बुधवार, जनवरी 14, 2026 6:55 अपराह्न IST
होमKKN Special14 वर्षो के "वनवास" में भी मिल रही मां की ममता

14 वर्षो के “वनवास” में भी मिल रही मां की ममता

कुदरत लेता रहा परीक्षा और उतीर्ण होती रही सुनिता/ सात रोज तक भूखे प्यासे रह कर दूसरे के घर लिया शरण/ बच्चो के खुशी मे भूल गया अपना दर्द/ 14 साल तक दूसरे के मकान मे शरण लेकर किया गुजर बसर/ उड़द का बरी बेचकर बच्चे को बनाया ग्रेजुएट

संतोष कुमार गुप्ता

मीनापुर। माई के दूधवा अइसन केहूं के मीठाई ना होई.जे अभागा होई हे उनका घर मे माई ना होई।  आज मदर्स डे है। ग्रामीण इलाको मे आज भी मां की ममता की कोई सानी नही है। लेकिन टेंगरारी गांव के सुनिता देवी की जिंदगी की कहानी सुनकर आपके रोगंटे खड़े हो जायेंगे।

सुनिता के ममता का कुदरत लगातार परीक्षा ले रहा था। वह इस परीक्षा मे पास होती रही। सुनिता देवी अब खुशी सीएलएफ से जुड़कर दीपक जीविका ग्राम संगठन के अंतर्गत नारायण स्वंय सहायता समूह के सदस्य के रूप मे महिलाओ के लिए नजीर बन गयी है। अब वह दुखो के पहाड़ से निकल चुकी है। घर से निकाले जाने के बाद वह 14 साल दूसरे के मकान मे रहने के बाद उसने पांच लाख रूपये की लागत से नया आशियाना तैयार कर लिया है।  बस गृहप्रवेश करना बाकी है। खराब समय को झेलते हुए उसने बड़ी बेटी प्रियंका को स्नातक फाइनल करा लिया है। दूसरी बेटी प्रिया इंटर द्वितिय वर्ष की छात्रा है। गोलू दसम व सुप्रिया सातंवा वर्ग मे पढती है। वह खुद कष्ट काट कर बच्चे को उंचे ओहदे तक पहुंचाना चाहती है।

 बेटे के इलाज मे हो गयी कंगाल

सुनिता की शादी वर्ष 1990 मे टेंगरारी के राजेंद्र साह से हुई थी। सुनिता के जेठ नेपाल व देवर अन्य प्रदेशो मे रहते थे। सुनिता को  एक लड़की के जन्म के दो साल बाद मायके वैशाली के महुआ मे लड़का का जन्म हुआ। सुनिता के दुख के कहानी यहीं से शुरूआत होती है। उसके तबियत खराब होने के कारण सुनिता का मायके से ससुराल आना जाना लगा रहा। छह महिना का जब लड़का हो गया तो वह ससुराल आ गयी। घर वाले के लापरवाही के कारण वह बच्चा सड़क किनारे गिर कर जख्मी हो गया। सुनिता ने गांव से लेकर शहर तक इलाज करवाया। कर्ज पर कर्ज लेता रहा किंतु कोई सुधार नही हुआ। आइजीएमएस पटना से दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया.सुनिता को दिल्ली जाने के लिए फूटी कौड़ी नही थे। ससुराल मे उसके शरीर के गहने बेचने पर रोक लगा दी गयी। हालांकि पति ने सुनिता को भरपूर साथ दिया। सुनिता के मायके के रिश्तेदारो ने पचास हजार रूपया का व्यवस्था कर भिजवाया। इसके बाद वह दिल्ली गयी। दिल्ली मे पैसा भी खर्च हो गया,किंतु सुधार नही हुआ।गांव मे आभूषण गिरवी रखने के बदले पांच हजार रूपया दे रहा था। बाद मे सुनिता बेटे चंदन को लेकर घर आ गयी। बाद मे मोतीझील मे आयुर्वेदिक इलाज से सुधार हो गया। दिल्ली मे सफर के दौरान सुनिता बस से गिर गयी। लालबत्ती जलने के बाद वह किसी तरह अपनी जान बचायी। शादी के 14 साल बाद वर्ष 2004 मे उसको घर से निकाल दिया गया। पड़ोस के जानकी साह ने सुनिता को अपने घर मे पनाह दिया। सुनिता बच्चो के साथ सात दिन और सात रोज तक भूखे प्यासे रही। घर मे ना ही अन्न थे ना ही दाना.सात रोज बाद सुनिता ने गांव से ही पांच किलो दाल उधारी लेकर बरी(मेथौड़ी) तैयार किया। पहले दिन बड़ी बेटी के माध्यम से बाजार मे भेजा। एक किलो बिकने के बाद डेढ सौ रूपया आया। उस पैसे से सुनिता ने पांच दिन के भोजन व बेटी के ट्युशन के एक माह का फीस निकाला। उसके बाद सुनिता ने सिलाई ट्रेनिंग सेंटर खोला। सुनिता मायके से ही सिलाई कटाई मे पारंगत है। पहले दिन छह लड़की आयी सिलाई सिखने। दूसरे दिन संख्या-12 हो गयी.एक महिना मे 12 हजार रूपया सिलाई से आमद आने लगा। जीविका से जुड़ने के बाद सुनिता ने गांव मे दुसरा सिलाई सेंटर भी खोल लिया है। अब वह दो शिफ्टो मे काम करती है। पति नेपाल मे काम शुरू कर दिये है। अब सुनिता ने बच्चो को अच्छी शिक्षा देना शुरू कर दिया है। सुनिता ने अपने हिस्से की जमीन मे बेहतर तरीके से पांच लाख की लागत से मकान बनाया है। गृहप्रवेश के लिए शुभ तिथि का इंतजार है। सुनिता ने जीविका से जुड़ने के बाद सीआरपी का काम भी शुरू कर दिया है। उसने राजस्थान,चितौड़गढ व साहेबगंज मे जीविका का काम कर बढिया पैसा कमाया है। अब वह खराब दिनो से बाहर निकल गयी है। जीविका के क्षेत्रिय समन्वयक कौशल किशोर प्रसाद बताते है कि सुनिता की ममता बेमिशाल है। वह महिला सशक्तिकरण की जीता जागता उदाहरण है।

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

Latest articles

3 इडियट्स से मिली सीख : आमिर खान अब फिल्मों के टाइटल हिंदी में क्यों रखते हैं

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता Aamir Khan अपनी फिल्मों को लेकर बेहद सोच समझकर फैसले...

मकर संक्रांति में क्यों दही-चूड़ा सबसे खास और हेल्दी व्यंजन

मकर संक्रांति 2026 के मौके पर देशभर में पारंपरिक उत्साह के साथ पर्व मनाया...

बिहार के मखाना बन रहा रोजगार और आय का नया जरिया

मखाना, जिसे फॉक्स नट के नाम से भी जाना जाता है, वर्षों से बिहार...

Budget Smartphone : कम कीमत में 8GB और 12GB RAM वाले फोन उपलब्ध

स्मार्टफोन खरीदते समय ज्यादा RAM का मतलब अक्सर ज्यादा कीमत होता है। हालांकि अब...

More like this

गुमनाम हकीकत” – संपूर्ण पुस्तक समीक्षा

KKN ब्यूरो। "गुमनाम हकीकत: अ फॉरगॉट्न हिस्ट्री" कौशलेंद्र झा द्वारा लिखी गई एक अतुलनीय...

टू नेशन थ्योरी: विभाजन की वैचारिक नींव और उसका सच

धर्म के आधार पर एक राष्ट्र की परिकल्पना से लेकर भारत के बंटवारे तक KKN...

सहदेव झा…एक गुमनाम शख्सियत

अगस्त क्रांति का महानायक KKN न्यूज ब्यूरो। बिहार में मुजफ्फरपुर जिला का एक कस्बा है-मीनापुर...।...
00:10:01

जब मुजफ्फरपुर बना आज़ादी की जंग का गढ़: खुदीराम, शारदा और सहदेव की अनसुनी कहानी

जब भी हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं, तो दिल्ली, बंगाल और पंजाब...

अगर रामायण की घटनाएं आज होतीं तो कैसी होती खबरें?

KKN न्यूज ब्यूरो। धार्मिक ग्रंथ रामायण का हर प्रसंग हमें जीवन के महत्वपूर्ण संदेश...

गुरु रविदास: समाज सुधार और आध्यात्मिकता के प्रतीक

KKN न्यूज ब्यूरो। हर साल माघ पूर्णिमा के दिन गुरु रविदास जयंती (Guru Ravidas...

कौन थे कनकलता बरुआ और गुरुजी – “भारत छोड़ो आंदोलन” की अनसुनी दास्तान

8 अगस्त 1942, मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में महात्मा गांधी के 'भारत छोड़ो'...

रेजांगला का युद्ध और चीन की हकीकत

KKN न्यूज ब्यूरो। वर्ष 1962 के युद्ध की कई बातें है, जिसको समझना जरूरी...

प्रार्थना पर प्रहार क्यों

तेज आवाज की चपेट में है गांव KKN न्यूज ब्यूरो। चार रोज से चल रहा...

महापर्व छठ का खगोलीय महत्व

KKN न्यूज ब्यूरो। लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को...

इलाहाबाद क्यों गये थे चन्द्रशेखर आजाद

KKN न्यूज ब्यूरो। बात वर्ष 1920 की है। अंग्रेजो के खिलाफ सड़क पर खुलेआम...

प्लासी में ऐसा क्या हुआ कि भारत को अंग्रेजो का गुलाम होना पड़ा

इन दिनो भारत में आजादी का अमृत महोत्सव चल रहा है। यह बात हम...

फेक न्यूज की पहचान का आसान तरिका

सूचनाएं भ्रामक हो तो गुमराह होना लाजमी हो जाता है। सोशल मीडिया के इस...

इन कारणो से है मुजफ्फरपुर के लीची की विशिष्ट पहचान  

अपनी खास सांस्कृतिक विरासत के लिए दुनिया में विशिष्ट पहचान रखने वाले भारत की...

माउंट एवरेस्ट का एक रोचक रहस्य जो हमसे छिपाया गया

हिमालय पर्वत माला की सबसे उंची चोटी है माउंट एवरेस्ट। इस नाम को लेकर...