शुक्रवार, मार्च 13, 2026 1:46 अपराह्न IST
होमGujaratगुजरात में क्या है एक्जिट पोल के मायने

गुजरात में क्या है एक्जिट पोल के मायने

Published on

जानिए सर्वे के अंदर की खबर

गुजरात। दरअसल एक्जिट पोल के दौरान सिर्फ सीटो पर जीत और हार का अनुमान ही नही लगाया जाता। बल्कि, मतदाताओं की रुझान और सोच का भी पता लगाने की कोशिश होती है। इंडिया टुडे-एक्सिस-माय-इंडिया एक्जिट पोल से गुजरात के मतदाताओं के सोच की दिलचस्प बानगी सामने आई है। हालिया सर्वे में इसी तरह के कई चौकाने वाले नतीजे सामने आयें हैं।
बतातें चलें कि गुजरात के आदिवासी इलाके लंबे समय से कांग्रेस का गढ़ रहा हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए बड़ा सपना रहा है कि गुजरात के आदिवासी वोटरों पर कांग्रेस की मजबूत पकड़ को कमजोर किया जाए। सर्वे की सबसे मजेदार खुलाशा यही से शुरू होता है। मोदी-शाह का ये सपना आखिरकार 2017 चुनाव में साकार होता प्रतीत हो रहा है। अनुमान है कि आदिवासी वोटों का 48 फीसदी हिस्सा बीजेपी की झोली में आ रहा है। वहीं कांग्रेस को आदिवासियों का सिर्फ 42 फीसदी वोट शेयर ही मिलता नजर आ रहा है।
यदि यह सच हुआ तो गुजरात के आदिवासी वोटरों का समर्थन हासिल करने में कांग्रेस पर बीजेपी बढ़त लेने जा रही है। गुजरात में आदिवासियों के प्रभाव वाली 28 सीटों में से बीजेपी को 17 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं कांग्रेस को महज 11 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। यही वह अंकगणित है, जिसके सहारे बीजेपी के लिए सत्ता तक पहुंचने का मार्ग खुल गया है। सर्वे की माने तो सौराष्ट्र और कच्छ में हुए नुकसान को बीजेपी झेल पा रही है तो इसका एक बड़ा कारण गुजरात के आदिवासियों को लुभा कर अपने पाले में लाने की कामयाबी मानी जा रही है।
जीएसटी को लेकर कारोबारियों की नाराजगी ने बेशक बीजेपी नेतृत्व को रह-रह कर झटके दिए, लेकिन अंत में पार्टी अपने पारंपरिक व्यापारी वोट बैंक को अपने पाले में कर अपने साथ जोड़े रखने में कामयाब होती दिख रही है। कारोबारियों के मन में आशंका रही कि कांग्रेस सत्ता में वापस आती है तो कहीं लतीफ राज यानी अस्सी-नब्बे के दशक में गुजरात में सक्रिय रहे गैंगस्टर अब्दुल लतीफ का खौफ, दंगे, कर्फ्यू, अराजकता जैसे हालात फिर ना लौट आएं। इसी डर ने कारोबारियों को बीजेपी से जोड़े रखने में मदद की।
गुजरात की 55 शहरी सीटों में से बीजेपी 42 सीटों पर जीत का परचम फहरा कर शानदार प्रदर्शन करने जा रही है। वहीं शहरी क्षेत्रों की सिर्फ 13 सीटों के वोटरों की ओर से ही कांग्रेस पर भरोसा रखने का अनुमान है। अहमदाबाद की 16 सीटों में से बीजेपी के खाते में 13 सीट जाने का अनुमान है। इसी तरह सूरत की 9 सीटों में से बीजेपी को 8 पर जीत मिलने के आसार है। वडोदरा के शहरी क्षेत्र की सभी 5 की 5 सीट बीजेपी की झोली में जाती नजर आ रही हैं। एक गुजराती के देश का प्रधानमंत्री होने के गौरव ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में वोटरों पर बड़ा प्रभाव डाला है। सीधी भाषा में कहे तो गुज्जू भाई ने एक साथी गुज्जु का साथ छोड़ना मुनासिब नहीं समझा।
पाटीदारों के बीच फैले गुस्से का भी इस चुनाव पर असर से इनकार नही किया जा सकता है। सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में वास्तव में पाटीदार बीजेपी के पाले से छिटकते नजर आ रहे हैं। सौराष्ट्र और कच्छ की 54 सीटों पर लेउवा पटेलों में 56 फीसदी और कडवा पटेलों में 60 फीसदी मतदाताओं ने कांग्रेस के लिए वोट किया। यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। क्योंकि, अमूमन पटेल बीजेपी का परंपरागत वोट माना जाता रहा है। इसके अतिरिक्त उत्तर गुजरात की 32 सीटों पर भी कमोवेश ऐसी ही हालत रहने के आसार है। इन सीटों पर कांग्रेस ने बीजेपी पर 6 फीसदी अधिक वोटों से बढ़त बनाई हुई है।
सर्वे का अध्ययन करने से साफ हो जाता है कि सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात में बीजेपी को जो भी नुकसान होगा उसकी भरपाई उसने दक्षिण और मध्य गुजरात के साथ अहमदाबाद की सीटों पर कर ली है। मध्य गुजरात की 40 सीटों की बात की जाए तो लेउवा पटेलों में 62 फीसदी और कडवा पटेलों में 58 फीसदी ने बीजेपी के लिए वोट किया। यहां कांग्रेस लेउवा पटेलों में महज 27 फीसदी और कडवा पटेलों में 31 फीसदी वोटरों का ही समर्थन हासिल कर सकी है। ठीक इसके विपरित दक्षिण गुजरात की 35 सीटों पर भी बीजेपी के लिए बम्पर समर्थन वाली स्थिति बन रही है। यहां पटेलों ने बीजेपी को कांग्रेस की तुलना में 25 फीसदी से ज्यादा वोट मिलने का अनुमान है। बहरहाल, यह सभी विश्लेषण एक अनुमान के आधार पर है। हकीकत इसी महीने की 18 तारीख को सबके सामाने आने वाली है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

मिडिल ईस्ट की जंग: क्या दुनिया की इंटरनेट नसों पर कब्ज़े की लड़ाई शुरू हो चुकी है?

KKN ब्यूरो। क्या आपने कभी सोचा है कि मिडिल ईस्ट की हर जंग का...

क्या दुश्मन भारत का सैटेलाइट गिरा सकता है? क्या है स्पेस वॉर का खतरनाक सच

कल्पना कीजिए—अगर अचानक भारत का कोई सैटेलाइट अंतरिक्ष में काम करना बंद कर दे...

क्या तेहरान से शुरू होगी नई विश्व व्यवस्था? जानिए मिडिल ईस्ट की जंग का असली खेल

मिडिल ईस्ट में उठती युद्ध की लपटें क्या सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई हैं… या...

क्या अंग्रेजों की ‘सबसे खतरनाक दुश्मन’ थीं रानी लक्ष्मीबाई?

क्या सचमुच रानी लक्ष्मीबाई ने महिलाओं की अलग सैन्य टुकड़ी बनाई थी? क्यों अंग्रेजी...

More like this

क्या मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुई अमेरिका की दादागिरी?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया एक बार फिर उसी खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां...

क्या नीतीश कुमार का दौर खत्म होने वाला है और क्या बीजेपी लिख रही है नई सत्ता की पटकथा?

पटना की राजनीति में अचानक क्यों तेज हुई फुसफुसाहट? KKN ब्यूरो। क्या बिहार में फिर...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए प्रशांत किशोर, 8 फरवरी से शुरू करेंगे बिहार यात्रा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के नेता...

झपहां बने मुजफ्फरपुर का पूर्वी अनुमंडल?

मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा में उठी मांग, विधायक अजय कुमार की मांग के मायने...

बाजार समिति कार्यक्रम में महिलाओं के स्टॉल पर सबसे अधिक समय बिताया मुख्यमंत्री ने

बाजार समिति परिसर में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद सभी महिलाएं चाह...

आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे

बिहार की राजनीति में नई सरकार के गठन के बाद एक महत्वपूर्ण हलचल देखने...

पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 91 वर्ष की आयु में निधन

केंद्रीय गृह मंत्री रहे शिवराज पाटिल का 91 वर्ष की आयु में निधन हो...

बिहार पंचायत चुनाव 2026: ईवीएम से मतदान और आरक्षण में बदलाव की तैयारी

बिहार में 2026 में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई...

बिहार विधानसभा शीतकालीन सत्र : चौथे दिन की कार्यवाही और महत्वपूर्ण घटनाएँ

बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज अपने चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है।...

बिहार विधानसभा ‘मिथिलामय’ हो गई, 14 विधायकों ने मैथिली में शपथ ली

18वीं बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र का उद्घाटन सोमवार को बिहार की सांस्कृतिक विविधता...

कांग्रेस की हार पर मंथन के बीच दिल्ली रवाना हुए तेजस्वी यादव

बिहार के महागठबंधन (ग्रैंड अलायंस) को हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में करारी...

कंगना रनौत का बयान : पीएम मोदी के नेतृत्व में सनातन धर्म और राष्ट्र की गरिमा का उभार

हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने...

प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी की हार पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘लालू के जंगलराज का डर’

बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी नवगठित पार्टी जन सुराज की करारी हार के बाद,...

प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान : जन सुराज के लिए अपनी सारी संपत्ति दान की

जन सुराज पार्टी (जेएसपी) के नेता प्रशांत किशोर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है।...