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ट्रंप के टैरिफ का भारत पर प्रभाव: व्यापार, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक साझेदारी पर संकट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क और अतिरिक्त जुर्माना लगाए जाने की घोषणा ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नई चुनौती खड़ी कर दी है। यह फैसला 1 अगस्त से प्रभावी होगा, जिससे भारतीय वस्तुओं और सेवाओं का अमेरिका में निर्यात महंगा हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को सीधा झटका लगेगा और अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की मांग में तेज गिरावट आ सकती है।

भारतीय निर्यात को झटका, बढ़ेगा दबाव

ट्रंप सरकार के इस फैसले से भारत का निर्यात क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होगा। अप्रैल में ही ट्रंप ने भारत पर 26% शुल्क लगाने की बात कही थी, जिसे बाद में टालते हुए जुलाई तक के लिए राहत दी गई। अब इस राहत की अवधि समाप्त होते ही 25% शुल्क और अतिरिक्त जुर्माना लागू करने की घोषणा कर दी गई है।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 500 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। हालांकि, अब यह समझौता कई स्तरों पर अटका हुआ है और इसकी संभावना धूमिल होती दिख रही है।

मोदी-ट्रंप वार्ता के बाद भी नहीं निकला हल

फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात में द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद पांच दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। पांचवां दौर वाशिंगटन में हुआ, पर बात आगे नहीं बढ़ी। अब छठे दौर की वार्ता 25 अगस्त से भारत में होनी है।

किन मुद्दों पर अटका समझौता

विवाद के प्रमुख बिंदुओं में अमेरिका की मांग है कि भारत उसके डेयरी और कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क घटाए। अमेरिका चाहता है कि उसके उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ती दरों पर मिलें। वहीं, भारत इस पर सहमत नहीं है क्योंकि इससे घरेलू किसान और उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।

भारत इन संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखने या उन पर सीमित रियायत देने की पक्षधर है। देश के किसान संगठन भी सरकार से मांग कर चुके हैं कि ऐसे किसी भी समझौते से बचा जाए जिससे उनकी आय पर असर पड़े।

भारत की मांगें क्या हैं

भारत की ओर से श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए विशेष शुल्क रियायत की मांग की जा रही है। इनमें वस्त्र, रत्न-आभूषण, चमड़ा, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, अंगूर और केले जैसे उत्पाद शामिल हैं। भारत चाहता है कि अमेरिका अतिरिक्त 26% शुल्क हटाए और स्टील, एल्युमिनियम तथा ऑटो सेक्टर पर लगने वाले भारी टैक्स में भी कमी लाए।

इन क्षेत्रों से जुड़े उद्योग देश में लाखों लोगों को रोजगार देते हैं और भारत के निर्यात में इनकी हिस्सेदारी अहम है।

अमेरिका किन शर्तों पर अड़ा है

अमेरिका चाहता है कि भारत औद्योगिक उत्पाद, इलेक्ट्रिक वाहन, वाइन, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि और डेयरी उत्पादों, सेब तथा जीन संशोधित फसलों पर शुल्क कम करे। भारत कुछ क्षेत्रों में सीमित रियायत देने को तैयार है, लेकिन कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर में वह कोई छूट नहीं देना चाहता।

किसानों का कहना है कि अमेरिकी उत्पाद सस्ते दामों पर बाजार में आने से उन्हें नुकसान होगा और देश के छोटे किसानों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।

अमेरिका बना रहा है दबाव: विशेषज्ञों की राय

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर अरुण कुमार का कहना है कि ट्रंप प्रशासन अपने अनुसार वैश्विक व्यापार समझौतों को ढालना चाहता है। उनके अनुसार, आयात शुल्क और जुर्माने की यह नीति दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

प्रो. कुमार ने यह भी कहा कि भारत पर दबाव डालने का एक अन्य कारण रूस से कच्चा तेल खरीदना भी है। अमेरिका रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकना चाहता है और वह भारत को रूस से व्यापार कम करने के लिए बाध्य कर रहा है। इस रणनीति का हिस्सा बनकर ही यह शुल्क लगाया गया है।

व्यापार समझौते की दिशा अनिश्चित

अब 25 अगस्त से भारत में छठे दौर की वार्ता होनी है, जिसमें अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भाग लेगा। हालांकि, अमेरिका की तरफ से संकेत मिल चुके हैं कि वाशिंगटन अब समझौते को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। इससे साफ है कि राजनीतिक प्राथमिकताएं बदल गई हैं और ट्रंप प्रशासन कड़ा रुख अपना रहा है।

ट्रंप के टैरिफ से संभावित असर

  1. निर्यात में गिरावट
    2023-24 में भारत ने अमेरिका को 77.5 अरब डॉलर मूल्य का सामान निर्यात किया था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2 से 7 अरब डॉलर तक की सालाना गिरावट संभव है।

  2. रुपये पर दबाव
    रुपया पहले से ही 87.5 के स्तर पर है और अब इसके 88 पार जाने की आशंका है, जिससे आयात महंगे हो सकते हैं।

  3. आम लोगों पर असर
    मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वेलरी जैसी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, क्योंकि ये भारत से अमेरिका जाती हैं। साथ ही, NRI द्वारा भेजे जाने वाले उपहार भी महंगे हो सकते हैं।

  4. आईटी सेवाएं प्रभावित
    भारतीय कंपनियों की अमेरिका में दी जाने वाली सेवाओं पर कर का बोझ बढ़ सकता है। इससे इनकी प्रतिस्पर्धा घटेगी।

  5. रणनीतिक साझेदारी को झटका
    ट्रेड तनाव का असर क्वाड और रक्षा सहयोग जैसे रणनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

  6. शेयर बाजार में गिरावट की आशंका
    फार्मा, आईटी और एक्सपोर्ट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी जा सकती है। निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति भारत के लिए चुनौतीपूर्ण है। इससे न केवल व्यापार बल्कि कूटनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। अब भारत के सामने यह सवाल है कि क्या वह घरेलू हितों की रक्षा करते हुए एक संतुलित समझौता कर पाएगा या फिर अमेरिका के दबाव में आकर नीतियों में बदलाव करेगा।

जैसे-जैसे 25 अगस्त की वार्ता नजदीक आ रही है, यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस गतिरोध से बाहर निकलकर सहयोग का नया रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं। यह फैसला भारत के आर्थिक भविष्य और वैश्विक व्यापार में उसकी स्थिति को भी तय करेगा।

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