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बिहार में आयोगों की नियुक्तियों को लेकर तेजस्वी यादव का तंज

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KKN गुरुग्राम डेस्क | बिहार की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और एनडीए गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बिहार में आयोगों की नियुक्ति में जमकर भाई-भतीजावाद हो रहा है। उन्होंने चिराग पासवान, संतोष मांझी और सांसद शांभवी चौधरी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके परिजनों को आयोगों में सदस्य बनाया गया है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

तेजस्वी यादव ने आयोगों में की गई इन कथित नियुक्तियों पर तंज कसते हुए कहा कि अब ‘जीजा आयोग’ और ‘मेहरारू आयोग’ का गठन भी कर देना चाहिए, क्योंकि जो हो रहा है वह सिर्फ “परिवारवाद की राजनीति” का विस्तार है।

आयोगों में अपनों को पद, तेजस्वी का तंज

पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा:

“बिहार में आयोगों की रचना जिस तरह से हो रही है, वह हास्यास्पद है। चिराग पासवान के जीजा, संतोष मांझी के जीजा, और एक सांसद (शांभवी चौधरी) के पति को आयोग में सदस्य बना दिया गया है। लगता है अब जीजा आयोग और मेहरारू आयोग का गठन करना बाकी रह गया है।”

तेजस्वी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नियुक्तियों में योग्यता की बजाय रिश्तेदारी को महत्व दिया जा रहा है, और यह लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है।

प्रधानमंत्री मोदी पर भी साधा निशाना

तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हर बार बिहार आकर विपक्ष को ‘परिवारवाद’ के नाम पर निशाना बनाते हैं, लेकिन अपने गठबंधन में उन्हें कुछ नहीं दिखता।

“मोदी जी हर बार कहते हैं कि परिवारवाद से लोकतंत्र खतरे में है। लेकिन जब उनके सहयोगी पार्टियों के लोग अपने परिवारजनों को आयोगों में बैठाते हैं, तब वे चुप क्यों रहते हैं?” – तेजस्वी यादव

उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी ‘पाखंडपूर्ण नैतिकता’ की राजनीति कर रहे हैं, जहां नियम सिर्फ विपक्ष के लिए लागू होते हैं।

RSS कोटे से नियुक्तियों का आरोप

तेजस्वी यादव ने आयोगों में RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कोटे से भी नियुक्तियों का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बिहार में अब नियुक्तियाँ संघ की सिफारिशों पर होने लगी हैं, जो कि पूरी तरह से संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के खिलाफ है।

“योग्यता का कोई मतलब नहीं रह गया है। अब आयोगों में भी संघ का एजेंडा लागू किया जा रहा है,” – तेजस्वी यादव

यह बयान विपक्ष की उस पुरानी आशंका को दोहराता है जिसमें कहा जाता रहा है कि संघ का असर प्रशासनिक नियुक्तियों पर बढ़ता जा रहा है।

नीतीश कुमार की स्थिति पर सवाल

तेजस्वी यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदा स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब कोई नहीं जानता कि नीतीश कुमार सरकार चला भी रहे हैं या नहीं।

“नीतीश जी किस स्थिति में हैं, ये किसी को नहीं पता। उनके आसपास जो भूंजा पार्टी के लोग हैं, वही अब सरकार चला रहे हैं। राज्य में अफरा-तफरी और लूट मची हुई है।”

यह तंज साफ़ तौर पर इस ओर इशारा करता है कि नीतीश कुमार की राजनीतिक पकड़ अब कमजोर हो चुकी है, और भाजपा गठबंधन में उनका कद सिमटता जा रहा है।

हवाई अड्डा बनाना ठीक, लेकिन किराया कौन तय करेगा?

बिहार में नए हवाई अड्डों के निर्माण पर भी तेजस्वी यादव ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे का विकास स्वागत योग्य है, लेकिन सवाल यह है कि क्या साधारण लोग उस सुविधा का लाभ उठा पाएंगे?

“नया एयरपोर्ट बनाना अच्छी बात है। लेकिन क्या हवाई चप्पल पहनने वाला आम आदमी अब हवाई यात्रा कर पा रहा है? आज टिकट के दाम आसमान छू रहे हैं। यह विकास किसके लिए हो रहा है?”

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान पर तंज कसा जिसमें कहा गया था कि “हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में सफर करेगा”। तेजस्वी का कहना था कि यह वादा अब तक हकीकत से दूर है।

बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार को घेरा

तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दों पर सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार और पूरे देश में युवाओं की एक बेरोजगार फौज खड़ी हो रही है, लेकिन सरकारें सिर्फ राशन बांटकर खुद को सफल मान रही हैं।

“रोजगार नहीं है, शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है, स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल हैं – लेकिन सरकार को इन मुद्दों से कोई मतलब नहीं। देश की युवा शक्ति हताश हो रही है।”

उन्होंने कहा कि जनता अब केवल सांकेतिक योजनाओं से नहीं, बल्कि वास्तविक बदलाव चाहती है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी का संकेत

तेजस्वी यादव का यह बयान न सिर्फ एक राजनीतिक हमला है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि RJD अब पूरी तरह से बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी में जुट चुकी है। उन्होंने NDA सरकार के दोहरे मापदंडों, भाई-भतीजावाद, और विकास के खोखले दावों को उजागर करने की रणनीति अपनाई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि RJD इस बार युवाओं, अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्गों को एकजुट कर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।

तेजस्वी यादव के इस तेजतर्रार और व्यंग्यात्मक हमले ने बिहार की राजनीति में भाई-भतीजावाद बनाम योग्यता की बहस को फिर से ज़िंदा कर दिया है। बिहार में आयोगों की नियुक्तियों को लेकर जो सवाल उठे हैं, वह राज्य सरकार के लिए बड़ा सियासी सिरदर्द बन सकते हैं।

बिहार चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, तेजस्वी यादव का यह आक्रामक रुख दर्शाता है कि RJD अब चुनावी मुकाबले के लिए पूरी ताकत झोंकने को तैयार है।

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