शनिवार, जून 6, 2026 9:07 अपराह्न IST
होमNationalक्या राजनितिक संकीर्णता की पराकाष्ठा पार हो रहा है ?

क्या राजनितिक संकीर्णता की पराकाष्ठा पार हो रहा है ?

Published on

राजकुमार सहनी

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्र कितनी महत्वपूर्ण है, इसका पता इससे भी चला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोटोकॉल की अनदेखी कर हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने खुद गए। एक तरह से यह देश के लोगों को चौकाने वाला कदम साबित हुआ लोगों के तरफ से प्रधानमंत्री को खूब वाहवाही मिली। वे यातायात के नियमों का पालन करते दिखे और किसी भी मार्ग को तनिक भी प्रभावित नहीं होने दिया। शेख हसीना की इस यात्र के दौरान दोनों देशों के बीच कम से कम दो दर्जन समझौते होने की उम्मीद है।
ये समझौते दोनों देशों के बीच केवल आर्थिक-व्यापारिक सहयोग को ही गति नहीं देंगे, बल्कि एक-दूसरे के प्रति भरोसे को भी बढ़ाएंगे। बांग्लादेश के साथ प्रस्तावित असैन्य परमाणु सहयोग के साथ रक्षा सहयोग संबंधी समझौते भारतीय हितों की पूर्ति में खास तौर पर सहायक बनेंगे। स्वाभाविक तौर पर इसे रेखांकित नहीं किया जा रहा। लेकिन, यह स्पष्ट ही है कि ये समझौते बांग्लादेश में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने का भी काम करेंगे। चूंकि, चीन भारत की चिंताओं को दूर करने के बजाय उन्हें बढ़ाने का काम कर रहा है इसलिए दक्षिण एशिया में उसके अनावश्यक दखल के प्रति अतिरिक्त सावधानी बरतना समय की मांग है। इससे बेहतर और कुछ नहीं कि बांग्लादेश सरकार इस मांग को पूरा करने में सहायक बन रही है। चूंकि, शेख हसीना भारत की शुभचिंतक हैं इसलिए भारत सरकार की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वह बांग्लादेश की चिंताओं का समाधान करने के मामले में सक्रियता दिखाए। द्विपक्षीय रिश्ते ऐसे ही मजबूत होते हैं। दुर्भाग्य से इसमें संकीर्ण राजनीति आड़े आती दिख रही है।
बांग्लादेश के साथ तीस्ता नदी जल के बंटवारे को लेकर समझौता शायद इस बार भी न हो? क्योंकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर अड़ियल रवैया अपना रखा है। माना जा रहा है कि इसी अड़ियल रवैये के कारण शेख हसीना की भारत यात्र में देरी हुई। ममता बनर्जी इस नदी के जल बंटवारे संबंधी समझौते पर 2011 से ही नकारात्मक रवैया अपनाए हुए हैं। हालांकि ममता बनर्जी इससे अच्छी तरह अवगत हैं कि तीस्ता नदी पर समझौते में देरी बांग्लादेश में एक राजनीतिक मसला बनती जा रही है और इसके चलते शेख हसीना के समक्ष मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। लेकिन इसके बावजूद वह अपने रुख पर अड़ी हैं।
ध्यान रहे कि सीमा संबंधी समझौते पर भी उन्होंने मुश्किल से हामी भरी थी। इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ नहीं कि ममता बनर्जी संकीर्ण राजनीतिक कारणों से विदेश नीति में बाधक बनें। विदेश नीति के मामले में राज्य सरकारों की अपनी कोई राय तो हो सकती है। लेकिन, इसका कोई औचित्य नहीं कि वे उसे अपने हिसाब से नियंत्रित-निर्देशित करने की कोशिश करें। पश्चिम बंगाल सरकार ठीक यही कर रही है। ममता का यह नकारात्मक रवैया जहां विकास के मार्ग में बाधक बनता है रहा है। वही, इससे वेपरवाह होकर ममता अपने रुख पर कायम रहने की हर संभव कोशिश करती दिख रही है। जिससे देश का छवि दागदार हो ऐसे संकीर्ण कदम उठाने में वह तनिक भी नहीं हिचक रही है।
इसके पहले श्रीलंका के मामले में तमिलनाडु सरकार भी ऐसा कर चुकी है। ममता सरकार अपने रुख-रवैये से इसी धारणा को पुष्ट कर रही है कि क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय महत्व के मसलों पर संकुचित दृष्टिकोण अपनाते हैं। विडंबना यह है कि ममता बनर्जी तीस्ता नदी के साथ पद्मा नदी के जल बंटवारे संबंधी समझौते को लेकर भी आनाकानी करती दिखा रही हैं। यह असहयोग और अहंकार भरी राजनीति की पराकाष्ठा ही है कि वह बांग्लादेश और भारतीय प्रधानमंत्री की अगुवाई में होने वाली आधिकारिक वार्ता में शामिल होने से भी इन्कार कर रही हैं। अच्छा हो कि वह यह समझे कि किसी मुख्यमंत्री को ऐसा रवैया शोभा नहीं देता।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

श्रेष्ठता का भ्रम: जब गाली, दोषारोपण और अपमान बन जाते हैं सामाजिक फैशन

क्या दूसरों को नीचा दिखाकर कोई वास्तव में बड़ा बन सकता है? KKN ब्यूरो। आज...

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

भारत–बांग्लादेश सीमा पर तेज हुई फेंसिंग, लेकिन क्यों बढ़ रहा है तनाव?

KKN ब्यूरो। भारत ने बांग्लादेश सीमा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में...

More like this

भारत का भविष्य: कौन-कौन से खतरे दरवाजे पर खड़े हैं? और क्या भारत तैयार है?

KKN ब्यूरो। भारत 21वीं सदी की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।...

हिन्दी पत्रकारिता: मिशन से बाज़ार तक का सफर

क्या हिन्दी पत्रकारिता आज भी जनता की आवाज़ है? हिन्दी पत्रकारिता दिवस विशेष KKN ब्यूरो। क्या...

बिहार में ‘सम्राट कैबिनेट’ का बड़ा दांव, निशांत को स्वास्थ्य तो बीजेपी के पास गई शिक्षा की कमान

KKN ब्यूरो। बिहार की नई सत्ता व्यवस्था अब पूरी तरह आकार ले चुकी है।...

क्या बिहार में बदलेगी सत्ता की स्क्रिप्ट या दोहराएगा इतिहास?

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति में सचमुच एक युग का अंत और दूसरे...

बिहार में RTI सिस्टम ध्वस्त! 30,000 अपीलें लंबित, हाई कोर्ट सख्त—क्या खत्म हो रही पारदर्शिता?

KKN ब्यूरो। बिहार में पारदर्शिता की रीढ़ मानी जाने वाली सूचना का अधिकार (RTI)...

नीतीश युग का अंत या नई शुरुआत? सम्राट चौधरी के हाथों में बिहार की सत्ता का नया समीकरण

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है…...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

क्या मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुई अमेरिका की दादागिरी?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया एक बार फिर उसी खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां...

क्या नीतीश कुमार का दौर खत्म होने वाला है और क्या बीजेपी लिख रही है नई सत्ता की पटकथा?

पटना की राजनीति में अचानक क्यों तेज हुई फुसफुसाहट? KKN ब्यूरो। क्या बिहार में फिर...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...
00:10:10

क्या चीन-बांग्लादेश की साज़िश से घिर गया भारत? सिलिगुड़ी कॉरीडोर पर क्यों मंडराया खतरा

भारत का सबसे संवेदनशील इलाका — सिलिगुड़ी कॉरीडोर, जिसे दुनिया चिकेन नेक के नाम...

Pariksha Pe Charcha 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से की सीधी बातचीत

Pariksha Pe Charcha 2026 का आगाज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के...

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए प्रशांत किशोर, 8 फरवरी से शुरू करेंगे बिहार यात्रा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के नेता...

Budget 2026 : महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा बजट, She Mart और लखपति दीदी को नई रफ्तार

केंद्रीय बजट 2026 में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर...

Union Budget 2026–27: बजट के बाद क्या सस्ता हुआ, क्या हुआ महंगा

देश की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने रविवार को लोकसभा में वर्ष 2026–27 का...