शनिवार, मई 16, 2026 10:13 पूर्वाह्न IST
होमNationalसंविधान सभा के समापन भाषण में बाबा साहब ने क्या कहा था

संविधान सभा के समापन भाषण में बाबा साहब ने क्या कहा था

Published on

आज भी प्रासंगिक है बाबा साहेब के विचार

KKN न्यूज ब्यूरो। बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर ने संविधान सभा के समापन भाषण में जो कहा था, वह आज भी प्रासंगिक है। वह 25 नवंबर 1949 की तारीख थी। इतिहास में 25 नवंबर की तारीख स्वतंत्र भारत की एक बड़ी महत्वपूर्ण घटना के साथ दर्ज है। 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा की आख़िरी बैठक में बाबा साहब डॉ. भीम राव आंबेडकर ने समापन भाषण दिया था। यहां यह उल्लेखनीय है कि बाबा साहब ने उस समय जिन चुनौतियों को राष्ट्र निर्माण में बाधक करार दिया था, वह आज भी उतनी ही विकरालता के साथ देश के सामने मौजूद है। यह उनकी दूरदर्शिता ही थी कि वह संविधान सभा के आख़िरी भाषण में आर्थिक और सामाजिक गैरबराबरी के ख़ात्मे को राष्ट्रीय एजेंडे के रूप में सामने लाने की कोशिश कर रहे थे।

संविधान पालन करने वालों की नीयत पर सवाल

संविधान सभा के समापन सत्र को संबोधित करते हुए बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा था – महोदय… संविधान सभा के कार्य पर नजर डालते हुए 9 दिसंबर 1946 को हुई इसकी पहली बैठक के बाद से अब तक दो वर्ष, ग्यारह महीने और सत्रह दिन बीत चुका है। संविधान सभा की प्रारूप समिति ने मुझे इसका अध्यक्ष निर्वाचित किया तो यह मेरे लिए आश्चर्य से भी परे था। मैं समझता हूं कि कोई संविधान चाहे जितना अच्छा हो, वह बुरा साबित हो सकता है। यदि, उसका अनुसरण करने वाले लोग बुरे हों। ठीक इसके विपरित एक संविधान चाहे जितना बुरा हो, वह अच्छा साबित हो सकता है। यदि, उसका पालन करने वाले लोग अच्छे हों…। यह मौजू आज भी प्रासंगिक है।

जिम्मेदारियों पर देना होगा ध्यान

बाबा साहेब ने संविधान सभा में दिये गये भाषण में कहा था कि स्वतंत्रता आनंद का विषय है। पर, अब हमें अपनी जिम्मेदारियों पर भी ध्यान देना होगा। महात्मा गांधी और बाबासाहेब दोनों ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सामाजिक निर्माण पर बल दिया था। बाबासाहेब का मानना था की राजनीतिक प्रजातंत्र के साथ हमें सामाजिक प्रजातंत्र की भी आवश्यकता है। वह कहते थे कि सामाजिक प्रजातंत्र एक ऐसी जीवन पद्धति है, जिसमें स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को जीवन के सिद्धांतों के रूप में अपनाया जाता है। सामाजिक धरातल पर भारत में बहुस्तरीय असमानता है। जिस समाजवाद की बात बाबासाहेब अपने भाषण और वक्तव्यों में करते हैं, उसे उनके कथित उत्तराधिकारियों ने सिर्फ एक वर्ग विशेष का समाजवाद बना कर आज राजनीतिक स्थायित्व की खोज में हैं। वे मानते थे कि यदि हमें वास्तव में एक राष्ट्र बनना है तो इन कठिनाइयों पर विजय पानी होगी। क्योंकि, बंधुत्व तभी स्थापित हो सकता है, जब हमारा एक राष्ट्र हो।

सामाजिक समानता को लेकर बाबा साहेब

डॉ. अम्बेडकर समानता को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे। उनका मानना था कि समानता का अधिकार धर्म और जाति से ऊपर होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी समाज की प्रथम और अंतिम नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अगर समाज इस दायित्व का निर्वहन नहीं कर सके, तो उसे बदल देना चाहिए। वे मानते थे कि समाज में यह बदलाव सहज नहीं होता है। इसके लिए कई पद्धतियों को अपनाना पड़ता है। आज जब विश्व एक तरफ आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ विश्व में असमानता की घटनाएँ भी देखने को मिल रही हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि असमानता प्राकृतिक है। जिसके चलते व्यक्ति का रंग, रूप, लम्बाई तथा बुद्धिमता आदि में एक-दूसरे से भिन्नता स्वभाविक है। लेकिन समस्या मानव द्वारा बनायी गई असमानता से है। जिसके तहत एक वर्ग, रंग व जाति का व्यक्ति अपने आप को अन्य से श्रेष्ठ समझता है और संसाधनों पर अपना अधिकार जमाता है। भारत में इस स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 14 से 18 में समानता के अधिकार का प्रावधान करते हुए समान अवसरों की बात कही गई है। सभी को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए ही शोषित और दबे-कुचले समाज के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार डॉ. अम्बेडकर के समानता के विचार न सिर्फ उन्हें भारत के संदर्भ में, बल्कि विश्व के संदर्भ में भी प्रासंगिक बनाता हैं।

महिलाओं के संबंध में बाबा साहेब

डॉ अम्बेडकर भारतीय समाज में स्त्रियों की हीन दशा को लेकर काफी चिंतित थे। उनका मानना था कि स्त्रियों के सम्मानपूर्वक तथा स्वतंत्र जीवन के लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। डॉ. अम्बेडकर ने हमेशा स्त्री-पुरुष समानता का व्यापक समर्थन किया। यही कारण है कि उन्होंने स्वतंत्र भारत के प्रथम विधिमंत्री रहते हुए ‘हिंदू कोड बिल’ संसद में प्रस्तुत किया और हिन्दू स्त्रियों के लिए न्याय सम्मत व्यवस्था बनाने के लिए इस विधेयक में उन्होंने व्यापक प्रावधान रखे। उल्लेखनीय है कि संसद में अपने हिन्दू कोड बिल मसौदे को रोके जाने पर उन्होंने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इस मसौदे में उत्तराधिकार, विवाह और अर्थव्यवस्था के कानूनों में लैंगिक समानता की बात कही गई थी। दरअसल स्वतंत्रता के इतने वर्ष बीत जाने के पश्चात व्यावहारिक धरातल पर इन अधिकारों को हूबहू लागू नहीं किया जा सका है। वहीं, आज भी महिलाएँ उत्पीड़न, लैंगिक भेदभाव और हिंसा की शिकार होती है। बाबा साहेब ने महिलाओं को समान कार्य के लिए समान वेतन, दहेज उत्पीड़न और संपत्ति में अधिकार देने की बात कही थी। हालांकि, इनमें से कई बात आज के संदर्भ में लागू है। इस संदर्भ में ध्यान देने वाली बात है कि हाल ही में समान नागरिक संहिता का प्रश्न पुनः उठाया गया है। उसका व्यापक पैमाने पर विरोध भी हुआ। जबकि बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने समान नागरिक संहिता का प्रबल समर्थन किया था।

शिक्षा पर बाबा साहेब के विचार

डॉ. अम्बेडकर शिक्षा के महत्व से भली-भाँति परिचित थे। उनका विश्वास था कि शिक्षा ही व्यक्ति में यह समझ विकसित करती है कि वह अन्य से अलग नहीं है। उसके भी समान अधिकार हैं। उन्होंने एक ऐसे राज्य के निर्माण की बात रखी, जहां सम्पूर्ण समाज शिक्षित हो। वे मानते थे कि शिक्षा ही व्यक्ति को अंधविश्वास, झूठ और आडम्बर से दूर करती है। हालांकि, उनका यह भी यह भी मानना था कि शिक्षा का मतलब महज कुछ ज्ञान प्राप्त कर लेना मात्र नहीं है। बल्कि, शिक्षा का उद्देश्य लोगों में नैतिकता व जनकल्याण की भावना को विकसित करना होना चाहिए। शिक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो विकास के साथ-साथ चरित्र निर्माण में भी योगदान दे सके। आज के दौर भी स्कूली शिक्षा बाबा साहेब के विचारों की कसौटी पर खड़ी नहीं उतर रही है। कहतें है कि डॉ. अम्बेडकर के शिक्षा संबंधित यह विचार आज शिक्षा प्रणाली के आदर्श रूप माने जाते हैं। उन्हीं के विचारों का प्रभाव है कि आज संविधान में शिक्षा के प्रसार में जातिगत, भौगोलिक व आर्थिक असमानताएं बाधक न बन सके, इसके लिए मूल अधिकार के अनुच्छेद 21-A के तहत शिक्षा के अधिकार का प्रावधान किया गया है।

आर्थिक क्षेत्र के बारे में बाबा साहेब क्या कही

अम्बेडकर ने 1918 में प्रकाशित अपने लेख भारत में छोटी जोत और उनके उपचार में भारतीय कृषि तंत्र का स्पष्ट अवलोकन किया है। उन्होंने भारतीय कृषि तंत्र का आलोचनात्मक परीक्षण करके कुछ महत्वपूर्ण परिणाम निकाले है। जिनकी प्रासंगिकता आज तक बनी हुई है। उनका मानना था कि यदि कृषि को अन्य आर्थिक उद्यमों के समान माना जाए तो बड़ी और छोटी जोतों का भेद समाप्त हो जाएगा। इससे कृषि क्षेत्र में खुशहाली आएगी। उनके एक अन्य शोध ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकास की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने इस शोध में देश के विकास के लिए एक सहज कर प्रणाली पर बल दिया था। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन सरकारी राजकोषीय व्यवस्था को स्वतंत्रत कर देने का विचार दिया था। भारत में आर्थिक नियोजन तथा समकालीन आर्थिक मुद़दे व दीर्घकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जिन संस्थानों को स्वतंत्रता के पश्चात स्थापित किया गया उनकी स्थापना में डॉ. अम्बेडकर का अहम योगदान माना जाता है।

बाबा साहेब की दूरदर्शी अवधारणा

बाबा साहेब के जीवन पर गौर करें तो पता चलता है कि उनके सामाजिक चिन्तन में अस्पृश्यों, दलितों तथा शोषित वर्गों के उत्थान के लिए काफी संभावना झलकती है। वे उनके उत्थान के माध्यम से एक ऐसा आदर्श समाज स्थापित करना चाहते थे, जिसमें समानता, स्वतंत्रता तथा भ्रातृत्व के तत्व समाज के आधारभूत सिद्धांत हों। बाबा साहेब जिस प्रकार से आज प्रासंगिक होते जा रहें हैं वह शायद ही पहले कभी दृष्टिगोचर हुआ हो। आज हर एक आंदोलन में आप प्रायः बाबासाहेब की प्रतिमा के साथ संचालित होते हुए देख सकते हैं। क्योंकि, इतने सालों बाद बाबासाहेब का साहित्य और उनका दर्शन जनमानस तक आसानी से पहुंच रहा है। उनके विचार आज किसी न किसी माध्यम से जनता तक सुलभ हो रहा है। बाबासाहेब की दूरदर्शिता भी उनको आज के समय में प्रासंगिकता प्रदान करती है। अगर इनके विचारों को अमल में लायें तो समाज की ज्यादातर समस्याएं जैसे वर्ण, जाति, लिंग, आर्थिक, राजनैतिक व धार्मिक सभी पहलुओं पर पैनी नजर रखी जा सकती है। साथ ही न्यू इंडिया के लिए एक नया मॉडल व डिजाइन भी तैयार किया जा सकता है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

जानिए, क्या है मुजफ्फरपुर की शाही लीची का रहस्य

क्या आपने कभी सोचा है कि बिहार के मुजफ्फरपुर की शाही लीची को पूरी...

बिहार में ‘सम्राट कैबिनेट’ का बड़ा दांव, निशांत को स्वास्थ्य तो बीजेपी के पास गई शिक्षा की कमान

KKN ब्यूरो। बिहार की नई सत्ता व्यवस्था अब पूरी तरह आकार ले चुकी है।...

चांडिल डैम का डरावना सच | क्या सच में सुनाई देती हैं चीखें?

क्या सच में Chandil Dam के आसपास रात में रहस्यमयी आवाजें सुनाई देती हैं?...

दशम, हुण्डरू और रजरप्पा फॉल की अनसुनी सच्चाई

क्या आपने कभी सोचा है कि पानी सिर्फ बहता नहीं… बल्कि गरजता भी है?...

More like this

बिहार में ‘सम्राट कैबिनेट’ का बड़ा दांव, निशांत को स्वास्थ्य तो बीजेपी के पास गई शिक्षा की कमान

KKN ब्यूरो। बिहार की नई सत्ता व्यवस्था अब पूरी तरह आकार ले चुकी है।...

क्या बिहार में बदलेगी सत्ता की स्क्रिप्ट या दोहराएगा इतिहास?

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति में सचमुच एक युग का अंत और दूसरे...

बिहार में RTI सिस्टम ध्वस्त! 30,000 अपीलें लंबित, हाई कोर्ट सख्त—क्या खत्म हो रही पारदर्शिता?

KKN ब्यूरो। बिहार में पारदर्शिता की रीढ़ मानी जाने वाली सूचना का अधिकार (RTI)...

नीतीश युग का अंत या नई शुरुआत? सम्राट चौधरी के हाथों में बिहार की सत्ता का नया समीकरण

KKN ब्यूरो। क्या बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है…...
00:07:59

कर्ज में डूबे राज्य, फिर भी मुफ्त योजनाएं क्यों?

क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव आते ही अचानक मुफ्त योजनाओं की बाढ़...

क्या मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुई अमेरिका की दादागिरी?

KKN ब्यूरो। क्या दुनिया एक बार फिर उसी खतरनाक मोड़ पर खड़ी है, जहां...

क्या नीतीश कुमार का दौर खत्म होने वाला है और क्या बीजेपी लिख रही है नई सत्ता की पटकथा?

पटना की राजनीति में अचानक क्यों तेज हुई फुसफुसाहट? KKN ब्यूरो। क्या बिहार में फिर...

INDIA गठबंधन में ‘साइलेंट क्राइसिस? 2026 से पहले बदलते सियासी समीकरण क्या है

KKN ब्यूरो। भारत की राजनीति एक बार फिर संक्रमण काल में है। लोकसभा चुनाव 2024...
00:10:10

क्या चीन-बांग्लादेश की साज़िश से घिर गया भारत? सिलिगुड़ी कॉरीडोर पर क्यों मंडराया खतरा

भारत का सबसे संवेदनशील इलाका — सिलिगुड़ी कॉरीडोर, जिसे दुनिया चिकेन नेक के नाम...

Pariksha Pe Charcha 2026 : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से की सीधी बातचीत

Pariksha Pe Charcha 2026 का आगाज हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के...

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए प्रशांत किशोर, 8 फरवरी से शुरू करेंगे बिहार यात्रा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद जन सुराज पार्टी के नेता...

Budget 2026 : महिलाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा बजट, She Mart और लखपति दीदी को नई रफ्तार

केंद्रीय बजट 2026 में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने पर...

Union Budget 2026–27: बजट के बाद क्या सस्ता हुआ, क्या हुआ महंगा

देश की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने रविवार को लोकसभा में वर्ष 2026–27 का...

Tatkal Ticket New Rules 2026 : तत्काल टिकट बुकिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव

 Indian Railways ने Tatkal Ticket Booking प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के...

अजित पवार का अंतिम संस्कार : राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, शोक में डूबा महाराष्ट्र

महाराष्ट्र की राजनीति ने गुरुवार को एक बड़े और अपूरणीय नेता को खो दिया।...