्व विशेष परंपराओं और रिवाजों के साथ मनाया जाता है, जिनका हर एक हिस्सा प्रतीकात्मक महत्व रखता है।

पूजा थाली की तैयारी

बहनें तिलक समारोह के लिए एक विशेष थाली तैयार करती हैं, जिसमें ये वस्तुएं होती हैं:

  • दीपक (तिलक के लिए तेल का दीपक)

  • रोली (वर्मिलियन) तिलक लगाने के लिए

  • अक्षत (अखंड चावल) – पवित्रता और आशीर्वाद के प्रतीक

  • चंदन – शुभता का प्रतीक

  • मिठाइयाँ और फल – प्रसाद के रूप में

  • नारियल – भेंट के रूप में

  • सुपारी और पान की पत्तियां

  • मौली (पवित्र लाल धागा)

  • फूल – सजावट के लिए

तिलक समारोह: कदम दर कदम

तिलक समारोह भैया दूज के उत्सव का मुख्य हिस्सा होता है:

  1. बैठना: बहनें अपने भाई के लिए एक आरामदायक सीटिंग अरेंजमेंट तैयार करती हैं, जो सामान्यतः पूर्व या उत्तर दिशा में होती है।

  2. तिलक लगाना: बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, जो रोली (वर्मिलियन), चावल, दही और कभी-कभी चंदन का मिश्रण होता है। यह तिलक भाई की सुरक्षा और लंबी उम्र के लिए होता है।

  3. आरती करना: तिलक लगाने के बाद, बहनें भाई के चारों ओर दीपक घुमा कर आरती करती हैं, जबकि मंत्रों या प्रार्थनाओं के माध्यम से उनकी भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं।

  4. मिठाई देना: बहनें भाई को मिठाइयाँ खिलाती हैं, जो उनके जीवन में मिठास और खुशी की कामना करती हैं।

  5. कलावा बांधना: कुछ परंपराओं में बहनें भाई की कलाई पर पवित्र धागा (कलावा) भी बांधती हैं।

  6. उपहारों का आदान-प्रदान: भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं, जैसे पैसे, आभूषण, कपड़े या अन्य सोच-समझकर दिए गए उपहार।

  7. आशीर्वाद लेना: यह परंपरा इस बात से समाप्त होती है कि भाई अपनी बहन को आशीर्वाद देते हैं और उन्हें जीवनभर अपनी रक्षा का वचन देते हैं।

विशेष मंत्र

तिलक समारोह के दौरान बहनें कुछ विशेष मंत्रों का उच्चारण करती हैं:

सामान्य मंत्र:

गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज को।
सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे।
मेरे भाई आप बढ़े, फूले फलें॥

अनुवाद: जैसे गंगा यमुना की पूजा करती है, यमी यमराज की पूजा करती है, और सुभद्रा कृष्ण की पूजा करती हैं, वैसे ही मेरा भाई बढ़े, फूले-फले, समृद्ध हो और खुशहाल रहे।

विशेष परंपराएं

  • यमुनाजी का स्नान: ब्रज क्षेत्र (मथुरा-वृंदावन) में एक विशेष परंपरा है, जिसमें भाई और बहन यमुनाजी में स्नान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमुनाजी में स्नान करने से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। इस दिन, विशेष रूप से गुजरात से हजारों भक्त यमुनाजी का पानी घर लेकर जाते हैं और इसे पवित्र प्रसाद मानते हैं।

  • पारंपरिक भोजन: बहनें अपने भाई के पसंदीदा व्यंजन बनाती हैं। यह व्यंजन क्षेत्र के हिसाब से भिन्न हो सकते हैं, लेकिन मिठाई जैसे काजू कतली, बर्फी, लड्डू, और स्वादिष्ट खाने का विशेष ध्यान रखा जाता है।

भारत में क्षेत्रीय विविधताएँ

जबकि भैया दूज का मुख्य उद्देश्य हर स्थान पर समान है, लेकिन इसे मनाने के तरीके और परंपराएं विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न होती हैं:

  • उत्तर भारत: उत्तर भारत में इसे भैया दूज या भाई दूज कहा जाता है। यहाँ परंपरागत तिलक, आरती और मिठाईयों का आदान-प्रदान होता है।

  • महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और कर्नाटका: यहाँ इसे भाऊ बीज कहा जाता है, और इस दिन विशेष रूप से काजू कतली, बासुंदी पूरी और अन्य मीठे व्यंजन बनाए जाते हैं।

  • पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में इसे भाई फोंटा कहा जाता है और इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर विशेष तिलक लगाती हैं।

संस्कार और भावनात्मक महत्व

भैया दूज सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार के रिश्तों को मजबूत करने, सांस्कृतिक मूल्यों को पुनः स्थापित करने और भाई-बहन के रिश्ते की सुरक्षा और प्रेम को दर्शाने का एक अवसर है। यह पर्व यह संदेश देता है कि भारतीय समाज में पारिवारिक संबंधों को कितनी अहमियत दी जाती है।

भैया दूज 2025, जो 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा, यह परिवारों को भाई-बहन के रिश्ते को सम्मानित करने का एक विशेष अवसर प्रदान करता है। इस पवित्र पर्व के माध्यम से, हम न केवल अपने भाई-बहन के प्रति प्यार और समर्थन को व्यक्त करते हैं, बल्कि पारंपरिक अनुष्ठानों, प्रार्थनाओं और परिवार के साथ बिताए गए समय के जरिए रिश्तों को और भी गहरा बनाते हैं। चाहे यह परंपरागत रूप से मनाया जाए या आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप, भैया दूज हमें हमेशा याद दिलाता है कि छोटे, लेकिन महत्वपूर्ण रिवाजों के माध्यम से व्यक्त किया गया प्रेम सदैव अमर रहता है।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

बीएसईबी बिहार बोर्ड 12वीं एडमिट कार्ड जारी, इंटर परीक्षा 2 फरवरी से

Bihar School Examination Board ने इंटर वार्षिक परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले विद्यार्थियों...

Bihar Weather Update : राज्य में मौसम स्थिर, ठंड और कोहरे का असर जारी

Bihar के मौसम में फिलहाल किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं। दिन में...

मुजफ्फरपुर में गंडक नदी किनारे महिला और तीन बच्चों के शव मिलने से सनसनी

बिहार के Muzaffarpur से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। अहियापुर...

मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना : अब सीधे बैंक खाते में मिलेगा मैच्योरिटी फंड

बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया को और...

More like this

बीएसईबी बिहार बोर्ड 12वीं एडमिट कार्ड जारी, इंटर परीक्षा 2 फरवरी से

Bihar School Examination Board ने इंटर वार्षिक परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले विद्यार्थियों...

Bihar Weather Update : राज्य में मौसम स्थिर, ठंड और कोहरे का असर जारी

Bihar के मौसम में फिलहाल किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं। दिन में...

मुजफ्फरपुर में गंडक नदी किनारे महिला और तीन बच्चों के शव मिलने से सनसनी

बिहार के Muzaffarpur से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। अहियापुर...

मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना : अब सीधे बैंक खाते में मिलेगा मैच्योरिटी फंड

बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के लाभार्थियों के लिए प्रक्रिया को और...

गया में इलाज के दौरान मरीज की मौत, परिजनों का हंगामा

बिहार के Gaya शहर में एक निजी क्लिनिक में मरीज की मौत के बाद...

Bihar Student Credit Card Scheme: लोन डिफॉल्ट पर सरकार सख्त, एफआईआर की तैयारी

बिहार सरकार की स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना राज्य के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा...

मकर संक्रांति के बाद ठंड से हल्की राहत, कोहरे का असर जारी

मकर संक्रांति के बाद बिहार के मौसम में धीरे-धीरे बदलाव के संकेत मिलने लगे...

मकर संक्रांति में क्यों दही-चूड़ा सबसे खास और हेल्दी व्यंजन

मकर संक्रांति 2026 के मौके पर देशभर में पारंपरिक उत्साह के साथ पर्व मनाया...

बिहार के मखाना बन रहा रोजगार और आय का नया जरिया

मखाना, जिसे फॉक्स नट के नाम से भी जाना जाता है, वर्षों से बिहार...

प्रेमानंद महाराज : आखिर हमारे मन को कौन करता है कंट्रोल

दैनिक जीवन में अक्सर लोगों को यह महसूस होता है कि उनका मन उनके...

BSSC 2nd Inter Level Vacancy 2026 : आवेदन की अंतिम तिथि फिर बढ़ी

बिहार कर्मचारी चयन आयोग ने बीएसएससी सेकेंड इंटर लेवल भर्ती को लेकर एक बार...

मकर संक्रांति 2026 : विशेष संयोग में मनाया जाएगा पर्व, 14 जनवरी रहेगा अत्यंत शुभ

मकर संक्रांति का पावन पर्व इस वर्ष बुधवार, 14 जनवरी 2026 को विशेष ज्योतिषीय...

रोज का पानी बनाइए सेहत का पावरहाउस, न्यूट्रिशनिस्ट की आसान सलाह

आजकल लोग हेल्दी रहने के लिए महंगे detox drinks, supplements और superfoods की तलाश...

दरभंगा राज परिवार की विरासत : महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी और ऐतिहासिक न्यास

देश के विकास और संकट की घड़ियों में दरभंगा राज परिवार का योगदान उल्लेखनीय...

BPSC Vacancy 2026 : चार बड़ी भर्तियों का ऐलान, 59 पदों पर आवेदन शुरू

BPSC Vacancy 2026 के तहत बिहार लोक सेवा आयोग ने चार अलग-अलग विभागों में...