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रजनीकांत ने की नई पारी की शुरूआत

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तमिलनाडु में करेंगे राजनीति

तमिलनाडु। मशहूर एक्टर रजनीकांत ने अपने नई पारी की शुरूआत करने की घोषणा कर दी है। दरअसल, फिल्म में अपने दमदार भूमिका को लेकर रूपहले पर्दे पर धाख जमाने के बाद रजनीकांत ने अब राजनीति में आने की घोषणा कर दी है। कहतें हैं कि दक्षिण भारत के मशहूर एक्टर रजनीकांत ने राजनीति में एंट्री का ऐलान कर तमिलनाडु की राजनीति को गरमा दिया है। रजनी तमिल और हिन्दी में कई फिल्में कर एक्शन हीरो के तौर पर जाने जाते हैं। दक्षिण भारत में उनकी जो शोहरत है, उसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि उन्हें वहां भगवान की तरह पूजा जाता है और लाखों की संख्या में उनके फैन्स हैं। रजनीकांत भले ही तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने का संकेत दिया हो, लेकिन उनका पिछला बैकग्राउंड बड़ा दिलचस्प है।

अधिकतर तमिल फिल्मों में अपने एक्शन से धूम मचने वाले रजनीकांत की पारिवारिक पृष्ठभूमि महाराष्ट्र की है। रजनीकांत का पूरा नाम है शिवाजी राव गायकवाड़। उनका जन्म 12 दिसंबर 1950 को बेंगलुरु में एक मराठा परिवार में हुआ। उनकी माता एक हाउस वाइफ थीं, जबकि पिता पुलिस कांस्टेबल थे। माता-पिता ने रजनीकांत का नाम मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा गया था। वह अपने घर में मराठी और बाहर कन्नड़ भाषा बोलते थे। वह चारों भाई बहनों में सबसे छोटे हैं। उनसे बड़े दो भाई हैं सत्यनारायण राव और नागेश्वर राव, जबकि बहन का नाम है अस्वथ बालुभाई।

स्कूल के दौरान ही कला में थी गहरी रूचि

रजनीकांत के पिता 1956 में नौकरी से रिटायरमेंट के बाद बेंगलुरू के हनुमंत नगर में एक मकान बना लिया। जिस वक्त रजनीकांत महज 9 साल के थे उस समय उनकी मां इस दुनिया से चल बसी। छह साल की आयु मे रजनीकांत का गविपुरम गवर्नमेंट कन्नड़ मॉडल प्राइमरी स्कूल में दाखिला करवा दिया गया, यहीं से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा हासिल की। बचपन में उनकी क्रिकेट, फुटबॉल और बास्केटबॉल में गहरी रुचि थी। उनके बड़े भाई ने उन्हें रामकृष्ण मिशन की तरफ से चलाए जा रहे रामकृष्ण मठ में दाखिला करवा दिया। मठ में उन्हें वेद और पौराणिक ग्रंथ पढ़ाए जानें लगे। इस दौरान रजनीकांत पौराणिक ग्रंथों की पढ़ाई के साथ ही मठ में नाटकों में भी हिस्सा लेने लगे।
मठ में नाटकों के प्रति रजनीकांत की रूचि और बढ़ने लगी। उन्हें एक बार महाभारत के मंचन के दौरान उन्हें एकलव्य के मित्र की भूमिका दी गई। इस भूमिका में उनके काम को काफी सराहा गया। उसके बाद रजनीकांत आचार्य पाठशाला पब्लिक स्कूल में दाखिल हुए। इस स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्होंने एक्टिंग में काफी समय दिया। एक बार उन्हें कुरुक्षेत्र नाटक के मंचन में दुर्योधन की भूमिका दी गई। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद रजनीकांत ने बेंगलुरु और मद्रास में कुली और कारपेंटर समेत कई तरह की नौकरियां की। बाद में उनका बेंगलुरू ट्रांसपोर्ट सर्विस में बस कंडक्टर के तौर पर चयन हुआ।
उसी दौरान मद्रास फिल्म इंस्टीट्यूट ने एक्टिंग कोर्स की शुरुआत हुई। हालांकि, रजनीकांत की अभिनय में रुचि के बावजूद उनका परिवार इस बात को लेकर उतना उत्सुक नहीं था। इस दौरान उनके दोस्त राज बहादुर ने उनका उत्साह बढ़ाया और वित्तीय मदद की। इंस्टीट्यूट में कोर्स करते वक्त वह स्टेज शो करने लगे। इसी दौरान तमिल फिल्म डायरेक्टर के. बालाचंदर की नज़र उन पर गई। डायरेक्टर बालचंद्र ने उनसे तमिल सीखने के लिए कहा, जिसे वह फौरन मान गए। उसके बाद बालचंद्र ने उन्हें अपनी कई फिल्मों में मौका दिया। रजनीकांत ने करीब 150 से ज्यादा फिल्में की हैं, जिनमें बॉलीवुड, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और बेंगाली फिल्में शामिल हैं।

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